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उन्हाणी स्कूल बस हादसा : चार माह बीत जाने के बावजूद नहीं मिला न्याय
Sat, 10 Aug 2024 11:19 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 10 Aug 2024 11:19 PM IST
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फोटो संख्या:65- कनीना में पत्रकारों से बातचीत करते मृतक बच्चों क परिजन--संवाद
कनीना। क्षेत्र के गांव उन्हाणी के पास हुए स्कूल बस हादसे में छह बच्चों की जान गंवाने वाले पीड़ित परिजनों ने शनिवार को कनीना मंडी स्थित शिवलाल धर्मशाला में पत्रकार वार्ता कर सरकार से न्याय दिलाने की मांग की। पीड़ित परिजनों का कहना है कि हादसे को चार माह होने के बावजूद न्याय नहीं मिला है। परिजनों का कहना है कि प्रदेश सरकार से आर्थिक सहायता व बच्चों की याद में स्मारक बनवाने की मांग को लेकर स्थानीय विधायक सीताराम यादव, सांसद चौधरी धर्मबीर, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, सांसद राव इंदरजीत सिंह तक से न्याय की गुहार लगा चुके हैं।
हादसे में मृत युवराज के पिता संजय, सत्यम के पिता राकेश, अक्षु व यक्षु के पिता संदीप, रिक्की के पिता रविंद्र और वंश के पिता दुष्यंत सहित अन्य लोगों ने बताया कि दोषियों को जमानत दे दी गई। वहीं पिछले चार माह से इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग उठाई जा रही है। आर्थिक सहायता के नाम पर 3-3 लाख रुपये मिले हैं, लेकिन न्याय नहीं मिलने से परेशान हैं और इस राशि को लौटाना चाहते हैं। भाजपा सरकार ने आश्वासन दिया था कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटने के बाद उनकी छह सूत्री मांगें पूरी कर दी जाएंगी। मांगें पूरी नहीं करके सरकार ने भी वादाखिलाफी की है।
संदीप यादव ने कहा कि मृतक बच्चों के परिजनों को सरकार नौकरी दे, क्योंकि उनके बुढ़ापे का सहारा ही छिन गया है। छह सूत्रीय मांगों में हादसे की उच्चस्तरीय जांच, मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ मुआवजा व घायलों को 50-50 लाख आर्थिक सहायता, गंभीर रूप से घायलों को निशुल्क इलाज, स्कूल की मान्यता रद्द करने, मेडिकल अनफिट बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र और इन बच्चाें को भविष्य में नौकरी की गारंटी की मांग की थी।
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हादसे में मृत युवराज के पिता संजय, सत्यम के पिता राकेश, अक्षु व यक्षु के पिता संदीप, रिक्की के पिता रविंद्र और वंश के पिता दुष्यंत सहित अन्य लोगों ने बताया कि दोषियों को जमानत दे दी गई। वहीं पिछले चार माह से इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग उठाई जा रही है। आर्थिक सहायता के नाम पर 3-3 लाख रुपये मिले हैं, लेकिन न्याय नहीं मिलने से परेशान हैं और इस राशि को लौटाना चाहते हैं। भाजपा सरकार ने आश्वासन दिया था कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटने के बाद उनकी छह सूत्री मांगें पूरी कर दी जाएंगी। मांगें पूरी नहीं करके सरकार ने भी वादाखिलाफी की है।
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संदीप यादव ने कहा कि मृतक बच्चों के परिजनों को सरकार नौकरी दे, क्योंकि उनके बुढ़ापे का सहारा ही छिन गया है। छह सूत्रीय मांगों में हादसे की उच्चस्तरीय जांच, मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ मुआवजा व घायलों को 50-50 लाख आर्थिक सहायता, गंभीर रूप से घायलों को निशुल्क इलाज, स्कूल की मान्यता रद्द करने, मेडिकल अनफिट बच्चों को दिव्यांगता प्रमाण पत्र और इन बच्चाें को भविष्य में नौकरी की गारंटी की मांग की थी।
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