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Mahendragarh-Narnaul News: 19 साल पुराने मारपीट मामले में आरोपियों को राहत, बरी करने का फैसला बरकरार
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नारनौल। कनीना थाना क्षेत्र के वर्ष 2007 के मारपीट मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हर्षाली चौधरी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आरोपियों को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपील खारिज कर दी और पुराना निर्णय बरकरार रखा।
मामले के अनुसार, 2 अक्तूबर 2007 को शिकायतकर्ता गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि जमीन विवाद और पुरानी रंजिश के चलते राकेश, राजेश, हनुमान, मनोज और करमबीर सहित अन्य लोगों ने लाठी, जेली और तलवार से उस पर हमला किया। इसमें उसे गंभीर चोटें आई थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की थी।
महेंद्रगढ़ की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने 14 जनवरी 2014 को साक्ष्यों की कमी और संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ शिकायतकर्ता ने अपील दायर की।
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अपीलीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और मेडिकल साक्ष्यों की समीक्षा की। अदालत ने पाया कि घटना में क्रॉस-केस भी दर्ज हुआ था और दूसरे पक्ष के राजेश को भी गंभीर चोटें आई थीं, जिनका अभियोजन पक्ष संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जांच की कमियों और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के आधार पर अदालत ने अपील खारिज कर दी।
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मामले के अनुसार, 2 अक्तूबर 2007 को शिकायतकर्ता गजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि जमीन विवाद और पुरानी रंजिश के चलते राकेश, राजेश, हनुमान, मनोज और करमबीर सहित अन्य लोगों ने लाठी, जेली और तलवार से उस पर हमला किया। इसमें उसे गंभीर चोटें आई थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच की थी।
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महेंद्रगढ़ की न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने 14 जनवरी 2014 को साक्ष्यों की कमी और संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके खिलाफ शिकायतकर्ता ने अपील दायर की।
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अपीलीय अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और मेडिकल साक्ष्यों की समीक्षा की। अदालत ने पाया कि घटना में क्रॉस-केस भी दर्ज हुआ था और दूसरे पक्ष के राजेश को भी गंभीर चोटें आई थीं, जिनका अभियोजन पक्ष संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जांच की कमियों और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के आधार पर अदालत ने अपील खारिज कर दी।