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चीनी मिल की बढ़ेगी पिराई क्षमता, सरकार ने मांगा मिल प्रबंधन से रिकार्ड
Updated Thu, 15 Nov 2018 11:03 PM IST
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चीनी मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने की कवायद तेज
सरकार ने मिल प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट, क्षमता बढ़ने से हर रोज हो पाएगी 25 हजार क्विंटल गन्ना की पिराई
अभी होती है 16 हजार क्विंटल गन्ना की पिराई
- किसानों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी
अनूप पाराशर
पलवल। चीनी मिल की गन्ना पिराई क्षमता बढ़ाने की कवायद अब तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों की पिछले करीब 10 सालों की मांग को ध्यान में रखते हुए पलवल सहकारी चीनी मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिछले महीने होडल में जनसभा को संबोधित करते हुए मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने की घोषणा कर दी थी। जिसके बाद सहकारिता विभाग द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अब विभाग द्वारा मिल प्रबंधन से इस बारे में जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। मिल प्रबंधन इस कार्य में जुट गया है। यदि सब ठीक रहा तो जल्द ही चीनी मिल की पिराई क्षमता बढ़ जाएगी तथा अगले पिराई सत्र से मिल में उसी हिसाब से गन्ना पिराई के लिए लिया जाएगा।
1973 में रजिस्टर्ड हुई थी मिल
पलवल सहकारी चीनी मिल सोसायटी एक्ट में 1973 में रजिस्टर्ड की गई थी। वर्ष 1984-85 में 1250 टीसीडी की क्षमता के साथ पिराई का शुभारंभ किया गया था। उसी समय मिल में गन्न पिराई के लिए मशीनें लगाई गईं थीं। तब से लेकर आज तक उसी क्षमता के अनुरूप गन्ना पिराई का कार्य चलता आ रहा है।
31 किलोमीटर परिधि में फैला है चीनी मिल
पलवल सहकारी चीनी मिल 32 किलोमीटर की परिधि में फैला हुआ है। जिला क्षेत्र के लगभग 400 गांवों के किसान इस मिल से लाभान्वित होते हैं। फिलहाल मिल के करीब 44 हजार शेयर धारक हैं और लगभग तीन हजार किसानों के माध्यम से मिल को गन्ना उपलब्ध करवाया जा रहा है। मिल में जहां 2016 में 28.74 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर 9.04 प्रतिशत रिकवरी के साथ 2.60 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया गया था। वहीं वर्ष 2017 में 32 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई की गई थी। उस समय रिकवरी 9.54 प्रतिशत रही थी और पौने तीन लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ था। इस वर्ष भी मिल द्वारा करीब 32 लाख क्विंटल गन्ना पिराई का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि जिले में करीब 35 लाख क्विंटल गन्ना बोया गया है।
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10 से 15 करोड़ रुपये का आएगा खर्चा
मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 10 से 15 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। क्षमता बढ़ने के बाद मिल द्वारा करीब 38 लाख क्विंटल गन्ना लिया जा सकेगा और प्रतिदिन 25 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई हो सकेगी। अभी 16 हजार क्विंटल गन्ना की पिराई की जाती है। इसके अलावा मिल भी अप्रैल तक पूरा काम कर लेगी और इससे किसानों को फायदा होगा। वे मिल को अपना सारा गन्ना देने के बाद खेतों में और फसल बो पाएंगे।
मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से पत्र आ चुका है। मिल प्रबंधन द्वारा प्रक्रिया शुरू करने के लिए रिकार्ड तैयार करना शुरू कर दिया गया है। जल्द ही सारा रिकार्ड तैयार कर उसे सरकार को भेज दिया जाएगा। पिराई क्षमता बढ़ने से किसानों को भी फायदा होगा और मिल को भी। मिल पर इस समय पिछले सत्र का एक भी रुपया बकाया नहीं है। मिल द्वारा पिछले वर्ष पांच करोड़ रुपये की चीनी का अधिक उत्पादन किया गया था। इस बार भी अधिक चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है।
