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Palwal News: जगह-जगह टूटे पड़े ड्रेनेज चैंबर के ढक्कन दे रहे हादसों को न्योता
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मेडिकल कॉलेज में मैनहोल का टूटा हुआ ढक्कन, इसके पास ही बैठे है मरीजों के तीमारदार।
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मरीजों और तीमारदारों पर मंडरा रहा हादसे का खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज में लापरवाही बरती जा रही है। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर सीवर और ड्रेनेज चैंबरों के ढक्कन टूटे हुए हैं, जिससे यहां आने वाले मरीजों व तीमारदारों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।
अस्पताल परिसर में रोजाना हजारों लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें गंभीर मरीज, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल होते हैं। ऐसे में खुले या टूटे हुए चैंबर किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। कई जगह ढक्कन पूरी तरह टूट चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर उनमें बड़े-बड़े छेद हो गए हैं। यदि कोई व्यक्ति अनजाने में इन पर पैर रख दे तो वह सीधे चैंबर में गिर सकता है।
चिंताजनक यह है कि कई टूटे हुए ढक्कन ऐसे स्थानों पर हैं जहां लोगों की आवाजाही सबसे अधिक रहती है। अस्पताल की ओपीडी, वार्डों के आसपास, पार्किंग क्षेत्र और मुख्य मार्गों पर भी ऐसे चैंबर देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद अब तक इनकी मरम्मत या बदलाव के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
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मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में इलाज कराने आने वाले लोग पहले ही बीमारी और परेशानी से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में परिसर के भीतर सुरक्षा संबंधी खामियां उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग के साथ दुर्घटना हो जाए तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
बरसात के मौसम में बढ़ सकता है खतरा
बरसात का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में टूटे हुए चैंबरों में पानी भर जाने से उनकी स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है। पानी भरने के बाद गड्ढे दिखाई नहीं देंगे और किसी के भी उसमें गिरने की आशंका बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों और मरीजों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से मांग की है कि परिसर का तत्काल सर्वे कराया जाए और जहां-जहां चैंबरों के ढक्कन टूटे हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए। साथ ही मरम्मत होने तक ऐसे स्थानों को बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत लगाकर सुरक्षित किया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब 500 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज में लापरवाही बरती जा रही है। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर सीवर और ड्रेनेज चैंबरों के ढक्कन टूटे हुए हैं, जिससे यहां आने वाले मरीजों व तीमारदारों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।
अस्पताल परिसर में रोजाना हजारों लोग इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें गंभीर मरीज, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल होते हैं। ऐसे में खुले या टूटे हुए चैंबर किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। कई जगह ढक्कन पूरी तरह टूट चुके हैं, जबकि कुछ स्थानों पर उनमें बड़े-बड़े छेद हो गए हैं। यदि कोई व्यक्ति अनजाने में इन पर पैर रख दे तो वह सीधे चैंबर में गिर सकता है।
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चिंताजनक यह है कि कई टूटे हुए ढक्कन ऐसे स्थानों पर हैं जहां लोगों की आवाजाही सबसे अधिक रहती है। अस्पताल की ओपीडी, वार्डों के आसपास, पार्किंग क्षेत्र और मुख्य मार्गों पर भी ऐसे चैंबर देखे जा सकते हैं। इसके बावजूद अब तक इनकी मरम्मत या बदलाव के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।
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मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में इलाज कराने आने वाले लोग पहले ही बीमारी और परेशानी से जूझ रहे होते हैं। ऐसे में परिसर के भीतर सुरक्षा संबंधी खामियां उनकी मुश्किलों को और बढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि यदि किसी बच्चे या बुजुर्ग के साथ दुर्घटना हो जाए तो उसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
बरसात के मौसम में बढ़ सकता है खतरा
बरसात का मौसम शुरू होने वाला है। ऐसे में टूटे हुए चैंबरों में पानी भर जाने से उनकी स्थिति और अधिक खतरनाक हो सकती है। पानी भरने के बाद गड्ढे दिखाई नहीं देंगे और किसी के भी उसमें गिरने की आशंका बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में इस प्रकार की लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों और मरीजों ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन से मांग की है कि परिसर का तत्काल सर्वे कराया जाए और जहां-जहां चैंबरों के ढक्कन टूटे हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर बदला जाए। साथ ही मरम्मत होने तक ऐसे स्थानों को बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत लगाकर सुरक्षित किया जाए।