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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल जारी
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पलवल। आंगनबाड़ी वर्कर एंड हेल्पर्स यूनियन की जिला इकाई की हड़ताल तीसरे दिन शुक्रवार को भी जारी रहा। कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय के पार्क में धरना दिया। प्रदर्शन की अध्यक्षता जिला प्रधान उर्मिला रावत व रामरति दलाल ने की। धरने का संचालन सचिव गीता व कृष्णा ने किया। इस अवसर पर कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि मांगें पूरी नहीं की गई तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन की राज्य प्रधान देवेंद्री शर्मा कि मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं के बारे में वर्ष 2018 में जो घोषणाएं की थी, उन्हें तीन साल गुजर जाने के बावजूद लागू नहीं किया जा रहा। केंद्र व प्रदेश सरकार आईसीडीएस और शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लाई है। प्ले स्कूलों के द्वारा आईसीडीएस को निजी हाथों व एनजीओ को सौंपने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रधान उर्मिला रावत ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से सुपरवाइजर का 50 प्रतिशत प्रमोशन का कोटा सरकार ने तय करके आज तक उसे लागू नहीं किया है। भारत सरकार ने वर्ष 2019 में कार्यकर्ता के 1500 रुपये और सहायक के 750 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिसे आज तक लागू नहीं किया है। आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया समय पर नहीं मिल रहा है। वर्दी भत्ते को नहीं दिया जा रहा है और आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया शहर का तीन हजार और बड़े शहरों का पांच हजार है, जिसको सरकार आज तक लागू नहीं कर रही है। न ही कम देने वालों पर कोई कार्रवाई की जा रही है।
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प्रदर्शन को संबोधित करते हुए यूनियन की राज्य प्रधान देवेंद्री शर्मा कि मुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं के बारे में वर्ष 2018 में जो घोषणाएं की थी, उन्हें तीन साल गुजर जाने के बावजूद लागू नहीं किया जा रहा। केंद्र व प्रदेश सरकार आईसीडीएस और शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लाई है। प्ले स्कूलों के द्वारा आईसीडीएस को निजी हाथों व एनजीओ को सौंपने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बर्दाश्त नहीं करेगी। प्रधान उर्मिला रावत ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से सुपरवाइजर का 50 प्रतिशत प्रमोशन का कोटा सरकार ने तय करके आज तक उसे लागू नहीं किया है। भारत सरकार ने वर्ष 2019 में कार्यकर्ता के 1500 रुपये और सहायक के 750 रुपये की बढ़ोतरी की थी, जिसे आज तक लागू नहीं किया है। आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया समय पर नहीं मिल रहा है। वर्दी भत्ते को नहीं दिया जा रहा है और आंगनबाड़ी केंद्रों का किराया शहर का तीन हजार और बड़े शहरों का पांच हजार है, जिसको सरकार आज तक लागू नहीं कर रही है। न ही कम देने वालों पर कोई कार्रवाई की जा रही है।
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