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छोरा लाइयो तीर कमान, मुंडेरी पै बुलबुल बैठी है...
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पलवल। ‘छोरा लाइयो तीर कमान, मुंडेरी पै बुलबुल बैठी है... ‘भर पिचकारी तेरे अंगनाय मारू’ और ‘देवरिया नादान पीया गए फौज में कौन संग होली खेलूं रे’ जैसे लोकगीतों के उठते सुर। रसिया की धुनों पर थिरकते महिलाएं और पुरुष। रविवार को फाल्गुन लगने के साथ ही जिले के गांवों में अलग रौनक दिखने लगी है।
पलवल जिला बृज क्षेत्र में आता है। होली का पर्व तो वसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है, जब होलिका दहन के लिए हर गांव व शहर में डांढा गाढ़ दिया जाता है। तभी से होली का माहौल बनना शुरू हो जाता है। फाल्गुन माह लगने के साथ ही इस माहौल में गर्मी आनी शुरू हो जाती है। वहीं शादी-विवाह व मांगलिक कार्यक्रमों में बजने वाले डीजे पर फिल्मी गीतों से ज्यादा होली के रसिया गीत बजने शुरू हो जाते हैं। इतना ही नहीं गांवों में भी कोई कार्यक्रम हो, उनमें भी होली के रसिया बजने लगते हैं। ब्रज भाषा के इन गीतों पर युवाओं के साथ ही महिलाएं-पुरुष और बुजुर्ग भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाते। रविवार को फाल्गुन लगने के साथ ही ब्रज क्षेत्र में भी होली के रसिया गीत शुरू हो गए हैं। जिले के बड़े गांव बंचारी में तो होली के कार्यक्रम शुरू भी हो गए हैं। शाम से ही गांव में गीतों की लहर उठती रही।
जिले में अब सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों द्वारा होली मंगल मिलन समारोह के आयोजन जल्द ही शुरू कर दिए जाएंगे। वहीं श्रीमद भागवत कथा या फिर किसी सत्संग, संकीर्तन आदि में भी होली के रसिया गीत बजने शुरू हो जाएंगे। जिला ब्राह्मण सभा व आरएमपी डाक्टरों की एसोसिएशन ने तो होली मंगल मिलन समारोह मनाने की तिथि भी सुनिश्चित कर दी है। मई महीने में ग्राम पंचायतों व नगर परिषदों के भी चुनाव हैं, ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों ने भी होली मंगल मिलन समारोह आयोजित करने के लिए रूपरेखा बनानी शुरू कर दी है।
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लट्ठमार होली देखने पहुंचते हैं मथुरा
बृज क्षेत्र के पलवल जिले के पड़ोसी जिले मथुुरा व बरसाने में भी होली के रंग जल्द दिखाई देने शुरू हो जाएंगे। ऐसे में मथुरा व बरसाने में होने वाली लट्ठमार होली भी शुरू हो जाएगी। जिसे देखने के लिए जिले से भारी संख्या में लोगों का जाना भी शुरू हो जाएगा।
वर्जन-
बृज क्षेत्र में होली का अपना अलग ही महत्व है। फाल्गुन माह लगने के साथ ही ब्रज क्षेत्र में होली के रंग, होली के रसिया व नगाड़ों की थाप पर चौपइयों के कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। पलवल जिला ब्रज का ही हिस्सा है, ऐसे में यहां जिले के गांवों में भी होली के रसिया व रंग दिखाई देने लगते हैं। खासकर बंचारी, सौंदहद, दीघोट, औरंगाबाद जैसे बड़े गांवों में तो फाल्गुन लगने के साथ ही ब्रज के रसिया बजने शुरू हो जाते हैं। ये हमारी संस्कृति का भी हिस्सा है। - हरिश्चंद्र शास्त्री, वैदिक विद्वान, पलवल
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पलवल जिला बृज क्षेत्र में आता है। होली का पर्व तो वसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है, जब होलिका दहन के लिए हर गांव व शहर में डांढा गाढ़ दिया जाता है। तभी से होली का माहौल बनना शुरू हो जाता है। फाल्गुन माह लगने के साथ ही इस माहौल में गर्मी आनी शुरू हो जाती है। वहीं शादी-विवाह व मांगलिक कार्यक्रमों में बजने वाले डीजे पर फिल्मी गीतों से ज्यादा होली के रसिया गीत बजने शुरू हो जाते हैं। इतना ही नहीं गांवों में भी कोई कार्यक्रम हो, उनमें भी होली के रसिया बजने लगते हैं। ब्रज भाषा के इन गीतों पर युवाओं के साथ ही महिलाएं-पुरुष और बुजुर्ग भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाते। रविवार को फाल्गुन लगने के साथ ही ब्रज क्षेत्र में भी होली के रसिया गीत शुरू हो गए हैं। जिले के बड़े गांव बंचारी में तो होली के कार्यक्रम शुरू भी हो गए हैं। शाम से ही गांव में गीतों की लहर उठती रही।
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जिले में अब सामाजिक संस्थाओं और राजनीतिक दलों द्वारा होली मंगल मिलन समारोह के आयोजन जल्द ही शुरू कर दिए जाएंगे। वहीं श्रीमद भागवत कथा या फिर किसी सत्संग, संकीर्तन आदि में भी होली के रसिया गीत बजने शुरू हो जाएंगे। जिला ब्राह्मण सभा व आरएमपी डाक्टरों की एसोसिएशन ने तो होली मंगल मिलन समारोह मनाने की तिथि भी सुनिश्चित कर दी है। मई महीने में ग्राम पंचायतों व नगर परिषदों के भी चुनाव हैं, ऐसे में चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों ने भी होली मंगल मिलन समारोह आयोजित करने के लिए रूपरेखा बनानी शुरू कर दी है।
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लट्ठमार होली देखने पहुंचते हैं मथुरा
बृज क्षेत्र के पलवल जिले के पड़ोसी जिले मथुुरा व बरसाने में भी होली के रंग जल्द दिखाई देने शुरू हो जाएंगे। ऐसे में मथुरा व बरसाने में होने वाली लट्ठमार होली भी शुरू हो जाएगी। जिसे देखने के लिए जिले से भारी संख्या में लोगों का जाना भी शुरू हो जाएगा।
वर्जन-
बृज क्षेत्र में होली का अपना अलग ही महत्व है। फाल्गुन माह लगने के साथ ही ब्रज क्षेत्र में होली के रंग, होली के रसिया व नगाड़ों की थाप पर चौपइयों के कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। पलवल जिला ब्रज का ही हिस्सा है, ऐसे में यहां जिले के गांवों में भी होली के रसिया व रंग दिखाई देने लगते हैं। खासकर बंचारी, सौंदहद, दीघोट, औरंगाबाद जैसे बड़े गांवों में तो फाल्गुन लगने के साथ ही ब्रज के रसिया बजने शुरू हो जाते हैं। ये हमारी संस्कृति का भी हिस्सा है। - हरिश्चंद्र शास्त्री, वैदिक विद्वान, पलवल