फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Palwal News ›   Bribery scheme to get sealed hospital reopened

Palwal News: सील अस्पताल खुलवाने के लिए रिश्वत का खेल, डिप्टी सीएमओ 50 हजार लेते गिरफ्तार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jun 2026 12:27 AM IST
विज्ञापन
Bribery scheme to get sealed hospital reopened
डॉक्टर मनप्रीत सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

पुन्हाना। स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की बड़ी कार्रवाई ने पूरे जिले में हलचल मचा दी है। करीब एक सप्ताह पहले निजी अस्पताल पर हुई कार्रवाई के मामले में अस्पताल की सील खुलवाने और संचालक का नाम मुकदमे से निकलवाने के एवज में कथित रूप से रिश्वत मांग रहे नूंह के डिप्टी सीएमओ डॉ. मनप्रीत सिंह को एसीबी ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
जानकारी के अनुसार, करीब दस दिन पहले पैमारोड स्थित लबूजा अस्पताल में सरकारी दवाएं मिलने और अन्य संदिग्ध गतिविधियों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया था तथा संबंधित धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज कराई थी। अस्पताल संचालक तौफीक, निवासी अलावलपुर ने आरोप लगाया कि मामले को रफा-दफा करने, अस्पताल की सील खुलवाने और उसका नाम मुकदमे से हटवाने के लिए डिप्टी सीएमओ की ओर से पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की जांच शुरू की और योजना के तहत सोमवार को पुन्हाना-शिकरावा रोड स्थित मोहन भट्ठा के पास जाल बिछाया। आरोप है कि जैसे ही डॉ. मनप्रीत सिंह ने 50 हजार रुपये की पहली किस्त ली, एसीबी टीम ने उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक गलियारों में इस मामले की चर्चा पूरे दिन होती रही।
विज्ञापन

डॉ. मनप्रीत को जिले में निजी अस्पतालों की जांच और कार्रवाई के लिए नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई थी। करीब दो वर्ष के दौरान जिले में कई निजी अस्पतालों पर छापेमारी कर कार्रवाई की गई और अनेक अस्पतालों को सील भी किया गया। हालांकि, कुछ समय बाद कई अस्पतालों के दोबारा संचालित होने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन


दो साल में दर्जनों अस्पतालों पर कार्रवाई, फिर भी नहीं थमा अवैध संचालन
जिले में पिछले दो वर्षों के दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से दर्जनों निजी क्लिनिक, अस्पताल और अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापेमारी की गई। कई संस्थानों को नियमों के उल्लंघन, बिना अनुमति संचालन और अन्य अनियमितताओं के आरोप में सील भी किया गया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि इनमें से कई अस्पतालों में कार्रवाई के महज तीन-चार दिन बाद ही दोबारा मरीजों का इलाज शुरू होने की चर्चाएं सामने आती रही। पिछले दिनों पुन्हाना, पिनगवां के आइकॉन, स्टार, सहारा, फातिमा, फैमिली, किरण, सोफिया, शबनम, गुलशन सहित कई अस्पतालों पर छापेमारी कर मुकदमा दर्ज कराया गया, लेकिन इन अस्पतालों में तीन चार दिन बाद पहले जैसा काम होने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल सील होने के बाद कुछ समय के लिए गतिविधियां बंद होती हैं, लेकिन बाद में अधिकांश संस्थान फिर से संचालित होने लगते हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं।

सांठगांठ के सहारे फल-फूल रहे जच्चा-बच्चा केंद्र
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर उठ रहे सवालों के बीच पुन्हाना शहर में अवैध रूप से संचालित जच्चा-बच्चा केंद्रों का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुन्हाना शहर में 50 से अधिक निजी जच्चा-बच्चा केंद्र संचालित हो रहे हैं। इनमें से कई केंद्रों के पास आवश्यक संसाधन, विशेषज्ञ चिकित्सक और निर्धारित मानकों के अनुरूप सुविधाएं नहीं होने के बावजूद मरीजों का उपचार और प्रसव कराए जाने के आरोप लगते रहे हैं। आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और संचालकों की कथित सांठगांठ के चलते ऐसे संस्थान बेखौफ होकर काम करते रहते हैं।

क्लिनिक नहीं, निजी मकानों में हो रहा प्रसव
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की निगरानी पर सवालों के बीच निजी मकानों में प्रसव कराए जाने का मामला भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। शहर सहित कई गांवों और कस्बों में बिना पंजीकरण और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं के निजी मकानों को ही अस्थायी प्रसव केंद्र बनाकर संचालन किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर न तो प्रशिक्षित विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध होते हैं और न ही आपातकालीन चिकित्सा उपकरण। इसके बावजूद गर्भवती महिलाओं का प्रसव कराया जाता है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना रहता है। जटिल स्थिति होने पर मरीजों को आनन-फानन में बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed