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Palwal News: 40 प्रतिशत लड़के व 70 प्रतिशत लड़के पाए गए एनीमिया के शिकार
Sat, 16 Mar 2024 10:46 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
संवाद न्यूज एजेंसी, पलवल
Updated Sat, 16 Mar 2024 10:46 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पलवल। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा साप्ताहिक एनीमिया उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान विभिन्न गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। शिविरों में सामने आया है कि जिले में छह साल आयु वर्ग के 40 प्रतिशत लड़के व 70 प्रतिशत लड़कियां एनीमिया की बीमारी से ग्रस्त हैं। दो प्रतिशत बच्चे गंभीर श्रेणी में हैं। शनिवार को भी गांव गढ़ी पट्टी में शिविर आयोजित कर 111 बच्चों की जांच की गई। इसमें दो बच्चे एनीमिया, एक बच्चा जन्मजात हृदय रोग व एक बच्चा भेंगापन से ग्रस्त पाया गया।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रामेश्वरी ने बताया कि साप्ताहिक एनीमिया मुक्त भारत अभियान 10 से 17 मार्च तक चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान शिविर में छह माह से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों के हीमोग्लोबिन की जांच की जा रही है। जांच के दौरान 40 प्रतिशत लड़के और 70 प्रतिशत लड़कियों में खून की कमी पाई गई है। खून की कमी को पूरा करने के लिए आयरन फोलिक एसिड के सीरप व अन्य दवाई दी जा रही हैं। बीमार बच्चों को डीईआईसी सेंटर में उपचार के लिए रेफर किया गया। जिला के अंदर 45 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं भी एनीमिया की शिकार हैं। उन्होंने बताया कि खून में लाल रक्त कोशिकाओं यानि हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम होने की स्थिति को एनीमिया कहा जाता है। एनीमिया के लक्षण होंठ, जीभ, आंखों और नाखूनों में फीकापन नजर आता है। नाखूनों का पीलापन पाया जाना एनीमिया का चिह्न है। आयुष मेडिकल ऑफिसर डॉ. रूप ने बताया कि बच्चों को एनीमिया से बचाने के लिए आयरन युक्त भोजन, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल खाने व लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने की सलाह दी जा रही है। माताएं छह माह तक के बच्चों को दूध ही पिलाएं। एनीमिया से बचने के लिए आयरन युक्त भोजन करें व लोहे की कढ़ाई में बनाएं खाना बनाएं।
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पलवल। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा साप्ताहिक एनीमिया उन्मूलन अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान विभिन्न गांवों के आंगनबाड़ी केंद्रों पर जांच शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। शिविरों में सामने आया है कि जिले में छह साल आयु वर्ग के 40 प्रतिशत लड़के व 70 प्रतिशत लड़कियां एनीमिया की बीमारी से ग्रस्त हैं। दो प्रतिशत बच्चे गंभीर श्रेणी में हैं। शनिवार को भी गांव गढ़ी पट्टी में शिविर आयोजित कर 111 बच्चों की जांच की गई। इसमें दो बच्चे एनीमिया, एक बच्चा जन्मजात हृदय रोग व एक बच्चा भेंगापन से ग्रस्त पाया गया।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रामेश्वरी ने बताया कि साप्ताहिक एनीमिया मुक्त भारत अभियान 10 से 17 मार्च तक चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान शिविर में छह माह से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों के हीमोग्लोबिन की जांच की जा रही है। जांच के दौरान 40 प्रतिशत लड़के और 70 प्रतिशत लड़कियों में खून की कमी पाई गई है। खून की कमी को पूरा करने के लिए आयरन फोलिक एसिड के सीरप व अन्य दवाई दी जा रही हैं। बीमार बच्चों को डीईआईसी सेंटर में उपचार के लिए रेफर किया गया। जिला के अंदर 45 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं भी एनीमिया की शिकार हैं। उन्होंने बताया कि खून में लाल रक्त कोशिकाओं यानि हीमोग्लोबिन की मात्रा सामान्य से कम होने की स्थिति को एनीमिया कहा जाता है। एनीमिया के लक्षण होंठ, जीभ, आंखों और नाखूनों में फीकापन नजर आता है। नाखूनों का पीलापन पाया जाना एनीमिया का चिह्न है। आयुष मेडिकल ऑफिसर डॉ. रूप ने बताया कि बच्चों को एनीमिया से बचाने के लिए आयरन युक्त भोजन, हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल खाने व लोहे की कढ़ाई में खाना बनाने की सलाह दी जा रही है। माताएं छह माह तक के बच्चों को दूध ही पिलाएं। एनीमिया से बचने के लिए आयरन युक्त भोजन करें व लोहे की कढ़ाई में बनाएं खाना बनाएं।
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