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Mahendragarh-Narnaul News: मोबाइल से मैदान तक लौटे युवा, खेलों से बनेगा खिलाडि़यों का मजबूत भविष्य
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फोटो 02 दिव्या सैनी
नारनौल। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती पर 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है। यह दिन युवाओं को खेलों से जुड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
आज मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण युवा शारीरिक गतिविधियों से दूर हो रहे हैं। इसका असर उनके स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर भी पड़ रहा है। ऐसे में खेलों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बेहतर जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है।
शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता प्रदीप यादव ने बताया कि खेल युवाओं में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व, धैर्य और सहयोग की भावना विकसित करते हैं। खेल का मैदान बच्चों और युवाओं को आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देता है।
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उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी आज दुनिया के बड़े मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। खेल विभाग भी प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका दे रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि ‘खेलेगा भारत, खिलेगा भारत’ के संदेश को अपनाएं और अपने जीवन में कम से कम एक खेल को जरूर शामिल करें।
बॉक्स:
विश्व योगासन प्रतियोगिता समेत छह स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं। हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक खेल जरूर अपनाना चाहिए। खेल को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से शरीर स्वस्थ रहता है और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
-अर्चना, खिलाड़ी
बॉक्स:
मैं राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिताओं में कई पदक जीत चुका हूं। मेरा मानना है कि खेल खेलने से एकाग्रता और अनुशासन बढ़ता है। खेल युवाओं को बुरी आदतों और गलत आचरण से दूर रखते हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है।-दिव्या सैनी, आर्चर
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आज मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के कारण युवा शारीरिक गतिविधियों से दूर हो रहे हैं। इसका असर उनके स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर भी पड़ रहा है। ऐसे में खेलों को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बेहतर जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है।
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शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता प्रदीप यादव ने बताया कि खेल युवाओं में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व, धैर्य और सहयोग की भावना विकसित करते हैं। खेल का मैदान बच्चों और युवाओं को आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देता है।
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उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाड़ी आज दुनिया के बड़े मंचों पर देश का नाम रोशन कर रहे हैं। खेल विभाग भी प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का मौका दे रहा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि ‘खेलेगा भारत, खिलेगा भारत’ के संदेश को अपनाएं और अपने जीवन में कम से कम एक खेल को जरूर शामिल करें।
बॉक्स:
विश्व योगासन प्रतियोगिता समेत छह स्वर्ण पदक जीत चुकी हूं। हर व्यक्ति को जीवन में कम से कम एक खेल जरूर अपनाना चाहिए। खेल को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से शरीर स्वस्थ रहता है और अनुशासन की भावना विकसित होती है।
-अर्चना, खिलाड़ी
बॉक्स:
मैं राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाजी प्रतियोगिताओं में कई पदक जीत चुका हूं। मेरा मानना है कि खेल खेलने से एकाग्रता और अनुशासन बढ़ता है। खेल युवाओं को बुरी आदतों और गलत आचरण से दूर रखते हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है, आत्मविश्वास बढ़ता है।-दिव्या सैनी, आर्चर

फोटो 02 दिव्या सैनी