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Mahendragarh-Narnaul News: बाजरे व कपास की फसल खराब होने का मंडरा रहा खतरा
Sat, 14 Sep 2024 11:54 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Sat, 14 Sep 2024 11:54 PM IST
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महेंद्रगढ़। जून से सितंबर के दौरान सामान्य से 49 प्रतिशत अधिक हुई बारिश के कारण बाजरे व कपास की फसलों के खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। 2.38 हजार एकड़ में खड़ी बाजरे की फसल के सिरटों में दाना पककर तैयार हो चुका है।
लगातार हो रही बारिश के कारण दाने के काला पड़ने व सिरटे में ही जमवार होने की संभावना लगातार बढ़ रही है। वहीं अधिक बारिश के कारण 47 हजार एकड़ में खड़ी कपास पर भी खराब होने का संकट मंडरा रहा है। इस समय दोनों ही फसलों को खुले मौसम एवं धूप की आवश्यकता है। लेकिन लगातार बारिश होने के कारण कपास की फसल में टिंडे गलने आरंभ हो चुके हैं। शुक्रवार रात आठ बजे से करीब 11 बजे तक कनीना क्षेत्र में 38 एमएम बारिश दर्ज की गई।
सामान्य से 49 प्रतिशत अधिक हो चुकी है बारिश
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्र मोहन ने बताया कि जिला महेंद्रगढ़ में एक जून से 14 सितंबर तक 559.2 एमएम बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान जिला में 376.3 एमएम औसत सामान्य बारिश होती है जो सामान्य से 49 प्रतिशत अधिक दर्ज हुई है। जिले में जितनी सामान्य बारिश होती है उससे दोगुना बारिश हुई है। अगस्त व सितंबर के प्रथम पखवाड़े में लगातार मानसून की सक्रियता बनी रही है। सितंबर के एक पखवाड़े में कुल 63.3 एमएम बारिश दर्ज हुई है जबकि इस दौरान जिला में सामान्य बारिश 37.4 मिलीमीटर बारिश होती है जो सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक है। आगामी एक सप्ताह तक महेंद्रगढ़ में लगातार मौसम परिवर्तन शील बना रहेगा और एक दो स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी की गतिविधियों को दर्ज किया जाएगा।
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यह है फसलों की स्थिति
जिले में इस बार सबसे बड़ा रकबा 2.38 लाख एकड़ में बाजरे का है। अगेती फसल पककर पूरी तरह तैयार है और किसान मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। इस समय अधिक बारिश से दाने के काला पड़ने, चेपा व दाना गलने की समस्या को बढ़ावा देगी। पकी हुई फसल हल्की बारिश व तेज हवा से गिरने का खतरा भी बना हुआ है। वहीं 47 हजार एकड़ में खड़ी कपास भी अधिक बारिश के कारण खराब होने की स्थिति में पहुंच चुकी है। जहां जलभराव की स्थिति है वहां सूखने लगी है। इसके अलावा लगातार बारिश के कारण टिंडे भी काले पड़ने लगे हैं।
इस समय अधिक बारिश से दोनों ही फसलों में नुकसान की आशंका रहेगी। लेकिन जल्द मौसम खुल जाता है तो अभी तक फसलों में अधिक नुकसान नहीं हुआ है। जिले में अधिकांश बाजरे की फसल पककर तैयार हो चुकी है। वहीं कपास में भी टिडें गलने का खतरा बना हुआ है। किसान फसलों की कटाई करते समय मौसम का विशेष ध्यान रखें।
डॉ. अजय यादव, उपमंडल कृषि अधिकारी महेंद्रगढ़।
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लगातार हो रही बारिश के कारण दाने के काला पड़ने व सिरटे में ही जमवार होने की संभावना लगातार बढ़ रही है। वहीं अधिक बारिश के कारण 47 हजार एकड़ में खड़ी कपास पर भी खराब होने का संकट मंडरा रहा है। इस समय दोनों ही फसलों को खुले मौसम एवं धूप की आवश्यकता है। लेकिन लगातार बारिश होने के कारण कपास की फसल में टिंडे गलने आरंभ हो चुके हैं। शुक्रवार रात आठ बजे से करीब 11 बजे तक कनीना क्षेत्र में 38 एमएम बारिश दर्ज की गई।
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सामान्य से 49 प्रतिशत अधिक हो चुकी है बारिश
मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्र मोहन ने बताया कि जिला महेंद्रगढ़ में एक जून से 14 सितंबर तक 559.2 एमएम बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान जिला में 376.3 एमएम औसत सामान्य बारिश होती है जो सामान्य से 49 प्रतिशत अधिक दर्ज हुई है। जिले में जितनी सामान्य बारिश होती है उससे दोगुना बारिश हुई है। अगस्त व सितंबर के प्रथम पखवाड़े में लगातार मानसून की सक्रियता बनी रही है। सितंबर के एक पखवाड़े में कुल 63.3 एमएम बारिश दर्ज हुई है जबकि इस दौरान जिला में सामान्य बारिश 37.4 मिलीमीटर बारिश होती है जो सामान्य से 69 प्रतिशत अधिक है। आगामी एक सप्ताह तक महेंद्रगढ़ में लगातार मौसम परिवर्तन शील बना रहेगा और एक दो स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी की गतिविधियों को दर्ज किया जाएगा।
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यह है फसलों की स्थिति
जिले में इस बार सबसे बड़ा रकबा 2.38 लाख एकड़ में बाजरे का है। अगेती फसल पककर पूरी तरह तैयार है और किसान मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। इस समय अधिक बारिश से दाने के काला पड़ने, चेपा व दाना गलने की समस्या को बढ़ावा देगी। पकी हुई फसल हल्की बारिश व तेज हवा से गिरने का खतरा भी बना हुआ है। वहीं 47 हजार एकड़ में खड़ी कपास भी अधिक बारिश के कारण खराब होने की स्थिति में पहुंच चुकी है। जहां जलभराव की स्थिति है वहां सूखने लगी है। इसके अलावा लगातार बारिश के कारण टिंडे भी काले पड़ने लगे हैं।
इस समय अधिक बारिश से दोनों ही फसलों में नुकसान की आशंका रहेगी। लेकिन जल्द मौसम खुल जाता है तो अभी तक फसलों में अधिक नुकसान नहीं हुआ है। जिले में अधिकांश बाजरे की फसल पककर तैयार हो चुकी है। वहीं कपास में भी टिडें गलने का खतरा बना हुआ है। किसान फसलों की कटाई करते समय मौसम का विशेष ध्यान रखें।
डॉ. अजय यादव, उपमंडल कृषि अधिकारी महेंद्रगढ़।