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Palwal News: जिला नागरिक अस्पताल में नहीं मिल रहा कंबल, ठंड से कांप रहे मरीज
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कैप्शन:10- जिला नागरिक अस्पताल में ठंंड में घर से कंबल मंगवाकर बिस्तरों पर लेटी-जच्चा व बच्चा
कैप्शन: 11-जिला नागरिक अस्पताल में शौचालय में गदंगी
कैप्शन: 12-संतोष
कैप्शन: 13- मनीषा
जच्चा-बच्चा कक्ष में खिड़की का शीशा टूटा, सर्द हवाओं के कारण मरीजों का रुकना मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बेटा एक कंबल और दे दो या फिर हीटर लगा दो, ताकि इस कड़ाके की ठंड से अपनी बहू और पोते को बचा सकें। कंबल व हीटर न होने पर इस कंपाकंपाती ठंड से ये बीमार हो जाएंगे। अम्मा यहां यही है और कंबल या हीटर चाहिए तो अपने घर से मंगवा लो। यहां कोई गोदाम नहीं है। रविवार को प्रसव होने के बाद कंपाकंपाती ठंंड से कांपती जच्चा व छोटे से शिशु के लिए कंबल मांगने पर स्वास्थ्य कर्मियों व नर्स का यह जवाब था। जिसके चलते या तो लोगों ने घरों से और कंबल मंगवाए या फिर यूं ही समय गुजार दिया। मरीजों व उनके परिजनों की रविवार को छुट्टी होने के कारण कोई सुनवाई करने वाला नहीं था।
जिला नागरिक अस्पताल के जच्चा-बच्चा कक्ष में कमरों के अंदर टूटे शीशों के कारण अंदर आती ठंडी व सर्द हवाओं के कारण जच्चा-बच्चा का रहना मुश्किल हो रहा था, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई स्वास्थ्य कर्मी व नर्स नहीं था। नर्स अपने कक्ष में बैठी थीं। परिजन इधर से उधर कंबलों का इंतजाम करते घूम रहे थे, लेकिन कहीं कंबल न मिलने पर आखिर में उन्हें घरों से कंबल मंगवाने पडे़। जिले में रविवार को अधिकतम तापमान 15 डिग्री था, जबकि न्यूनतम तापमान 5 डिग्री था। जबकि सुबह 8 बजे तापमान अधिकतम 8 डिग्री और न्यूनतम 4 डिग्री था। सुबह 12 बजे तक जिले में कोहरा भी अधिक था। कोहरा इतना अधिक था कि 10 फीट की दूरी पर कुछ नजर नहीं आ रहा था। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कोहरा इससे भी अधिक था। लोग छुट्टी होने के कारण अलाव जलाकर या हीटरों के आगे बैठे थे, जबकि अस्पताल में मरीज ठंंड से कांप रहे थे। जिला नागरिक अस्पताल के जच्चा-बच्चा कक्ष में मरीज केवल ठंंड से परेशान नहीं थे, बल्कि वहां फैली गंदगी ओर शौचालय में फैली गंदगी से भी परेशान थे। बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सफाई कर्मी वहां सफाई करने को नहीं आया। जिस कारण मरीजों में रोष देखा गया।
मैं अपनी बहू के साथ आई हूं। यहां उसको बच्चा हुआ है। जच्चा-बच्चा कक्ष में खिड़की का शीशा टूटा हुआ है। सर्द हवाएं आ रही हैं, लेकिन यहां अस्पताल की तरफ से न तो खिड़की बंद करने का इंतजाम है और न ही मरीजों के लिए कंबल व हीटर का जुगाड़ है। कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। -संतोष गुलावद
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मैं इस बारे में पता करूंगा। अस्पताल में कंबलों की व्यवस्था पूरी है। जहां शीशे नहीं हैं, वहां पर्दे लगवाए हुए हैं, ताकि हवा न आए। मरीजों के परिजन अपनी मर्जी से घरों से कंबल लाते हैं। अस्पताल प्रबंधन द्वारा इंतजाम पूरे किए हुए हैं। -डॉ अजय माम, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, पलवल
