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Mahendragarh-Narnaul News: कपास में गुलाबी सुंडी की रोकथाम के लिए अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण
Fri, 29 Aug 2025 02:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 29 Aug 2025 02:26 AM IST
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फोटो संख्या:57- कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ में किसानों को कपास की गुलाबी सुंडी की रोकथाम
- फोटो : kulgam news
महेंद्रगढ़। कृषि विज्ञान केंद्र महेंद्रगढ़ की ओर से वीरवार को परिसर में कपास फसल में गुलाबी सुंडी की रोकथाम एवं समन्वित कीट प्रबंधन पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इसमें अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण में वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ. जयलाल यादव ने कपास फसल में गुलाबी सुंडी की रोकथाम एवं समन्वित कीट प्रबंधन पर जानकारी दी।
उन्होंने वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों की सलाह पर ही बताए गए कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए प्रेरित किया। कहा कि कपास की फसल में गुलाबी सुंडी का प्रकोप 5-10 प्रतिशत होने पर प्रोफेनोफोस (क्यूराक्रोन, सेल्क्रोन, कैरिना) 50 ईसी की तीन मिली लीटर मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए।
अगला छिड़काव जरूरत पड़ने पर क्यूनालफास 20 एएफ की 4 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से 10-12 दिनों बाद करें। कपास की फसल में सफेद मक्खी व हरे तेला का प्रकोप हो जाता हैं। इसलिए किसानों को इनकी निगरानी रखने के लिए प्रेरित करें।
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उन्होंने कपास में गुलाबी सुंडी की रोकथाम के बारे में जानकारी दी। तकनीकी सहायक डाॅ. राबर्ट ने देसी कपास से जुड़ी सरकार की योजनाओं के बारे में बताया।
प्रशिक्षण शिविर में विशेष रूप से उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. अजय यादव, पौध संरक्षण अधिकारी डाॅ. हरपाल यादव, केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र यादव, डॉ. राजपाल यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। शिविर में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से लगभग 65 अधिकारियों एवं कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
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प्रशिक्षण में वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ. जयलाल यादव ने कपास फसल में गुलाबी सुंडी की रोकथाम एवं समन्वित कीट प्रबंधन पर जानकारी दी।
उन्होंने वैज्ञानिकों, कृषि अधिकारियों की सलाह पर ही बताए गए कीटनाशकों का छिड़काव करने के लिए प्रेरित किया। कहा कि कपास की फसल में गुलाबी सुंडी का प्रकोप 5-10 प्रतिशत होने पर प्रोफेनोफोस (क्यूराक्रोन, सेल्क्रोन, कैरिना) 50 ईसी की तीन मिली लीटर मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करना चाहिए।
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अगला छिड़काव जरूरत पड़ने पर क्यूनालफास 20 एएफ की 4 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से 10-12 दिनों बाद करें। कपास की फसल में सफेद मक्खी व हरे तेला का प्रकोप हो जाता हैं। इसलिए किसानों को इनकी निगरानी रखने के लिए प्रेरित करें।
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उन्होंने कपास में गुलाबी सुंडी की रोकथाम के बारे में जानकारी दी। तकनीकी सहायक डाॅ. राबर्ट ने देसी कपास से जुड़ी सरकार की योजनाओं के बारे में बताया।
प्रशिक्षण शिविर में विशेष रूप से उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. अजय यादव, पौध संरक्षण अधिकारी डाॅ. हरपाल यादव, केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र यादव, डॉ. राजपाल यादव विशेष रूप से उपस्थित रहे। शिविर में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग से लगभग 65 अधिकारियों एवं कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।