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कांग्रेस घास या गाजर घास बन रही है गंभीर समस्या: डा. मलिक
Updated Fri, 24 Aug 2018 06:52 PM IST
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कांग्रेस घास या गाजर घास बन रही है गंभीर समस्या: डा. मलिक
अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। कृषि विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को गांव विजयगढ़ में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता धर्मवीर सौरोत ने की। संचालन सत्य प्रकाश ने किया। इस अवसर पर कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने किसानों को बताया कि कांग्रेस घास या गाजर घास किसानों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। पहले यह खाली स्थानों, नहरों, रेल पटरियों और सड़कों के किनारे दिखाई पड़ती थी, परंतु अब यह फसलों में उगकर उत्पादन पर विपरीत असर डाल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घास की पत्तियों में मौजूद रोएं मनुष्य व पशुओं के संपर्क में आने पर एलर्जी, दमा, बुखार व खुजली की दिक्कत होती है। पशुओं में दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। साथ ही मच्छर, सफेद मक्खी व मिली बग आदि कीटों को भी पलने का सुरक्षित स्थान देते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घास कम गहरी जड़ वाला पौधा है। इसलिए वर्षा वाले दिन इसे फसलों में से हाथ से उखाड़कर गड्ढों में डालकर कंपोस्ट खाद बना सकते हैं। खाली खेत में जुताई करके इसे नष्ट कर दें और चारे में इसे न मिलने दें। जाइकोग्रामा ग्राइकोलाइटा नामक कीट इसे खाकर नष्ट करता है, इसलिए इस कीट को बढ़ावा दें। डॉ.मलिक ने बताया कि रसायनिक दवा से रोकथाम के लिए ग्लाइफोसेट या राउंडअप शाकनाशी दवा एक से डेढ़ प्रतिशत या मैट्रीबुजीन 45 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें। गोष्ठी के बाद गांव में शामलात भूमि पर कांग्रेस घास को उखाड़ने का भी अभियान चलाया गया। इस मौके पर किरोड़ी, लेखराज, रमेशचंद्र, घनश्याम, कि शनलाल, परशुराम, महेंद्र सिंह, कल्लू, जीतराम, प्रीतम, जसराम, राजेंद्र, जोगेंद्र, दयाराम मुख्य रूप से मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
पलवल। कृषि विभाग के तत्वावधान में शुक्रवार को गांव विजयगढ़ में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता धर्मवीर सौरोत ने की। संचालन सत्य प्रकाश ने किया। इस अवसर पर कृषि विशेषज्ञ डॉ. महावीर सिंह मलिक ने किसानों को बताया कि कांग्रेस घास या गाजर घास किसानों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। पहले यह खाली स्थानों, नहरों, रेल पटरियों और सड़कों के किनारे दिखाई पड़ती थी, परंतु अब यह फसलों में उगकर उत्पादन पर विपरीत असर डाल रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घास की पत्तियों में मौजूद रोएं मनुष्य व पशुओं के संपर्क में आने पर एलर्जी, दमा, बुखार व खुजली की दिक्कत होती है। पशुओं में दूध देने की क्षमता प्रभावित होती है। साथ ही मच्छर, सफेद मक्खी व मिली बग आदि कीटों को भी पलने का सुरक्षित स्थान देते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घास कम गहरी जड़ वाला पौधा है। इसलिए वर्षा वाले दिन इसे फसलों में से हाथ से उखाड़कर गड्ढों में डालकर कंपोस्ट खाद बना सकते हैं। खाली खेत में जुताई करके इसे नष्ट कर दें और चारे में इसे न मिलने दें। जाइकोग्रामा ग्राइकोलाइटा नामक कीट इसे खाकर नष्ट करता है, इसलिए इस कीट को बढ़ावा दें। डॉ.मलिक ने बताया कि रसायनिक दवा से रोकथाम के लिए ग्लाइफोसेट या राउंडअप शाकनाशी दवा एक से डेढ़ प्रतिशत या मैट्रीबुजीन 45 ग्राम प्रति 15 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें। गोष्ठी के बाद गांव में शामलात भूमि पर कांग्रेस घास को उखाड़ने का भी अभियान चलाया गया। इस मौके पर किरोड़ी, लेखराज, रमेशचंद्र, घनश्याम, कि शनलाल, परशुराम, महेंद्र सिंह, कल्लू, जीतराम, प्रीतम, जसराम, राजेंद्र, जोगेंद्र, दयाराम मुख्य रूप से मौजूद रहे।