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Mahendragarh-Narnaul News: हर बच्चे की सीखने की क्षमता परखेगा निपुण मिशन, तैयार होगी विशेष रणनीति
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फोटो 21जेएनडी15-बीपीआईयू की बैठक में मौजूद खंड शिक्षा अधिकारी और अन्य अधिकारी। स्रोत कर्मचार
- फोटो : credit
जींद। निपुण हरियाणा मिशन के तहत विद्यार्थियों की मूलभूत भाषा और गणितीय दक्षताओं को मजबूत करने के लिए नरवाना और उचाना खंड में बीपीआईयू की बैठक हुई। बैठक में पीरियोडिक असेसमेंट-1 के परिणामों के आधार पर अगले 90 दिनों की कार्ययोजना तैयार कर उस पर प्रभावी ढंग से काम करने पर जोर दिया गया।
बैठक का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम तैयार करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की वास्तविक सीखने की स्थिति को पहचानना है। परिणामों के आधार पर ऐसे विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी जिन्हें किसी विशेष अधिगम क्षेत्र में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है। इनके लिए विद्यालय स्तर पर उपचारात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षण कराया जाएगा तथा प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी।
बैठक में निपुण डैशबोर्ड, स्टूडेंट लर्निंग आउटकम, एफएलएन विजिट और शिक्षक प्रशिक्षण की भी समीक्षा की गई। ऐसे विद्यालयों की पहचान करने के निर्देश दिए गए, जहां पिछले 60 दिनों से अधिक समय से एफएलएन विजिट नहीं हुई है।
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इन स्कूलों में नियमित भ्रमण कर कक्षा शिक्षण का अवलोकन करने और शिक्षकों को मौके पर आवश्यक शैक्षणिक सहयोग देने पर जोर दिया गया। नरवाना के खंड शिक्षा अधिकारी संतोष शर्मा और उचाना के खंड शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश आर्य ने भरोसा दिलाया कि दोनों खंडों में एबीआरसी, बीआरपी और सीआरसी निपुण गतिविधियों को गति देने के लिए पूरा सहयोग करेंगे।
पैरेंट ऐप और डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर
बैठक में शिक्षक प्रशिक्षण की स्थिति की समीक्षा करते हुए प्रशिक्षण में सीखी गतिविधियों को कक्षा शिक्षण में लागू करने के निर्देश दिए गए। निपुण हरियाणा पैरेंट ऐप का नियमित प्रयोग करने और अभिभावकों को भी इसके उपयोग के लिए प्रेरित करने पर बल दिया गया। संपर्क डिवाइस समेत उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने की बात कही गई।
वर्जन
बच्चों के सीखने का स्तर तभी मजबूत होगा, जब उनकी वास्तविक जरूरत पहचानकर उसी के अनुरूप शैक्षणिक सहयोग दिया जाए। नियमित आकलन, एफएलएन विजिट, शिक्षक प्रशिक्षण और 90 दिवसीय कार्ययोजना निपुण लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। -राजेश वशिष्ठ, जिला समन्वयक एफएलएन जींद
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बैठक का उद्देश्य केवल परीक्षा परिणाम तैयार करना नहीं, बल्कि प्रत्येक बच्चे की वास्तविक सीखने की स्थिति को पहचानना है। परिणामों के आधार पर ऐसे विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी जिन्हें किसी विशेष अधिगम क्षेत्र में अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है। इनके लिए विद्यालय स्तर पर उपचारात्मक और गतिविधि आधारित शिक्षण कराया जाएगा तथा प्रगति की नियमित समीक्षा की जाएगी।
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बैठक में निपुण डैशबोर्ड, स्टूडेंट लर्निंग आउटकम, एफएलएन विजिट और शिक्षक प्रशिक्षण की भी समीक्षा की गई। ऐसे विद्यालयों की पहचान करने के निर्देश दिए गए, जहां पिछले 60 दिनों से अधिक समय से एफएलएन विजिट नहीं हुई है।
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इन स्कूलों में नियमित भ्रमण कर कक्षा शिक्षण का अवलोकन करने और शिक्षकों को मौके पर आवश्यक शैक्षणिक सहयोग देने पर जोर दिया गया। नरवाना के खंड शिक्षा अधिकारी संतोष शर्मा और उचाना के खंड शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश आर्य ने भरोसा दिलाया कि दोनों खंडों में एबीआरसी, बीआरपी और सीआरसी निपुण गतिविधियों को गति देने के लिए पूरा सहयोग करेंगे।
पैरेंट ऐप और डिजिटल संसाधनों के इस्तेमाल पर जोर
बैठक में शिक्षक प्रशिक्षण की स्थिति की समीक्षा करते हुए प्रशिक्षण में सीखी गतिविधियों को कक्षा शिक्षण में लागू करने के निर्देश दिए गए। निपुण हरियाणा पैरेंट ऐप का नियमित प्रयोग करने और अभिभावकों को भी इसके उपयोग के लिए प्रेरित करने पर बल दिया गया। संपर्क डिवाइस समेत उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करने की बात कही गई।
वर्जन
बच्चों के सीखने का स्तर तभी मजबूत होगा, जब उनकी वास्तविक जरूरत पहचानकर उसी के अनुरूप शैक्षणिक सहयोग दिया जाए। नियमित आकलन, एफएलएन विजिट, शिक्षक प्रशिक्षण और 90 दिवसीय कार्ययोजना निपुण लक्ष्य हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। -राजेश वशिष्ठ, जिला समन्वयक एफएलएन जींद