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Mahendragarh-Narnaul News: स्मार्ट जल नेति पॉट से पारंपरिक चिकित्सा को मिली वैज्ञानिक मजबूती
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फोटो संख्या:71- पेटेंट प्राप्त करने के बाद विभाग के शिक्षक कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार के साथ--
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के योग विभाग को षट्कर्म प्रक्रिया से संबंधित स्मार्ट जल नेति पॉट के लिए पेटेंट मिल गया है। यह उपकरण विशेष रूप से एलर्जी, साइनस और श्वसन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। जल नेति नासिका शुद्धि व श्वसन तंत्र की सफाई के लिए उपयोगी योग क्रिया है।
पेटेंट मिलने के बाद योग विभाग के शिक्षक डॉ. अजयपाल, डॉ. नवीन, डॉ. प्रदीप कुमार सहित अन्य संकाय सदस्यों ने कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार से मुलाकात की और उन्हें विभाग के नवीन अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी। कुलपति ने कहा कि ऐसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण अनुसंधान भविष्य में योग के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन के मील के पत्थर साबित होंगे।
इस अवसर पर समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा और कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने भी योग विभाग को बधाई दी। यह पेटेंट विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ देश में योग अनुसंधान को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। इसे डिजाइंस एक्ट 2000 के अंतर्गत 9 को पंजीकृत किया गया है।
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इस कार्य में डॉ. अजयपाल, पीएचडी शोधार्थी पायल शर्मा एवं सुप्रिया चौरसिया के साथ-साथ हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय की सह आचार्य डॉ. मोनिका रानी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। विकसित स्मार्ट जल नेति पॉट पारंपरिक योग की शुद्धि क्रियाओं को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और वैज्ञानिक रूप से प्रभावी बनाने का प्रयास है।
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पेटेंट मिलने के बाद योग विभाग के शिक्षक डॉ. अजयपाल, डॉ. नवीन, डॉ. प्रदीप कुमार सहित अन्य संकाय सदस्यों ने कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार से मुलाकात की और उन्हें विभाग के नवीन अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी। कुलपति ने कहा कि ऐसे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण अनुसंधान भविष्य में योग के क्षेत्र में बड़े परिवर्तन के मील के पत्थर साबित होंगे।
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इस अवसर पर समकुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा और कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार ने भी योग विभाग को बधाई दी। यह पेटेंट विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ देश में योग अनुसंधान को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। इसे डिजाइंस एक्ट 2000 के अंतर्गत 9 को पंजीकृत किया गया है।
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इस कार्य में डॉ. अजयपाल, पीएचडी शोधार्थी पायल शर्मा एवं सुप्रिया चौरसिया के साथ-साथ हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय की सह आचार्य डॉ. मोनिका रानी का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। विकसित स्मार्ट जल नेति पॉट पारंपरिक योग की शुद्धि क्रियाओं को अधिक सुरक्षित, स्वच्छ और वैज्ञानिक रूप से प्रभावी बनाने का प्रयास है।