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Mahendragarh-Narnaul News: एक हफ्ते में बंदरों के दो हमले, लोग लाठी लेकर निकलने को मजबूर
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फोटो नंबर- 12कर्मचारी कॉलोनी में स्थित पार्क की दीवार पर बैठे बंदर। संवाद
नारनौल। कर्मचारी कॉलोनी और आसपास के इलाकों में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। शाम होते ही लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं जबकि बाहर निकलने वाले लोग हाथ में लाठी लेकर सुरक्षा के साथ निकल रहे हैं। एक सप्ताह में बंदरों के हमले की दो घटनाओं के बाद इलाके में डर का माहौल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम के समय 25 से 30 बंदरों का झुंड कॉलोनी में घूमने लगता है। ये बंदर एक घर से दूसरे घर, पार्कों और सड़कों तक पहुंचकर लोगों पर हमला कर देते हैं। सुबह सैर करने वाले, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। पार्कों में खेलने वाले बच्चे भी डर के कारण जल्दी घर लौट आते हैं।
निवासियों ने बताया कि कई बार नगर परिषद से शिकायत की गई लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
2026 के पहले छह महीनों में 69 लोग बंदरों के काटने के बाद अस्पताल पहुंचकर एंटी रेबीज टीका लगवा चुके हैं। औसतन हर महीने 10 से ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं। कॉलोनी के अलावा बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और पार्कों में भी बंदरों की दहशत बनी हुई है।
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केस-1
कर्मचारी कॉलोनी में 28 जून को लोग शाम के समय अपने घरों के बाहर बैठे थे। तभी करीब 20 से 25 बंदरों का झुंड कॉलोनी में आते हैं और लोगों को काटने के लिए दौड़ते हैं। अफरा-तफरी में लोग घरों के अंदर घुस जाते हैं। इस बीच दो बंदर एक बुजुर्ग को काट लेते हैं।
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केस-2
कर्मचारी कॉलोनी के पार्क में शाम के समय एक महिला अपने बच्चे को झूला झूलाने के लिए लेकर गई थी। तभी दो-तीन बंदर झूले के पास आए और महिला को काट लिया।
बॉक्स
घर के दरवाजे हमेशा बंद रखने पड़ते हैं। रसोई व फ्रीज से खाने की चीजें निकालने के चक्कर में घर अस्त-व्यस्त कर देते हैं और काटने का खतरा भी बना रहता है।
-वासुदेव शर्मा, कर्मचारी कॉलोनी
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बंदरों को पकड़ने के लिए फोटो व पत्र के माध्यम से कई बार नगर परिषद को अवगत करवा चुके हैं लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं किया गया।
-रतन यादव, प्रधान, कर्मचारी कॉलोनी
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वर्जन :
बंदर पकड़ने के लिए जिस एजेंसी को टेंडर जारी किया गया था उसके द्वारा कार्य नहीं किया जा रहा। एजेंसी ने अब तक जितना कार्य किया है उसकी जांच की जा रही है और भुगतान नहीं किया गया है। बंदरों को पकड़ने के लिए आगामी योजना बनाई जा रही है। -कमलेश सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल
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स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम के समय 25 से 30 बंदरों का झुंड कॉलोनी में घूमने लगता है। ये बंदर एक घर से दूसरे घर, पार्कों और सड़कों तक पहुंचकर लोगों पर हमला कर देते हैं। सुबह सैर करने वाले, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा परेशान हैं। पार्कों में खेलने वाले बच्चे भी डर के कारण जल्दी घर लौट आते हैं।
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निवासियों ने बताया कि कई बार नगर परिषद से शिकायत की गई लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।
2026 के पहले छह महीनों में 69 लोग बंदरों के काटने के बाद अस्पताल पहुंचकर एंटी रेबीज टीका लगवा चुके हैं। औसतन हर महीने 10 से ज्यादा लोग प्रभावित हो रहे हैं। कॉलोनी के अलावा बाजार, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और पार्कों में भी बंदरों की दहशत बनी हुई है।
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केस-1
कर्मचारी कॉलोनी में 28 जून को लोग शाम के समय अपने घरों के बाहर बैठे थे। तभी करीब 20 से 25 बंदरों का झुंड कॉलोनी में आते हैं और लोगों को काटने के लिए दौड़ते हैं। अफरा-तफरी में लोग घरों के अंदर घुस जाते हैं। इस बीच दो बंदर एक बुजुर्ग को काट लेते हैं।
केस-2
कर्मचारी कॉलोनी के पार्क में शाम के समय एक महिला अपने बच्चे को झूला झूलाने के लिए लेकर गई थी। तभी दो-तीन बंदर झूले के पास आए और महिला को काट लिया।
बॉक्स
घर के दरवाजे हमेशा बंद रखने पड़ते हैं। रसोई व फ्रीज से खाने की चीजें निकालने के चक्कर में घर अस्त-व्यस्त कर देते हैं और काटने का खतरा भी बना रहता है।
-वासुदेव शर्मा, कर्मचारी कॉलोनी
बंदरों को पकड़ने के लिए फोटो व पत्र के माध्यम से कई बार नगर परिषद को अवगत करवा चुके हैं लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं किया गया।
-रतन यादव, प्रधान, कर्मचारी कॉलोनी
वर्जन :
बंदर पकड़ने के लिए जिस एजेंसी को टेंडर जारी किया गया था उसके द्वारा कार्य नहीं किया जा रहा। एजेंसी ने अब तक जितना कार्य किया है उसकी जांच की जा रही है और भुगतान नहीं किया गया है। बंदरों को पकड़ने के लिए आगामी योजना बनाई जा रही है। -कमलेश सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल