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मंदिरों में हो रही जलाभिषेक की तैयारियां, स्थानीय कांवडियों का आना शुरू
Updated Mon, 06 Aug 2018 11:44 PM IST
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मंदिरों में हो रही जलाभिषेक की तैयारियां, स्थानीय कांवड़ियों का आना शुरू
- शिविरों में की जा रही कांवड़ियों की स्वास्थ्य जांच
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। जिले में कांवड़ियों द्वारा हरिद्वार से कांवड़ों में भरकर लाए जाने वाले गंगाजल से नौ अगस्त को मंदिरों में होने वाले भगवान शिव के जलाभिषेक की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों में जहां साफ-सफाई हो रही है, वहीं कई मंदिरों को सजाया संवारा जा रहा है। एतिहासिक जंगेश्वर मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक की विशेष तैंयारियां की जा रही हैँ। वहीं जिले से कांवड़ लेने हरिद्वार गए कांवड़ियों का आना शुरू हो गया है। ज्यादातर कांवडिए अपने गणतव्य पर पहुंच गए तथा यहां शहर व आसपास लगाए गए कांवड़ शिविरों में आकर विश्राम करने लगे हैं।
कांवड़ शिविरों में हरिद्वार से कांवड़ लेकर आए इन कांवड़ियों की पूरी सेवा की जा रही है। शिविर में स्थानीय लोग व समाजसेवी संगठनों से जुड़े लोग कांवड़ियों को विश्राम कराने के साथ अच्छा व शुद्ध भोजन करा रहे हैं। रात के समय शिविरों में देर रात तक भगवान शिव के भजन गूंजते रहते हैं तथा उन पर कांवड़िए नृत्य करते नजर आते हैं। शिविरों में कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा डाक्टरों के साथ मिलकर स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाए गए हैं। शिविरों में कांवडियों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है तथा जो कांवड़िया किसी बीमारी की बात कहता है तो उसे दवाइयां भी दी जा रही हैं। मानव चिकित्सा संघ से जुड़े डॉ. जितेंद्र सिंगला ने बताया कि शिविर में कांवड़ियों के स्वास्थ्य की जांच के अलावा उनके पांवों की भी मालिश कराई गई, ताकि उनकी थकावट दूर हो सके। उन्हें दवाइयां भी निशुल्क दी गईं। इस अवसर पर संस्था से जुुड़े कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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- शिविरों में की जा रही कांवड़ियों की स्वास्थ्य जांच
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। जिले में कांवड़ियों द्वारा हरिद्वार से कांवड़ों में भरकर लाए जाने वाले गंगाजल से नौ अगस्त को मंदिरों में होने वाले भगवान शिव के जलाभिषेक की तैयारियां शुरू हो गई हैं। मंदिरों में जहां साफ-सफाई हो रही है, वहीं कई मंदिरों को सजाया संवारा जा रहा है। एतिहासिक जंगेश्वर मंदिर में भगवान शिव के जलाभिषेक की विशेष तैंयारियां की जा रही हैँ। वहीं जिले से कांवड़ लेने हरिद्वार गए कांवड़ियों का आना शुरू हो गया है। ज्यादातर कांवडिए अपने गणतव्य पर पहुंच गए तथा यहां शहर व आसपास लगाए गए कांवड़ शिविरों में आकर विश्राम करने लगे हैं।
कांवड़ शिविरों में हरिद्वार से कांवड़ लेकर आए इन कांवड़ियों की पूरी सेवा की जा रही है। शिविर में स्थानीय लोग व समाजसेवी संगठनों से जुड़े लोग कांवड़ियों को विश्राम कराने के साथ अच्छा व शुद्ध भोजन करा रहे हैं। रात के समय शिविरों में देर रात तक भगवान शिव के भजन गूंजते रहते हैं तथा उन पर कांवड़िए नृत्य करते नजर आते हैं। शिविरों में कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा डाक्टरों के साथ मिलकर स्वास्थ्य जांच शिविर भी लगाए गए हैं। शिविरों में कांवडियों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है तथा जो कांवड़िया किसी बीमारी की बात कहता है तो उसे दवाइयां भी दी जा रही हैं। मानव चिकित्सा संघ से जुड़े डॉ. जितेंद्र सिंगला ने बताया कि शिविर में कांवड़ियों के स्वास्थ्य की जांच के अलावा उनके पांवों की भी मालिश कराई गई, ताकि उनकी थकावट दूर हो सके। उन्हें दवाइयां भी निशुल्क दी गईं। इस अवसर पर संस्था से जुुड़े कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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