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Mahendragarh-Narnaul News: नवरात्र पर पूजा, पर धरातल पर महिला सम्मान गंभीर विषय

Tue, 20 Aug 2024 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Tue, 20 Aug 2024 12:21 AM IST
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Worship on Navratri, but respect for women on the ground is a serious matter.
फोटो नंबर-14डा. पूनम राव।
नारनौल। नवरात्रों में पूजा और बराबरी की बात, मगर धरातल पर महिला सम्मान आज भी एक गंभीर विषय है। कोलकाता में एक ट्रेनी डॉक्टर के साथ बर्बरता ने पूरे देश को झकझोर कर दिया है। अब फिर से यह मुद्दा गरमा गया है कि महिला के सम्मान और बराबरी के हक के लिए विशेष कानून बनाए जाए। कोलकाता में हुई इस बर्बरता पूर्ण घटना के विरोध में पूरे देश के लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। जिले में भी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लोगों द्वारा प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
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जो व्यक्ति इस तरह की घटनाओं के वक्त महिलाओं के छोटे कपड़े और गैर वक्त घर से बाहर होने का तर्क देते हैं। वह इस पर क्या कहेंगे जब वह बेटी अपने कार्यस्थल पर अपनी ड्यूटी पर थी और धरती की सबसे सम्मानजनक पोशाक में थी।
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डॉ. पूनम, प्रोफेसर, राजकीय महाविद्यालय नारनौल
देश में इस प्रकार की घटनाएं निश्चित रूप से देश की आधी आबादी को डराती हैं। आज के सभ्य समाज में महिला सुरक्षा बड़ा मुद्दा बना हुआ हैं । सरकारों के सख्त कानून बनाने भर से काम नहीं चलेगा संबंधित अपराधियों को तुरंत सजा मिलनी चाहिए। यह जरूरी हैं की सरकार कामकाजी एवं गैर कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षात्मक माहौल सुनिश्चित करें, ताकि महिलाएं बिना डरे अपने जीवन में आगे बढ़ सकें और अपने सपनों को साकार कर सकें।
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डॉ. ममता सिद्धार्थ, प्रोफेसर, राजकीय महिला महाविद्यालय नारनौल
मैं एक महिला हूं और एक बेटी की मां भी हूं। कोलकाता जैसी घटनाएं दिल को झकझोर देने वाली हैं और विचलित करने वाली है। हमें आजाद हुए 78 साल हो चुके हैं, लेकिन हम संकीर्ण मानसिकता से कब आजाद होंगे। मैं समझती हूं कि हमें हमारे मूल्यों के ऊपर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है, ताकी समाज में नारी के सम्मान और समानता की बात महज आदर्शवादी विचारधारा बनकर न रहे बल्कि उस पर अमल भी किया जाए।

प्रोफेसर सुमन यादव, प्रोफेसर, राजकीय महिला महाविद्यालय नारनौल
बच्चियों से लेकर बुजुर्गों तक और अनपढ़ से लेकर डॉक्टर तक ऐसी क्या विडंबना है कि देश की महिलाएं सुरक्षित नहीं हो पाई है। इसका जवाब शायद किसी के पास नहीं है। कानून अपना काम कर रहा है, लेकिन कहीं ना कहीं दोषी निर्दोष बनकर बच रहें हैं। इसी वजह से यह घटनाएं बार-बार हो रही हैं। जब-जब इस तरह की घटनाएं होती हैं तो महिला सुरक्षा का मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक जोर-शोर से उठाया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद इस मुद्दे पर को फिर से नजरअंदाज कर दिया जाता है।
डॉ. ममता शर्मा, प्रोफेसर, राजकीय महिला महाविद्यालय नारनौल
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