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डेढ़ साल बाद भी दिलों में बनी हैं दरारें

Wed, 11 Jan 2017 04:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 11 Jan 2017 04:10 PM IST
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One and a half years later, there are cracks in the hearts
टीकरी गांव - फोटो : अमर उजाला

करीब 18 माह बाद भी गांव टीकरी ब्राह्मण के लोगों के बीच आई दरार भर नहीं पाई है। हालांकि गांव के दोनों समुदायों के लोग एक दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं। गांव के सरपंच का चुनाव भी लोगों ने शांतीपूवर्क संपन्न करा लिया। लेकिन जब भी कभी दंगे की बात होती है तो दर्द उभर कर आ जाता है। सोमवार को हाईकोर्ट ने दंगे की जांच के लिए बनी एसआईटी पर सवाल उठाए तो एक बार फिर से यह चर्चा का केंद्र बन गया। हालात का जायजा लेने के बाद पेश है संवाददाता संजय मग्गू की रिर्पोट : 

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अफवाहों ने छीना अमन-चैन : 
गांव के साहब खान, इजराइल, हनीफ, शिवलाल, सुमेर सिंह व घनश्याम पांच जुलाई के घटनाक्रम पर कहते हैं कि उससे पूर्व गांव में अमन चैन था। कुछ समय पूर्व एक जमीन को लेकर विवाद हुआ था, जिसे उसी समय सुलझा लिया गया। पांच जुलाई को अफवाह फैली कि महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की गई है। देखते ही देखते बबाल मच गया। लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। समुदाय विशेष के लोगों के घरों को आग के हवाले कर दिया गया। असमाजिक तत्वों ने कथित रूप से लूटपाट भी की। हादसे में 15 से अधिक लोग घायल हो गए। दंगे की आग इस कदर भड़की कि तत्कालीन डीसी अशोक मीणा व एसपी मितेश जैन की मौजूदगी में घंटों फायरिंग और पथराव होता रहा। 
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गैर हाजिर मिले पुलिसकर्मी
गांव में तनाव के बाद से अब तक पुलिस तैनात है। गांव के स्कूल में पांच पुलिसकर्मियों की गारद तैनात है। जिनमें एएसआई अनिल कुमार, हेड कांस्टेबल शेर सिंह, रामभगत, विजय कुमार व अरविंद शामिल हैं। लेकिन मंगवलार की दोपहर जब अमर उजाला ने स्कूल का जायजा लिया तो पुलिसकर्मी नदारद मिले। बाद में पता चला कि केवल एएसआई अनिल कुमार ही ड्यूटी पर मौजूद हैं, बाकी पुलिसकर्मी छुट्टी पर गए हुए हैं।
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...तो सुलझ चुका होता मामला
गांव में पूरी तरह से शांति का माहौल है। हालांकि जिन लोगों का नुकसान हुआ, उनमें रोष है। अब मामला अदालत में चल रहा है। यदि शुरू में ही जांच ठीक से होती, तो शायद अब तक मामला सुलझ चुका होता। 
-अयूब खा, सरपंच, टीकरी ब्राह्मण। 

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