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Mahendragarh-Narnaul News: निचली अदालत के फैसले को सही मानते हुए अपील की खारिज

Sun, 15 Mar 2026 02:47 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 15 Mar 2026 02:47 AM IST
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Upholding the lower court's verdict, the appeal was dismissed.
नारनौल। कनीना के सिविल जज के फैसले को सही मानते हुए एडीजे नितिन राज ने विवादित जमीन के मामले में जसवंत की अपील को खारिज कर दिया है।
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अपीलकर्ता जसवंत ने गांव बेवल में स्थित 168 कनाल 10 मरला जमीन के मालिकाना हक को लेकर मामला दर्ज कराया था। जसवंत ने दावा किया था कि इस जमीन के उत्तराधिकारी वह और उसके परिवार के अन्य सदस्य शिम्भू दयाल हैं।
उन्होंने तर्क दिया कि शिम्भू दयाल ने 13 मार्च 1970 को प्रतिवादी जीवा राम आदि के पक्ष में जो गिफ्ट डीड किया था, वह फर्जी और धोखाधड़ी से बनाया गया था क्योंकि शिम्भू दयाल अनपढ़ थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि जमीन पैतृक थी।
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दूसरी ओर प्रतिवादी जीवाराम ने कहा कि जसवंत की मां शांति देवी की शादी कभी शिम्भू दयाल से हुई ही नहीं थी। वह निरंजन नाम के व्यक्ति की विधवा थीं। उन्होंने तर्क दिया कि शिम्भू दयाल अविवाहित थे, जिन्होंने अपनी इच्छा से अपने भतीजों को जमीन दान की थी।
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दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने पाया कि अपीलकर्ता यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि संपत्ति पैतृक थी। राजस्व रिकॉर्ड के माध्यम से यह साबित करना होता है कि संपत्ति तीन पीढ़ियों से विरासत में मिली है। अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि शांति देवी की शादी शिम्भू दयाल से हुई थी। खुद शांति देवी गवाही देने के लिए कोर्ट नहीं आई।
शिम्भू दयाल ने गिफ्ट डीड किया था। वह इस दस्तावेज के बनने के बाद 33 साल तक जीवित रहे लेकिन उन्होंने अपने जीवनकाल में कभी भी इस गिफ्ट डीड को चुनौती नहीं दी।

यह मामला गिफ्ट डीड के 43 साल बाद दायर किया गया था। कानून के अनुसार, धोखाधड़ी के आधार पर किसी दस्तावेज को चुनौती देने की समय सीमा 3 वर्ष होती है। इतने लंबे समय बाद बिना किसी ठोस कारण के केस दायर करना स्वीकार्य नहीं था। एडीजे कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए जसवंत की अपील को खारिज कर दिया।
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