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संसार में गुरू से बढ़कर कोई दूसरा नहीं : वासुदेवानंद
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 17 Nov 2016 11:42 PM IST
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स्वामी जगन्नाथ चेरीटेबल ट्रस्ट अटेली के सौजन्य से नई अनाज मंडी में आयोजित गुरुजन स्मृति समारोह में वीरवार को संत सम्मेलन हुआ। स्वामी हसंादेवाचार्य महाराज के सानिध्य में शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद जी महाराज, शंकराचार्य स्वामी दीत्यानंदतिर्थ जी महाराज, स्वामी नरेन्द्रानंद महाराज, ज्ञानदेव सिंह, अविचलदास, अनुभूतानंद, महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव, महामंडलेश्वर स्वामी जनार्दन सहित अनेक प्रसिद्ध संत सम्मेलन में पहुंचे।
शंकराचार्य वासुदेवानंद महाराज ने कहा कि गुरू से बढ़कर संसार लोक ही नहीं अन्य लोक में कोई नहीं है। गुरू तो भगवान से भी महान है, क्योंकि भगवान मानव को संसार में लाने का काम करता है जबकि गुरू संसार रूपी भव सागर से पार कराता है। शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद महाराज ने कहा कि संतों से ही भारत को विश्व गुरू की संज्ञा मिली थी। संत में इतनी शक्ति है कि अच्छा सा अच्छा सिंहासन हिला दे। जिस प्रकार तार जोड़कर लाइट जलाई जाती है उसी प्रकार गुरू अपने शिष्य में ज्ञान के तार लगाकर उसमें प्रकार पैदा कर देते हैं। महाराज ज्ञानदेव जी महाराज ने कहा कि संत का काम देश को प्यार पथ पर आगे बढ़ाने में सहयोग करना है। कार्यक्रम के आयोजक स्वामी हंसादेवाचार्य महाराज ने कहा कि अटेली में इस प्रकार का संत सम्मेलन पहली बार हुआ है। सम्मेलन में देश के विख्यात संत पहुंचे है। उन्होंने बताया कि मानव अपनी सबसे अधिक श्रद्धा स्वाभाविक रूप से माता के चरणों में ही अर्पित करता है क्योंकि सबसे पहले माता की गोद में ही उसे संसार के दर्शन होते है। इसलिए माता ही आदि गुरू के रूप में प्रतिष्ठित है। उनकी करुणा और कृपा लौकिक व परलौकिक कल्याण का आधार है। महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने कहा कि आम तौर पर मरने के बाद यह बात कही जाती है कि वह स्वर्ग में पहुंच गया। मरने के बाद स्वर्गीय शब्द लगाया जाता है, लेकिन स्वर्ग में वही जाता है जो जिंदा रहते अपने परिवार व समाज में स्वर्ग जैसा व्यवहार किया हो।
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शंकराचार्य वासुदेवानंद महाराज ने कहा कि गुरू से बढ़कर संसार लोक ही नहीं अन्य लोक में कोई नहीं है। गुरू तो भगवान से भी महान है, क्योंकि भगवान मानव को संसार में लाने का काम करता है जबकि गुरू संसार रूपी भव सागर से पार कराता है। शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानंद महाराज ने कहा कि संतों से ही भारत को विश्व गुरू की संज्ञा मिली थी। संत में इतनी शक्ति है कि अच्छा सा अच्छा सिंहासन हिला दे। जिस प्रकार तार जोड़कर लाइट जलाई जाती है उसी प्रकार गुरू अपने शिष्य में ज्ञान के तार लगाकर उसमें प्रकार पैदा कर देते हैं। महाराज ज्ञानदेव जी महाराज ने कहा कि संत का काम देश को प्यार पथ पर आगे बढ़ाने में सहयोग करना है। कार्यक्रम के आयोजक स्वामी हंसादेवाचार्य महाराज ने कहा कि अटेली में इस प्रकार का संत सम्मेलन पहली बार हुआ है। सम्मेलन में देश के विख्यात संत पहुंचे है। उन्होंने बताया कि मानव अपनी सबसे अधिक श्रद्धा स्वाभाविक रूप से माता के चरणों में ही अर्पित करता है क्योंकि सबसे पहले माता की गोद में ही उसे संसार के दर्शन होते है। इसलिए माता ही आदि गुरू के रूप में प्रतिष्ठित है। उनकी करुणा और कृपा लौकिक व परलौकिक कल्याण का आधार है। महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव ने कहा कि आम तौर पर मरने के बाद यह बात कही जाती है कि वह स्वर्ग में पहुंच गया। मरने के बाद स्वर्गीय शब्द लगाया जाता है, लेकिन स्वर्ग में वही जाता है जो जिंदा रहते अपने परिवार व समाज में स्वर्ग जैसा व्यवहार किया हो।
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