-जितेंद्र गर्ग, प्रबंध निदेशक, सहकारी चीनी मिल, पलवल
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सरकार ने मिल प्रबंधन से मांगी रिपोर्ट, क्षमता बढ़ने से हर रोज हो पाएगी 25 हजार क्विंटल गन्ना की पिराई
अभी होती है 16 हजार क्विंटल गन्ना की पिराई
- किसानों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद जगी
अनूप पाराशर
पलवल। चीनी मिल की गन्ना पिराई क्षमता बढ़ाने की कवायद अब तेज हो गई है। प्रदेश सरकार ने गन्ना उत्पादक किसानों की पिछले करीब 10 सालों की मांग को ध्यान में रखते हुए पलवल सहकारी चीनी मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिछले महीने होडल में जनसभा को संबोधित करते हुए मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने की घोषणा कर दी थी। जिसके बाद सहकारिता विभाग द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अब विभाग द्वारा मिल प्रबंधन से इस बारे में जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है। मिल प्रबंधन इस कार्य में जुट गया है। यदि सब ठीक रहा तो जल्द ही चीनी मिल की पिराई क्षमता बढ़ जाएगी तथा अगले पिराई सत्र से मिल में उसी हिसाब से गन्ना पिराई के लिए लिया जाएगा।
1973 में रजिस्टर्ड हुई थी मिल
पलवल सहकारी चीनी मिल सोसायटी एक्ट में 1973 में रजिस्टर्ड की गई थी। वर्ष 1984-85 में 1250 टीसीडी की क्षमता के साथ पिराई का शुभारंभ किया गया था। उसी समय मिल में गन्न पिराई के लिए मशीनें लगाई गईं थीं। तब से लेकर आज तक उसी क्षमता के अनुरूप गन्ना पिराई का कार्य चलता आ रहा है।
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31 किलोमीटर परिधि में फैला है चीनी मिल
पलवल सहकारी चीनी मिल 32 किलोमीटर की परिधि में फैला हुआ है। जिला क्षेत्र के लगभग 400 गांवों के किसान इस मिल से लाभान्वित होते हैं। फिलहाल मिल के करीब 44 हजार शेयर धारक हैं और लगभग तीन हजार किसानों के माध्यम से मिल को गन्ना उपलब्ध करवाया जा रहा है। मिल में जहां 2016 में 28.74 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई कर 9.04 प्रतिशत रिकवरी के साथ 2.60 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया गया था। वहीं वर्ष 2017 में 32 लाख क्विंटल गन्ने की पिराई की गई थी। उस समय रिकवरी 9.54 प्रतिशत रही थी और पौने तीन लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ था। इस वर्ष भी मिल द्वारा करीब 32 लाख क्विंटल गन्ना पिराई का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि जिले में करीब 35 लाख क्विंटल गन्ना बोया गया है।
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10 से 15 करोड़ रुपये का आएगा खर्चा
मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने के लिए करीब 10 से 15 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। क्षमता बढ़ने के बाद मिल द्वारा करीब 38 लाख क्विंटल गन्ना लिया जा सकेगा और प्रतिदिन 25 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई हो सकेगी। अभी 16 हजार क्विंटल गन्ना की पिराई की जाती है। इसके अलावा मिल भी अप्रैल तक पूरा काम कर लेगी और इससे किसानों को फायदा होगा। वे मिल को अपना सारा गन्ना देने के बाद खेतों में और फसल बो पाएंगे।
मिल की पिराई क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार की तरफ से पत्र आ चुका है। मिल प्रबंधन द्वारा प्रक्रिया शुरू करने के लिए रिकार्ड तैयार करना शुरू कर दिया गया है। जल्द ही सारा रिकार्ड तैयार कर उसे सरकार को भेज दिया जाएगा। पिराई क्षमता बढ़ने से किसानों को भी फायदा होगा और मिल को भी। मिल पर इस समय पिछले सत्र का एक भी रुपया बकाया नहीं है। मिल द्वारा पिछले वर्ष पांच करोड़ रुपये की चीनी का अधिक उत्पादन किया गया था। इस बार भी अधिक चीनी का उत्पादन होने की उम्मीद है।
-जितेंद्र गर्ग, प्रबंध निदेशक, सहकारी चीनी मिल, पलवल