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सेवा, सहयोग और समर्पण की सीख देती है कथा : आचार्य प्रवेश
Mon, 23 Jun 2025 11:09 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Mon, 23 Jun 2025 11:09 PM IST
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फोटो संख्या: 52- श्याम मित्र मंडल के तत्वावधान में कनीना में चल रही नानी बाई रो मायरो कथा में प
कनीना। अनाज मंडी में श्याम मित्र मंडल के तत्वावधान में चल रही नानी बाई का मायरा की कथा का समापन नरसी मेहता व श्रीकृष्ण के बीच हुए रोचक संवाद से हुआ। आचार्य प्रवेश रसिक ने कहा कि यह कथा सेवा, सहयोग और समर्पण की सीख देती है। कथा में सहयोग की भावना होनी चाहिए, क्योंकि सनातन धर्म को जीवित रखना है तो हमें एकजुटता मिलाकर ऐसे धार्मिक अनुष्ठानों करना जरूरी है।
नरसी मेहता में भगवान के प्रति सहयोग व समर्पण की भावना थी। जिस दिन हमारे बीच में सहयोग की भावना आ जाएगी। उन्होंने नरसी मेहता व श्रीकृष्ण के बीच हुए रोचक संवाद को प्रस्तुत किया।
कथा वाचक ने कहा कि घर में कितनी भी बहुएं हों, कोई अपने पीहर से कितना भी लाए, मगर ससुराल के लोगों को कभी भी धन के लिए किसी को प्रताड़ित नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर किसी की आर्थिक स्थिति एक सी नहीं होती है। जीवन के अंत समय को इंसान को हमेशा याद रखना चाहिए। कड़ी के लिए नया पेड़ लगाना पड़ेगा। सब कुछ पहले से ही तय होता है।
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कथा के अंतिम दिन विशेष भाग मायरे का सजीव मंचन हुआ। इसमें श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त नरसी मेहता की पुत्री नानी बाई के लालची ससुराल में आयोजित कार्यक्रम में मायरा भरने स्वयं श्रीहरि की ओर से उपस्थित होकर अपने भक्त की लाज रखने और करोड़ों रुपये का मायरा भरने की कथा का संगीतमय वर्णन किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रवक्ता सचिन कुमार ने किया।
इस अवसर पर श्याम मित्र मंडल के प्रधान अनिल गर्ग, प्रधान निरंजन मित्तल, विनोद मित्तल, रवींद्र बंसल, संजय गर्ग, पूर्व पार्षद रोशन लाल गोयल, विजेंद्र, मुकेश सिंगला आदि लोग मौजूद रहे।
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नरसी मेहता में भगवान के प्रति सहयोग व समर्पण की भावना थी। जिस दिन हमारे बीच में सहयोग की भावना आ जाएगी। उन्होंने नरसी मेहता व श्रीकृष्ण के बीच हुए रोचक संवाद को प्रस्तुत किया।
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कथा वाचक ने कहा कि घर में कितनी भी बहुएं हों, कोई अपने पीहर से कितना भी लाए, मगर ससुराल के लोगों को कभी भी धन के लिए किसी को प्रताड़ित नहीं करना चाहिए, क्योंकि हर किसी की आर्थिक स्थिति एक सी नहीं होती है। जीवन के अंत समय को इंसान को हमेशा याद रखना चाहिए। कड़ी के लिए नया पेड़ लगाना पड़ेगा। सब कुछ पहले से ही तय होता है।
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कथा के अंतिम दिन विशेष भाग मायरे का सजीव मंचन हुआ। इसमें श्रीकृष्ण के अनन्य भक्त नरसी मेहता की पुत्री नानी बाई के लालची ससुराल में आयोजित कार्यक्रम में मायरा भरने स्वयं श्रीहरि की ओर से उपस्थित होकर अपने भक्त की लाज रखने और करोड़ों रुपये का मायरा भरने की कथा का संगीतमय वर्णन किया गया। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रवक्ता सचिन कुमार ने किया।
इस अवसर पर श्याम मित्र मंडल के प्रधान अनिल गर्ग, प्रधान निरंजन मित्तल, विनोद मित्तल, रवींद्र बंसल, संजय गर्ग, पूर्व पार्षद रोशन लाल गोयल, विजेंद्र, मुकेश सिंगला आदि लोग मौजूद रहे।