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आज शहीद हुए थे 425 मेवाती
Palwal
Updated Mon, 19 Nov 2012 12:00 PM IST
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हथीन। जब-जब देश पर विदेशियों ने आक्रमण किया, तब-तब मेवात के वीरों ने उनका डटकर मुकाबला किया। मेवात के वीरों ने दिल्ली के सुल्तानों व मुगल बादशाहों से ही नहीं, बल्कि अंग्रेजों से भी डटकर लोहा लिया। इस दौरान मेवात के सैकड़ों हिंदू-मुस्लिम शहीद हो गए। 1857 की क्रांति में मारे गए सैकड़ों शहीदों की याद में 19 नवंबर को ऐतिहासिक गांव रुपड़ाका में शहीदी दिवस समारोह धूमधाम से मनाया जाता है। सरकारी गजेटियर के मुताबिक 1857 की जंग-ए-आजादी में अंग्रेजों ने क्रांति को दबाने के उद्देश्य से 59 टोहाना हार्स बटालियन, 119 कुमायूं, 50 मोडशन तथा पंजाब प्रथम इन्फेंट्री की बटालियन ने एक साथ हमला कर दिया। इसका नेतृत्व कैप्टन डूमंड कर रहे थे, उनके पास लगभग 12 हजार सैनिक थे। उन्होंने एक साथ रूपड़ाका गांव में हमला कर दिया। 13 मई 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के समय मेवात के लोगों ने अपने आपको अंग्रेजों की गुलामी से आजाद घोषित कर दिया। इस विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेजों ने मेवातियों पर हमला कर दिया। जिसमें उन्हें मुंह की खानी पड़ी। गुस्साएं अंग्रेजों ने 19 नवंबर 1857 को मेवात के रुपडाका गांव में एक साथ हमला कर दिया, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे। इनमें से करीब 425 लोग रुपड़ाका गांव में शहीद हुए। मेवात के अमर शहीदों की याद में हर वर्ष शहीदी दिवस समारोह का आयोजन गांव रुपड़ाका में किया जाता है। समारोह में वीरों को श्रद्धांजली अर्पित की जाएगी। कार्यक्रम में दूर दराज से लोग आते हैं और इस अवसर पर दो दिवसीय दंगल का आयोजन किया जाता है।
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