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Mahendragarh-Narnaul News: श्रावणी उपाकर्म पर आर्य समाज मंदिर में हुआ यज्ञ
Sat, 09 Aug 2025 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 09 Aug 2025 11:52 PM IST
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फोटो संख्या:64- आर्य समाज महेंद्रगढ़ में हवन करते समाज के लोग--स्रोत- आयोजक
- फोटो : घटना पर विलाप करते परिजन।
महेंद्रगढ़। श्रावणी उपाकर्म, रक्षाबंधन और संस्कृत दिवस पर आर्य समाज मंदिर में आर्य समाज के प्रधान पंडित भूपेंद्र सिंह आर्य की अध्यक्षता में वैदिक यज्ञ का आयोजन किया गया।
डॉ. संतोष कुमारी आर्या ब्रह्मा के आसन्न पर और महेंद्र दिवान मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहे। आर्य समाज के मंत्री डॉ. विक्रांत डागर ने बताया कि आज का दिन महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह वेदों का अध्ययन फिर से शुरू करने का प्रतीक है। श्रावणी उपाकर्म के मौके पर ऋषि-मुनियों को जिन्होंने हमें पंच महायज्ञ को अपनी दिनचर्या में नित्य प्रति अंगीकार करने कराने के लिए निर्देशित किया है को स्मरण किया गया। श्रावण पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
भूपेंद्र सिंह आर्य ने बताया की यज्ञोपवीत संस्कार से व्यक्ति का दूसरा जन्म हुआ माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आत्म संयमी है, वही संस्कार से दूसरा जन्म पाता है और द्विज कहलाता है। यह त्योहार ज्ञानार्जन और आध्यात्म का प्रतीक है। इसे परिवार और आर्य समाज के साथ मनाया गया।
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प्रवक्ता अंजू आर्या परिवार सहित विशेष रूप से उपस्थित रहीं। भजनों माध्यम से श्रावणी उपाक्रम के महत्व को बताया गया। इस अवसर पर पुष्पा शास्त्री, अंजू आर्या, साक्षी आर्या, बृहस्पति शास्त्री, वीर सिंह मेघनवास, मानव आर्य, सुभाष आर्य, दलीप सिंह आदि ने आहुति दी।
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डॉ. संतोष कुमारी आर्या ब्रह्मा के आसन्न पर और महेंद्र दिवान मुख्य यजमान के रूप में उपस्थित रहे। आर्य समाज के मंत्री डॉ. विक्रांत डागर ने बताया कि आज का दिन महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह वेदों का अध्ययन फिर से शुरू करने का प्रतीक है। श्रावणी उपाकर्म के मौके पर ऋषि-मुनियों को जिन्होंने हमें पंच महायज्ञ को अपनी दिनचर्या में नित्य प्रति अंगीकार करने कराने के लिए निर्देशित किया है को स्मरण किया गया। श्रावण पूर्णिमा को संस्कृत दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
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भूपेंद्र सिंह आर्य ने बताया की यज्ञोपवीत संस्कार से व्यक्ति का दूसरा जन्म हुआ माना जाता है। इसका अर्थ यह है कि जो व्यक्ति आत्म संयमी है, वही संस्कार से दूसरा जन्म पाता है और द्विज कहलाता है। यह त्योहार ज्ञानार्जन और आध्यात्म का प्रतीक है। इसे परिवार और आर्य समाज के साथ मनाया गया।
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प्रवक्ता अंजू आर्या परिवार सहित विशेष रूप से उपस्थित रहीं। भजनों माध्यम से श्रावणी उपाक्रम के महत्व को बताया गया। इस अवसर पर पुष्पा शास्त्री, अंजू आर्या, साक्षी आर्या, बृहस्पति शास्त्री, वीर सिंह मेघनवास, मानव आर्य, सुभाष आर्य, दलीप सिंह आदि ने आहुति दी।