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कैप्शन: 11-जिला नागरिक अस्पताल में शौचालय में गदंगी
कैप्शन: 12-संतोष
कैप्शन: 13- मनीषा
जच्चा-बच्चा कक्ष में खिड़की का शीशा टूटा, सर्द हवाओं के कारण मरीजों का रुकना मुश्किल
संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। बेटा एक कंबल और दे दो या फिर हीटर लगा दो, ताकि इस कड़ाके की ठंड से अपनी बहू और पोते को बचा सकें। कंबल व हीटर न होने पर इस कंपाकंपाती ठंड से ये बीमार हो जाएंगे। अम्मा यहां यही है और कंबल या हीटर चाहिए तो अपने घर से मंगवा लो। यहां कोई गोदाम नहीं है। रविवार को प्रसव होने के बाद कंपाकंपाती ठंंड से कांपती जच्चा व छोटे से शिशु के लिए कंबल मांगने पर स्वास्थ्य कर्मियों व नर्स का यह जवाब था। जिसके चलते या तो लोगों ने घरों से और कंबल मंगवाए या फिर यूं ही समय गुजार दिया। मरीजों व उनके परिजनों की रविवार को छुट्टी होने के कारण कोई सुनवाई करने वाला नहीं था।
जिला नागरिक अस्पताल के जच्चा-बच्चा कक्ष में कमरों के अंदर टूटे शीशों के कारण अंदर आती ठंडी व सर्द हवाओं के कारण जच्चा-बच्चा का रहना मुश्किल हो रहा था, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई स्वास्थ्य कर्मी व नर्स नहीं था। नर्स अपने कक्ष में बैठी थीं। परिजन इधर से उधर कंबलों का इंतजाम करते घूम रहे थे, लेकिन कहीं कंबल न मिलने पर आखिर में उन्हें घरों से कंबल मंगवाने पडे़। जिले में रविवार को अधिकतम तापमान 15 डिग्री था, जबकि न्यूनतम तापमान 5 डिग्री था। जबकि सुबह 8 बजे तापमान अधिकतम 8 डिग्री और न्यूनतम 4 डिग्री था। सुबह 12 बजे तक जिले में कोहरा भी अधिक था। कोहरा इतना अधिक था कि 10 फीट की दूरी पर कुछ नजर नहीं आ रहा था। ग्रामीण क्षेत्रों में तो कोहरा इससे भी अधिक था। लोग छुट्टी होने के कारण अलाव जलाकर या हीटरों के आगे बैठे थे, जबकि अस्पताल में मरीज ठंंड से कांप रहे थे। जिला नागरिक अस्पताल के जच्चा-बच्चा कक्ष में मरीज केवल ठंंड से परेशान नहीं थे, बल्कि वहां फैली गंदगी ओर शौचालय में फैली गंदगी से भी परेशान थे। बार-बार शिकायत के बावजूद कोई सफाई कर्मी वहां सफाई करने को नहीं आया। जिस कारण मरीजों में रोष देखा गया।
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मैं अपनी बहू के साथ आई हूं। यहां उसको बच्चा हुआ है। जच्चा-बच्चा कक्ष में खिड़की का शीशा टूटा हुआ है। सर्द हवाएं आ रही हैं, लेकिन यहां अस्पताल की तरफ से न तो खिड़की बंद करने का इंतजाम है और न ही मरीजों के लिए कंबल व हीटर का जुगाड़ है। कोई सुनवाई करने वाला नहीं है। -संतोष गुलावद
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मैं इस बारे में पता करूंगा। अस्पताल में कंबलों की व्यवस्था पूरी है। जहां शीशे नहीं हैं, वहां पर्दे लगवाए हुए हैं, ताकि हवा न आए। मरीजों के परिजन अपनी मर्जी से घरों से कंबल लाते हैं। अस्पताल प्रबंधन द्वारा इंतजाम पूरे किए हुए हैं। -डॉ अजय माम, वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, पलवल