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माघ माह की गुप्त नवरात्रि आज से, करें दस महाविद्याओं की पूजा : राहुल भारद्वाज
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फोटो संख्या:66- पंडित राहुल भारद्वाज
- फोटो : बहराइच के देहात कोतवाली परिसर में खड़ी बाइकें।
महेंद्रगढ़। माघ माह की गुप्त नवरात्रि का प्रारंभ 19 जनवरी सोमवार से होगा और समापन 27 जनवरी को होगा। गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व होता है। यह जानकारी ज्योतिषाचार्य राहुल भारद्वाज ने दी।
उन्होंने बताया कि इन नवरात्रों के नौ दिनों में दुर्गा माता के दस महाविद्याओं की साधना और आराधना की जाती है। इनमें मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, चित्रमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बंगलापुरी, मातंगी और मां कमला देवी की साधना होती है।
गुप्त नवरात्र की पूजा को गुप्त रखा जाता है। साधना जितनी गुप्त होगी उसका फल भी उतना ही फलदायी होगा। इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के साधनाकाल में मां दुर्गा (शक्ति) का जप, तप, अनुष्ठान साधना पूर्ण विधि-विधान से गुप्त तरीके से करने पर जीवन में आ रही सभी बाधाएं समाप्त हो जाती है।
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ये रहेगा कलश स्थापना का शुभ मूहर्तः
नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापित किया जाता है। सुबह 7:19 बजे से 8:39 बजे तक, सुबह 9:58 बजे से 11:17 बजे तक शुभ मुहूर्त है। इसके बाद दोपहर 12:15 से 12:57 बजे तक अभिजीत मुहूर्त कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया कि शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य और पूजा अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है।
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गुप्त नवरात्रि के दौरान बनने वाले शुभ योग
- 19 जनवरी कुमार योग, सर्वार्थ सिद्धि
- 20 जनवरी द्विपुष्कर योग, राजयोग
- 21 जनवरी राजयोग, रवि योग
- 22 जनवरी रवि योग
- 23 जनवरी कुमार योग, रवि योग
- 24 जनवरी रवि योग
- 25 जनवरी रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि
- 27 जनवरी सर्वार्थ सिद्धि योग
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उन्होंने बताया कि इन नवरात्रों के नौ दिनों में दुर्गा माता के दस महाविद्याओं की साधना और आराधना की जाती है। इनमें मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, चित्रमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बंगलापुरी, मातंगी और मां कमला देवी की साधना होती है।
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गुप्त नवरात्र की पूजा को गुप्त रखा जाता है। साधना जितनी गुप्त होगी उसका फल भी उतना ही फलदायी होगा। इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के साधनाकाल में मां दुर्गा (शक्ति) का जप, तप, अनुष्ठान साधना पूर्ण विधि-विधान से गुप्त तरीके से करने पर जीवन में आ रही सभी बाधाएं समाप्त हो जाती है।
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ये रहेगा कलश स्थापना का शुभ मूहर्तः
नवरात्र के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए कलश स्थापित किया जाता है। सुबह 7:19 बजे से 8:39 बजे तक, सुबह 9:58 बजे से 11:17 बजे तक शुभ मुहूर्त है। इसके बाद दोपहर 12:15 से 12:57 बजे तक अभिजीत मुहूर्त कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। उन्होंने बताया कि शुभ मुहूर्त में किया गया कार्य और पूजा अनुष्ठान हमेशा ही सफल होता है।
गुप्त नवरात्रि के दौरान बनने वाले शुभ योग
- 19 जनवरी कुमार योग, सर्वार्थ सिद्धि
- 20 जनवरी द्विपुष्कर योग, राजयोग
- 21 जनवरी राजयोग, रवि योग
- 22 जनवरी रवि योग
- 23 जनवरी कुमार योग, रवि योग
- 24 जनवरी रवि योग
- 25 जनवरी रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि
- 27 जनवरी सर्वार्थ सिद्धि योग