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Mahendragarh-Narnaul News: देर से आती चिट्ठियों में था इंतजार का अपनापन
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फोटो नंबर- 22लालचंद बोहरा, गांव- छिलरो
निजामपुर। मोबाइल और इंटरनेट के इस दौर में संदेश पलक झपकते ही सात समंदर पार पहुंच जाता है लेकिन एक वक्त वो भी था, जब सुख-दुख की एक खबर के लिए कई दिनों तक डाकिए की राह तकनी पड़ती थी।
10 पैसे का खुला पोस्टकार्ड और 25 पैसे का बंद लिफाफा ही अपनों से बात करने का सहारा थे। परदेस में बैठे बेटे घर पैसे भेजने के लिए मनीऑर्डर का सहारा लेते थे।
1999 के बाद आई दूरसंचार क्रांति ने पूरी तस्वीर ही बदल दी। अब डाक के थैले में निजी चिट्ठियां नहीं, बल्कि एटीएम कार्ड, आधार-पैन, सरकारी दस्तावेज और ऑनलाइन मंगाए गए पार्सल होते हैं। डाकिया तो वही है, मगर उसके झोले की दुनिया बदल गई है।
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1981 में सीआरपीएफ में भर्ती होने के बाद परिवार से जुड़े रहने का एकमात्र जरिया पोस्टकार्ड ही था। 10 पैसे के कार्ड पर ही मनीऑर्डर की जानकारी लिखकर पैसे भेजा करते थे। गांव में डाकिया आता तो घर में त्योहार जैसा माहौल बन जाता था।-संतराम, गांव घाटाशेर
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पहले चिट्ठियों में रिश्तों की गर्माहट होती थी और जवाब के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता था। आज संदेश सेकंड में पहुंच जाता है लेकिन उस इंतजार और अपनेपन की कमी खलती है। अब डाक से चिट्ठी नहीं, सिर्फ दस्तावेज और सामान ही आते हैं।-लालचंद बोहरा, गांव छिलरो
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10 पैसे का खुला पोस्टकार्ड और 25 पैसे का बंद लिफाफा ही अपनों से बात करने का सहारा थे। परदेस में बैठे बेटे घर पैसे भेजने के लिए मनीऑर्डर का सहारा लेते थे।
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1999 के बाद आई दूरसंचार क्रांति ने पूरी तस्वीर ही बदल दी। अब डाक के थैले में निजी चिट्ठियां नहीं, बल्कि एटीएम कार्ड, आधार-पैन, सरकारी दस्तावेज और ऑनलाइन मंगाए गए पार्सल होते हैं। डाकिया तो वही है, मगर उसके झोले की दुनिया बदल गई है।
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1981 में सीआरपीएफ में भर्ती होने के बाद परिवार से जुड़े रहने का एकमात्र जरिया पोस्टकार्ड ही था। 10 पैसे के कार्ड पर ही मनीऑर्डर की जानकारी लिखकर पैसे भेजा करते थे। गांव में डाकिया आता तो घर में त्योहार जैसा माहौल बन जाता था।-संतराम, गांव घाटाशेर
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पहले चिट्ठियों में रिश्तों की गर्माहट होती थी और जवाब के लिए हफ्तों इंतजार करना पड़ता था। आज संदेश सेकंड में पहुंच जाता है लेकिन उस इंतजार और अपनेपन की कमी खलती है। अब डाक से चिट्ठी नहीं, सिर्फ दस्तावेज और सामान ही आते हैं।-लालचंद बोहरा, गांव छिलरो