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Mahendragarh-Narnaul News: शहर में ई-रिक्शा की संख्या डेढ़ साल में 30 से 400 पार पहुंची
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फोटो नंबर- 13निहाल सिंह, किसान, गांव- बिहाली
नारनौल। पेट्रोल व सीएनजी के बढ़ते दामों ने शहर की सवारी का ट्रेंड ही बदल दिया है। डेढ़ साल पहले तक शहर में महज 20-30 ई-रिक्शा चलते थे, अब इनकी संख्या 400 पार कर चुकी है। कम लागत और ज्यादा बचत इसकी सबसे बड़ी वजह है।
सीएनजी ऑटो चालकों को एक चक्कर का खर्च निकालने के लिए 10 सवारियों का इंतजार करना पड़ता है, जिसके चलते वे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व चौराहों पर खड़े रहते हैं।
वहीं ई-रिक्शा चालक 2-3 सवारी मिलते ही चक्कर लगा लेते हैं, जिससे यह आमजन की पहली पसंद बन गया है। यही वजह है कि अब पेट्रोल-सीएनजी ऑटो चालक भी ई-रिक्शा की ओर रुख करने लगे हैं।
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ई-रिक्शा के बढ़ते चलन से बेरोजगार लोग भी बिना अनुभव व प्रशिक्षण के इन्हें चलाने लगे हैं, जिससे यात्रियों के साथ हादसों का खतरा बना रहता है।
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गत वर्ष फरवरी माह में ऑटो का किराया बढ़ाकर 20 रुपये किया गया था लेकिन पेट्रोल-सीएनजी के बढ़ते दामों के कारण बचत बहुत कम निकल पाती है जिससे केवल ऑटो की किस्त ही भर पाते हैं।-भारत भूषण, ऑटो चालक, मोहल्ला पुरानी मंडी
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शहर का एक चक्कर लगाने में ई-रिक्शा में बहुत कम लागत आती है जिससे कम सवारियों में भी इसे चलाया जा सकता है। इसलिए मैं भी आगामी दिनों में ई-रिक्शा चलाने की योजना बना रहा हूं।-मुकेश सैनी, ऑटो चालक, गांव निवाज नगर
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ई-रिक्शा के बढ़ते चलन से कुछ कम अनुभवी लोग भी इसका संचालन कर रहे हैं जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और आमदनी घट रही है। वहीं आमजन की सुरक्षा भी खतरे में रहती है। -मुकेश कुमार, ई-रिक्शा चालक, मोहल्ला किला रोड
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सीएनजी ऑटो चालकों को एक चक्कर का खर्च निकालने के लिए 10 सवारियों का इंतजार करना पड़ता है, जिसके चलते वे बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व चौराहों पर खड़े रहते हैं।
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वहीं ई-रिक्शा चालक 2-3 सवारी मिलते ही चक्कर लगा लेते हैं, जिससे यह आमजन की पहली पसंद बन गया है। यही वजह है कि अब पेट्रोल-सीएनजी ऑटो चालक भी ई-रिक्शा की ओर रुख करने लगे हैं।
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ई-रिक्शा के बढ़ते चलन से बेरोजगार लोग भी बिना अनुभव व प्रशिक्षण के इन्हें चलाने लगे हैं, जिससे यात्रियों के साथ हादसों का खतरा बना रहता है।
गत वर्ष फरवरी माह में ऑटो का किराया बढ़ाकर 20 रुपये किया गया था लेकिन पेट्रोल-सीएनजी के बढ़ते दामों के कारण बचत बहुत कम निकल पाती है जिससे केवल ऑटो की किस्त ही भर पाते हैं।-भारत भूषण, ऑटो चालक, मोहल्ला पुरानी मंडी
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शहर का एक चक्कर लगाने में ई-रिक्शा में बहुत कम लागत आती है जिससे कम सवारियों में भी इसे चलाया जा सकता है। इसलिए मैं भी आगामी दिनों में ई-रिक्शा चलाने की योजना बना रहा हूं।-मुकेश सैनी, ऑटो चालक, गांव निवाज नगर
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ई-रिक्शा के बढ़ते चलन से कुछ कम अनुभवी लोग भी इसका संचालन कर रहे हैं जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और आमदनी घट रही है। वहीं आमजन की सुरक्षा भी खतरे में रहती है। -मुकेश कुमार, ई-रिक्शा चालक, मोहल्ला किला रोड