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गलियों में भैंस बांधकर चलाई जा रही डेयरियां बनी लोगों के लिए सिरदर्द
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पलवल। शहर की गलियों में भैंसें बांधकर चलाई जा रहीं दुग्ध डेयरियां लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं। इनसे जहां सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है, वहीं रास्ते में भैंसें बंधी होने के कारण गलियों से निकलना मुश्किल हो जाता है। कई बार तो भैंसें बाइक व साइकिल सवार को टक्कर मार गिराकर चोटिल भी कर देती हैं। इतना ही नहीं इन दुग्ध डेयरियों के कारण कई बार नई गाड़ियों में भैंसों के रगड़ खाने से निशान तक पड़ जाते हैं। कोई दुग्ध डेयरियां चलाने वालों से शिकायत करता है तो उलटा वे उसी से भिड़ जाते हैं।
इन भैंसों के गोबर से नालियां व सीवर जाम हो रहे हैं। उसके बावजूद लोग गलियों में अतिक्रमण करके पशु बांधने से बाज नहीं आ रहे हैं। स्वच्छ पलवल-स्वस्थ पलवल योजना की धारणा को भी पलीता लग रहा है। इन सबके बावजूद नगर परिषद पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। आज तक इन अवैध रूप से बिना लाइसेंस के चल रही दुग्ध डेयरियों के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की गई है।
डेयरियों को बाहर करने की बनाई गई थी योजना
शहरी विकास विभाग की पहल पर करीब 14 वर्ष पहले पलवल से डेयरियों को बाहर भेजने की योजना बनाई गई थी। अगवानपुर गांव में पंचायत की करीब 10 एकड़ भूमि चिह्नित कर संचालकों के लिए प्लॉट काटे जाने थे। अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे गोबर गैस प्लांट, पशु चारा बिक्री केंद्र, दुग्ध विक्रय केंद्र, नलकूप सुविधा भी शामिल थे। नगर परिषद कार्यालय द्वारा पूरा प्रस्ताव बनाकर शहरी विकास विभाग को भेजा था, विभाग के अधिकारी प्रस्तावित डेयरी स्थल का चयन भी कर गए थे, लेकिन योजना लालफीताशाही का शिकार हो गई।
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शहर में गलियों में चल रहीं अवैध रूप से दुग्ध डेयरियों को शहर से बाहर किया जाना चाहिए। इससे रिहायशी क्षेत्रों में इनके कारण फैली गंदगी दूर होगी तथा आए दिन नालियों व सीवर जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी।
- मुनीष भारद्वाज, पूर्व पार्षद
गलियों में चार-चार भैंस बांधकर चलाई जा रही दुग्ध डेयरियों को बाहर अलग से जगह देकर स्थापित कराना चाहिए। नगर परिषद को इस प्रस्ताव पर ध्यान देना चाहिए। डेयरियों की सूची तैैयार कर उन्हें जगह उपलब्ध कराएं।
- मिथलेश शर्मा, जिलाध्यक्ष महिला जागृति मंच
मैं जानकारी लूंगा कि पहले ऐसी कौन सी योजना थी। गलियों में भैंस बांधने वालों को नोटिस दिए जाएंगे। उच्च अधिकारियों से बात कर डेयरियों को बाहर कराने की योजना बनवाई जाएगी।
- मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद पलवल
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इन भैंसों के गोबर से नालियां व सीवर जाम हो रहे हैं। उसके बावजूद लोग गलियों में अतिक्रमण करके पशु बांधने से बाज नहीं आ रहे हैं। स्वच्छ पलवल-स्वस्थ पलवल योजना की धारणा को भी पलीता लग रहा है। इन सबके बावजूद नगर परिषद पूरी तरह से आंखें मूंदे बैठा है। आज तक इन अवैध रूप से बिना लाइसेंस के चल रही दुग्ध डेयरियों के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं की गई है।
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डेयरियों को बाहर करने की बनाई गई थी योजना
शहरी विकास विभाग की पहल पर करीब 14 वर्ष पहले पलवल से डेयरियों को बाहर भेजने की योजना बनाई गई थी। अगवानपुर गांव में पंचायत की करीब 10 एकड़ भूमि चिह्नित कर संचालकों के लिए प्लॉट काटे जाने थे। अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे गोबर गैस प्लांट, पशु चारा बिक्री केंद्र, दुग्ध विक्रय केंद्र, नलकूप सुविधा भी शामिल थे। नगर परिषद कार्यालय द्वारा पूरा प्रस्ताव बनाकर शहरी विकास विभाग को भेजा था, विभाग के अधिकारी प्रस्तावित डेयरी स्थल का चयन भी कर गए थे, लेकिन योजना लालफीताशाही का शिकार हो गई।
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शहर में गलियों में चल रहीं अवैध रूप से दुग्ध डेयरियों को शहर से बाहर किया जाना चाहिए। इससे रिहायशी क्षेत्रों में इनके कारण फैली गंदगी दूर होगी तथा आए दिन नालियों व सीवर जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी।
- मुनीष भारद्वाज, पूर्व पार्षद
गलियों में चार-चार भैंस बांधकर चलाई जा रही दुग्ध डेयरियों को बाहर अलग से जगह देकर स्थापित कराना चाहिए। नगर परिषद को इस प्रस्ताव पर ध्यान देना चाहिए। डेयरियों की सूची तैैयार कर उन्हें जगह उपलब्ध कराएं।
- मिथलेश शर्मा, जिलाध्यक्ष महिला जागृति मंच
मैं जानकारी लूंगा कि पहले ऐसी कौन सी योजना थी। गलियों में भैंस बांधने वालों को नोटिस दिए जाएंगे। उच्च अधिकारियों से बात कर डेयरियों को बाहर कराने की योजना बनवाई जाएगी।
- मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद पलवल