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मानसिक रूप से परेशान का पहले उपचार कराया, फिर परिजनों से मिलवाया
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मानसिक रूप से परेशान व्यक्ति का पहले उपचार कराया, फिर परिजनों से मिलवाया
- दुर्गापुर निवासी प्रेमचंद को छह दिन पहले मिला था बेसुध हालत में प्रदीप
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। करीब पांच दिन पहले ठंड से ठिठुरते हुए मिले मानसिक रूप से परेशान प्रदीप को दुर्गापुर निवासी प्रेमचंद की मदद से उसके परिजनों से मिलने का मौका मिल गया। प्रेमचंद ने पहले उसका उपचार करा उसे ठीक करवाया तथा बाद में उससे उसके परिजनों के बारे में जानकारी लेकर आजमगढ़ यूपी के थाना प्रभारी की मदद से उसके परिजनों से मिलवा दिया।
दिल्ली के शहादरा स्थित मीत नगर की 25 फुटा रोड गली नंबर 1 के मकान ए 424 से बीती 27 नवंबर को लापता हुए 30 वर्षीय प्रदीप को लावारिस अवस्था में घूमते करीब पांच-छह दिन पहले ठंड में ठिठुरते हुए दुर्गापुर निवासी प्रेमचंद ने देखा था। प्रेमचंद के अनुसार उसके पैर सूजे हुए और टखने पर गहरा जख्म था। शरीर और मैले-कुचैले कपड़ों से आती दुर्गंध के कारण कोई पास बैठाने को तैयार नहीं था। बढे़ हुए बाल, मानसिक तौर पर विक्षिप्त और नाक से बार-बार टपकते खून वाले युवक को देख उन्होंने नूंह स्थित हसन खान मेवाती मेडिकल कालेज में उपचार करवाया। उपचार के बाद मानसिक स्थिति ठीक होने पर उससे उसके परिवार के बारे में जानकारी ले आजमगढ़ के थाना अहरौला के एसएचओ अयोध्या तिवारी के मोबाइल नंबर पर बात की। एसएचओ अयोध्या तिवारी ने बिडहर गांव के प्रधान भक्कल यादव को बुलाया और लापता प्रदीप के बारे में बताया। प्रधान भक्कल यादव ने प्रदीप के चचेरे भाई मंदीप को जब इस बारे में बताया तो उन्होंने दिल्ली अपने परिजनों से बात की। दिल्ली से शुक्रवार सायं प्रवीन, संदीप, श्यामलाल और रामप्रसिद्ध ने प्रदीप को देखा तो बिना कुछ बोले आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी।
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- दुर्गापुर निवासी प्रेमचंद को छह दिन पहले मिला था बेसुध हालत में प्रदीप
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। करीब पांच दिन पहले ठंड से ठिठुरते हुए मिले मानसिक रूप से परेशान प्रदीप को दुर्गापुर निवासी प्रेमचंद की मदद से उसके परिजनों से मिलने का मौका मिल गया। प्रेमचंद ने पहले उसका उपचार करा उसे ठीक करवाया तथा बाद में उससे उसके परिजनों के बारे में जानकारी लेकर आजमगढ़ यूपी के थाना प्रभारी की मदद से उसके परिजनों से मिलवा दिया।
दिल्ली के शहादरा स्थित मीत नगर की 25 फुटा रोड गली नंबर 1 के मकान ए 424 से बीती 27 नवंबर को लापता हुए 30 वर्षीय प्रदीप को लावारिस अवस्था में घूमते करीब पांच-छह दिन पहले ठंड में ठिठुरते हुए दुर्गापुर निवासी प्रेमचंद ने देखा था। प्रेमचंद के अनुसार उसके पैर सूजे हुए और टखने पर गहरा जख्म था। शरीर और मैले-कुचैले कपड़ों से आती दुर्गंध के कारण कोई पास बैठाने को तैयार नहीं था। बढे़ हुए बाल, मानसिक तौर पर विक्षिप्त और नाक से बार-बार टपकते खून वाले युवक को देख उन्होंने नूंह स्थित हसन खान मेवाती मेडिकल कालेज में उपचार करवाया। उपचार के बाद मानसिक स्थिति ठीक होने पर उससे उसके परिवार के बारे में जानकारी ले आजमगढ़ के थाना अहरौला के एसएचओ अयोध्या तिवारी के मोबाइल नंबर पर बात की। एसएचओ अयोध्या तिवारी ने बिडहर गांव के प्रधान भक्कल यादव को बुलाया और लापता प्रदीप के बारे में बताया। प्रधान भक्कल यादव ने प्रदीप के चचेरे भाई मंदीप को जब इस बारे में बताया तो उन्होंने दिल्ली अपने परिजनों से बात की। दिल्ली से शुक्रवार सायं प्रवीन, संदीप, श्यामलाल और रामप्रसिद्ध ने प्रदीप को देखा तो बिना कुछ बोले आंखों से आंसुओं की धारा बहने लगी।
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