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48 हजार की आबादी की सुरक्षा 36 पुलिस कर्मचारियों के भरोसे, काम का अतिरिक्त दबाव झेल रहे पुलिस कर्मचारी
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शहर थाना महेंद्रगढ़।
- फोटो : Narnol
शहर की करीब 48 हजार की आबादी की सुरक्षा का जिम्मा इस समय शहर थाना के महज 36 कर्मचारियों के भरोसे है। लंबे समय से पुलिस कर्मचारियों का अभाव रहा है जिसके चलते अपराध का आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पुलिस कर्मचारियों पर अतिरिक्त काम का दबाव भी बना रहता है। वहीं पुलिस कर्मचारियों के स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए भी लंबे समय से कुछ विशेष नहीं किया जा रहा है। अतिरिक्त कार्यभार के चलते पुलिस कर्मचारी भी लगातार दबाव में काम करने को मजबूर हैं।
वहीं तीन वर्ष पूर्व 4.86 करोड़ की लागत से कर्मचारियों के लिए महेंद्रगढ़ में बनाए गए 36 फ्लैट का काम तय सीमा में भी पूरा नहीं हो पाया जिसके चलते पुलिस कर्मचारियों को पुराने क्वार्टरों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्ष 2018 में बने प्रस्ताव के तहत मार्च 2021 में इन फ्लैटों की चाबी भी पुलिस कर्मचारियों को सौंपी जानी थी लेकिन तय समय सीमा बीतने के बावजूद भी 10 प्रतिशत काम होना शेष है।
यह है महेंद्रगढ़ शहर थाने में स्टाफ की स्थिति
महेंद्रगढ़ शहर थाना में इस समय कुल एसएचओ सहित 36 ही पुलिसकर्मी मौजूद हैं। थाना परिसर में आने वाले लोगों की निगरानी एवं थाने में व्यवस्थाएं चाक चौबंद रखने के लिए शहरी थाना में 4 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। वहीं वाहनों पुलिस कर्मियों के लिए केवल दो 112 नंबर की गाड़ियां हैं। एक मोबाइल गाड़ी एसएचओ के पास है इसके साथ-साथ एक पीसीआर और एक राइडर भी है। थाना सदर महेंद्रगढ़ में 19 पुलिस कर्मचारियों की तैनाती है जिसमें एसचओ सहित 6 एसआई, 4 एएसआई, 3 हवलदार, 6 सिपाही तैनात है।
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कनीना थाना के 32 पुलिसकर्मी उठा रहे दो लाख आबादी की सुरक्षा का जिम्मा
वहीं थाना कनीना की बात की जाए तो यहां कस्बे की करीब 30 हजार की आबादी के साथ-साथ थाने के अंतर्गत आने वाले 54 गांवों की करीब दो लाख की आबादी की सुरक्षा महज 32 पुलिस कर्मचारियों के भरोसे है। कनीना थाना के अंतर्गत दौंगड़ा चौकी भी आती है। ऐसे में अतिरिक्त काम का दबाव हर समय पुलिस कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है।
स्मार्ट हथियारों के नाम पर पुलिस के हाथ खाली
जिलेभर में पुलिस कर्मचारियों के पास स्मार्ट हथियारों के नाम पर हाथ खाली हैं। लंबे समय से पुलिस कर्मचारियों के लिए आधुनिक हथियार उपलब्ध कराने के लिए कोई योजना तक नहीं बनी है। अचानक उमड़ने वाली भीड़ व उपद्रवियों से निपटने के लिए पुलिस कर्मचारियों के पास सीमित संसाधन हैं।
डायल 112 की गाड़ियां बेहतर
डायल 112 की गाड़ियां बेहतर तरीके से पुलिस के लिए सहायक साबित हो रही हैं। ऐसे में अधिकांश घटनाओं के बारे में शीघ्र पुलिस कर्मचारियों को अपडेट मिलने से काफी हद तक अपराध पर अंकुश लगाया जा रहा है। यह गाड़ियां आधुनिक गाड़ियां हैं जो घटना पर शीघ्र पहुंचकर अपराध रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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वहीं तीन वर्ष पूर्व 4.86 करोड़ की लागत से कर्मचारियों के लिए महेंद्रगढ़ में बनाए गए 36 फ्लैट का काम तय सीमा में भी पूरा नहीं हो पाया जिसके चलते पुलिस कर्मचारियों को पुराने क्वार्टरों में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्ष 2018 में बने प्रस्ताव के तहत मार्च 2021 में इन फ्लैटों की चाबी भी पुलिस कर्मचारियों को सौंपी जानी थी लेकिन तय समय सीमा बीतने के बावजूद भी 10 प्रतिशत काम होना शेष है।
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यह है महेंद्रगढ़ शहर थाने में स्टाफ की स्थिति
महेंद्रगढ़ शहर थाना में इस समय कुल एसएचओ सहित 36 ही पुलिसकर्मी मौजूद हैं। थाना परिसर में आने वाले लोगों की निगरानी एवं थाने में व्यवस्थाएं चाक चौबंद रखने के लिए शहरी थाना में 4 सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। वहीं वाहनों पुलिस कर्मियों के लिए केवल दो 112 नंबर की गाड़ियां हैं। एक मोबाइल गाड़ी एसएचओ के पास है इसके साथ-साथ एक पीसीआर और एक राइडर भी है। थाना सदर महेंद्रगढ़ में 19 पुलिस कर्मचारियों की तैनाती है जिसमें एसचओ सहित 6 एसआई, 4 एएसआई, 3 हवलदार, 6 सिपाही तैनात है।
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कनीना थाना के 32 पुलिसकर्मी उठा रहे दो लाख आबादी की सुरक्षा का जिम्मा
वहीं थाना कनीना की बात की जाए तो यहां कस्बे की करीब 30 हजार की आबादी के साथ-साथ थाने के अंतर्गत आने वाले 54 गांवों की करीब दो लाख की आबादी की सुरक्षा महज 32 पुलिस कर्मचारियों के भरोसे है। कनीना थाना के अंतर्गत दौंगड़ा चौकी भी आती है। ऐसे में अतिरिक्त काम का दबाव हर समय पुलिस कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है।
स्मार्ट हथियारों के नाम पर पुलिस के हाथ खाली
जिलेभर में पुलिस कर्मचारियों के पास स्मार्ट हथियारों के नाम पर हाथ खाली हैं। लंबे समय से पुलिस कर्मचारियों के लिए आधुनिक हथियार उपलब्ध कराने के लिए कोई योजना तक नहीं बनी है। अचानक उमड़ने वाली भीड़ व उपद्रवियों से निपटने के लिए पुलिस कर्मचारियों के पास सीमित संसाधन हैं।
डायल 112 की गाड़ियां बेहतर
डायल 112 की गाड़ियां बेहतर तरीके से पुलिस के लिए सहायक साबित हो रही हैं। ऐसे में अधिकांश घटनाओं के बारे में शीघ्र पुलिस कर्मचारियों को अपडेट मिलने से काफी हद तक अपराध पर अंकुश लगाया जा रहा है। यह गाड़ियां आधुनिक गाड़ियां हैं जो घटना पर शीघ्र पहुंचकर अपराध रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।