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हरियाणा में एक ऐसा स्कूल, जहां हैं केवल तीन किताब
सोनीपत/जयबीर सिंह
Updated Fri, 20 Sep 2013 12:12 AM IST
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सरकारी स्कूलों में पहला सेमेस्टर समाप्त होने को है, लेकिन सरकार द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में भेजे जाने वाली किताबें अभी तक नहीं पहुंची हैं।
इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है, वहीं अध्यापक बेबस नजर आ रहे हैं। शहर के सबसे पुराने स्कूलों में से एक राजकीय उच्च विद्यालय मसद मोहल्ला में 350 बच्चे दो-तीन पुरानी किताबों से ग्रुप बनाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
किताब के अभाव में घर जाकर तो पढ़ाई हो ही नहीं पाती। अध्यापकों के अनुसार सरकारी सिलेबस किसी बाहरी दुकान पर उपलब्ध नही होता। उन्हें पुराने छात्रों से ली गई एकाध किताब से पूरा सिलेबस बोर्ड पर लिखना पड़ता है। इसमें सभी का समय नष्ट हो रहा है। इससे यकीनन परीक्षा परिणाम पर भी असर पड़ेगा।
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वीरवार को अमर उजाला संवाददाता को राजकीय उच्च विद्यालय मसद मोहल्ला की मुख्य अध्यापिका अजीत बाला ने बताया कि पहला सेमेस्टर समाप्त होने को है, किंतु अभी तक सरकार द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत भेजी जाने वाली कोई किताब स्कूल में नही पहुंची। स्टाफ ने पुराने छात्रों से एक-दो किताब ले रखी है, जिससे ही 350 स्टूडेंट पढ़ते हैं।
मिडिल विंग की मुख्य अध्यापिका इंदु बाला ने बताया कि इस साल किताबें नहीं मिलने से बच्चे घरों में जाकर पढ़ नहीं पाते। स्कूल में सारा समय तो बच्चों को लिखवाने में ही खराब हो जाता है।
दूसरे के घरों जाकर अभ्यास करने को मजबूर
नौवीं कक्षा की छात्रा शिवानी ने बताया कि अध्यापक उन्हें बोर्ड पर लिखकर पूरा सिलेबस करा रहे हैं, किंतु किताबें न होने के कारण उन्हें अभ्यास करने में दिक्कतें आती हैं। आठवीं कक्षा के छात्र रोजुदीन का कहना है कि कुछ छात्रों के पास पुरानी किताबें हैं, स्कूल के लगभग सभी छात्र गृहकार्य करने के लिए उनके पास जाते हैं, जिससे काफी समय बर्बाद होता है। लड़कियों को दूसरे के घर जाने में ज्यादा दिक्कत आती है। नौवीं कक्षा के छात्र विकास और मोनू ने बताया कि स्कूल में कमरों के अभाव के कारण छठी से नौवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को बरामदे में ही पढ़ाई करनी पड़ती है। ऊपर से किताबें नहीं मिलती।
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इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है, वहीं अध्यापक बेबस नजर आ रहे हैं। शहर के सबसे पुराने स्कूलों में से एक राजकीय उच्च विद्यालय मसद मोहल्ला में 350 बच्चे दो-तीन पुरानी किताबों से ग्रुप बनाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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किताब के अभाव में घर जाकर तो पढ़ाई हो ही नहीं पाती। अध्यापकों के अनुसार सरकारी सिलेबस किसी बाहरी दुकान पर उपलब्ध नही होता। उन्हें पुराने छात्रों से ली गई एकाध किताब से पूरा सिलेबस बोर्ड पर लिखना पड़ता है। इसमें सभी का समय नष्ट हो रहा है। इससे यकीनन परीक्षा परिणाम पर भी असर पड़ेगा।
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वीरवार को अमर उजाला संवाददाता को राजकीय उच्च विद्यालय मसद मोहल्ला की मुख्य अध्यापिका अजीत बाला ने बताया कि पहला सेमेस्टर समाप्त होने को है, किंतु अभी तक सरकार द्वारा सर्व शिक्षा अभियान के तहत भेजी जाने वाली कोई किताब स्कूल में नही पहुंची। स्टाफ ने पुराने छात्रों से एक-दो किताब ले रखी है, जिससे ही 350 स्टूडेंट पढ़ते हैं।
मिडिल विंग की मुख्य अध्यापिका इंदु बाला ने बताया कि इस साल किताबें नहीं मिलने से बच्चे घरों में जाकर पढ़ नहीं पाते। स्कूल में सारा समय तो बच्चों को लिखवाने में ही खराब हो जाता है।
दूसरे के घरों जाकर अभ्यास करने को मजबूर
नौवीं कक्षा की छात्रा शिवानी ने बताया कि अध्यापक उन्हें बोर्ड पर लिखकर पूरा सिलेबस करा रहे हैं, किंतु किताबें न होने के कारण उन्हें अभ्यास करने में दिक्कतें आती हैं। आठवीं कक्षा के छात्र रोजुदीन का कहना है कि कुछ छात्रों के पास पुरानी किताबें हैं, स्कूल के लगभग सभी छात्र गृहकार्य करने के लिए उनके पास जाते हैं, जिससे काफी समय बर्बाद होता है। लड़कियों को दूसरे के घर जाने में ज्यादा दिक्कत आती है। नौवीं कक्षा के छात्र विकास और मोनू ने बताया कि स्कूल में कमरों के अभाव के कारण छठी से नौवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को बरामदे में ही पढ़ाई करनी पड़ती है। ऊपर से किताबें नहीं मिलती।