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Mahendragarh-Narnaul News: आर्य समाज मंदिर में साप्ताहिक हवन व सत्संग किया गया
Sun, 11 May 2025 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sun, 11 May 2025 11:51 PM IST
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फोटो संख्या:53- आर्य समाज मंदिर में हवन करते समाज के लोग--स्रोत- आयोजक
महेंद्रगढ़। आर्य समाज मंदिर में साप्ताहिक हवन और सत्संग किया गया। हवन से पहले सरहद पर सर्वस्व न्योछावर करने वाले भारत माता के वीर सपूतों की आत्मिक शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। अमर शहीदों को शत-शत नमन किया गया।
पंडित भूपेंद्र सिंह आर्य की अध्यक्षता में हवन किया गया। हवन में यजमान डॉ. अशोक कुमार, शिव भावना आर्या रहे। प्राचार्य लाल सिंह आर्य ने कहा की हवन को वेदों में एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य अनुष्ठान माना गया है। यज्ञ सर्वोत्तम कर्म है, सर्वोत्तम कर्म करके ही हम जीवन में सर्वोत्तम बन सकते हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि एक सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया भी है जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए कल्याणकारी है।
डॉ. विक्रांत डागर ने कहा कि हवन में सभी लोग मिलकर भाग लेते हैं, जिससे समाज में एकरूपता और भाईचारा बढ़ता है। हवन में दिए जाने वाले दान और आहुतियां समाज में धन के प्रवाह को बढ़ाते हैं। दिया हुआ दान और किया हुआ कर्म कभी निष्फल नहीं होते। इस अवसर पर अधिवक्ता मानव आर्य, रमेश कुमार, महेंद्र दीवान, सतीश कुमार, किरोड़ी लाल, दीपक आर्य मौजूद रहे।
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पंडित भूपेंद्र सिंह आर्य की अध्यक्षता में हवन किया गया। हवन में यजमान डॉ. अशोक कुमार, शिव भावना आर्या रहे। प्राचार्य लाल सिंह आर्य ने कहा की हवन को वेदों में एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य अनुष्ठान माना गया है। यज्ञ सर्वोत्तम कर्म है, सर्वोत्तम कर्म करके ही हम जीवन में सर्वोत्तम बन सकते हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं है, बल्कि एक सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक प्रक्रिया भी है जो व्यक्ति और समाज दोनों के लिए कल्याणकारी है।
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डॉ. विक्रांत डागर ने कहा कि हवन में सभी लोग मिलकर भाग लेते हैं, जिससे समाज में एकरूपता और भाईचारा बढ़ता है। हवन में दिए जाने वाले दान और आहुतियां समाज में धन के प्रवाह को बढ़ाते हैं। दिया हुआ दान और किया हुआ कर्म कभी निष्फल नहीं होते। इस अवसर पर अधिवक्ता मानव आर्य, रमेश कुमार, महेंद्र दीवान, सतीश कुमार, किरोड़ी लाल, दीपक आर्य मौजूद रहे।
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