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सीबीएसई बोर्ड रिजल्ट : मेहनत और हौसले से रची सफलता की कहानी, चांदनी बनी प्रेरणा
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निशांत पटेल
पलवल। शहर के श्री विश्वकर्मा सीनियर सेकेंडरी स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा चांदनी ने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 96.4% अंक प्राप्त कर नाम रोशन किया है। वह अपने स्कूल में दूसरे स्थान पर रही।
चांदनी के पिता बिमलेश, एक निजी कंपनी में कर्मचारी हैं और मां चंचल, एक गृहणी। दोनों ही सिर्फ दसवीं पास हैं, लेकिन अपनी बेटी के सपनों को ऊंची उड़ान देने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। चांदनी कहती है कि मेरे माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी। चांदनी ने अपनी सफलता का श्रेय श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षकों को दिया। उनका कहना है कि मेरे शिक्षकों ने हर कदम पर मार्गदर्शन दिया, जिससे मेरा आत्मविश्वास बना रहा। अब चांदनी का सपना है इंजीनियर बनने का। वह कहती है कि मैं तकनीक की दुनिया में कुछ अलग करना चाहती हूं। सीमित संसाधन मेरे रास्ते की दीवार नहीं हैं, बल्कि मेरी ताकत हैं। चांदनी की यह कहानी न सिर्फ परीक्षा पास करने की है, बल्कि सपनों को साकार करने की जिद और मेहनत से पाई गई ऊंचाइयों की भी है – एक ऐसी कहानी, जो हर छात्र को प्रेरणा देती है कि अगर इच्छा हो तो हालात भी रास्ता दे देते हैं।
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पलवल। शहर के श्री विश्वकर्मा सीनियर सेकेंडरी स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा चांदनी ने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में 96.4% अंक प्राप्त कर नाम रोशन किया है। वह अपने स्कूल में दूसरे स्थान पर रही।
चांदनी के पिता बिमलेश, एक निजी कंपनी में कर्मचारी हैं और मां चंचल, एक गृहणी। दोनों ही सिर्फ दसवीं पास हैं, लेकिन अपनी बेटी के सपनों को ऊंची उड़ान देने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी। चांदनी कहती है कि मेरे माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी। चांदनी ने अपनी सफलता का श्रेय श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के शिक्षकों को दिया। उनका कहना है कि मेरे शिक्षकों ने हर कदम पर मार्गदर्शन दिया, जिससे मेरा आत्मविश्वास बना रहा। अब चांदनी का सपना है इंजीनियर बनने का। वह कहती है कि मैं तकनीक की दुनिया में कुछ अलग करना चाहती हूं। सीमित संसाधन मेरे रास्ते की दीवार नहीं हैं, बल्कि मेरी ताकत हैं। चांदनी की यह कहानी न सिर्फ परीक्षा पास करने की है, बल्कि सपनों को साकार करने की जिद और मेहनत से पाई गई ऊंचाइयों की भी है – एक ऐसी कहानी, जो हर छात्र को प्रेरणा देती है कि अगर इच्छा हो तो हालात भी रास्ता दे देते हैं।
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