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Mahendragarh-Narnaul News: हास्य-व्यंग्य और देशभक्ति की मिली-जुली प्रस्तुतियों पर जमकर बजी तालिया

Sun, 01 Mar 2026 01:48 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 01 Mar 2026 01:48 AM IST
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The mixed presentation of comedy, satire and patriotism received thunderous applause.
महेंद्रगढ़। ये हमारे देश के सैनिक नहीं हैं, रूद्र के अवतार हैं साक्षात, देखो जिसके दम से आज देश में छाई बहार सै, सच कहता हूं लाडले यो भगत सिंह सरदार सै। कविता पाठ के माध्यम से राष्ट्रवादी कवि योगेंद्र शर्मा जगबीर राठी ने शहीदों का नमन किया।
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उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज व बुचौली रोड स्थित निजी स्कूल के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय लोक कला विरासत उत्सव के छठे दिन आयोजित कवि सम्मलेन में हास्य व्यंग्य के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति सजग दृष्टिकोण पर सैकडों की उपस्थित में जमकर तालिया बजाई।
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कवि सम्मलेन में हरियाणा रेडक्रॉस सोसायटी के पूर्व राज्य सचिव महेश जोशी मुख्य अतिथि रहे। अध्यक्षता नारनौल व्यापार मंडल के प्रधान संजय गर्ग ने की। इस मौके पर सारिका गर्ग व नगर पालिका की उपाध्यक्ष मंजू काैशिक, मनीषा सैनी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉ. धर्मेश कौशिक ने किया।
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कवियों की कविताओं से झूम उठा पाढाल कवि सम्मलेन का मंच संचालन डॉ. जगबीर राठी ने किया सर्वप्रथम युवा कवि राजकुमार धनखड़ ने अपनी रचना कितना आग्या फर्क देखल्यो काल और आज मह, नए ढ़ाल की रीत चालगी नए समाज मह, भुलाए ना भुलता वो जमाना पुराना र और घरका तै लूकमा जाकै जोहड़ मै न्हाणा र। अतीत से जुड़ी रचनाओं से संस्कारों का जीवित रखने का सफल प्रयास किया।
इस उपरांत कवि और फिल्म एक्टर गायक डॉ. जगबीर राठी ने सर्वप्रथम सुंदर-सुंदर हास्य व्यंग चुटकलों से श्रोताओं को खुब गुदगुदाया। उन्होंने अपने चीरपरीचित अंदाज में श्रोताओं की मांग पर अपने गीत बोल तेरे मीठे मीठे बात तेरी आछी लागे, मनै मत बूझ तू कितनी आछी लागे, गीत पर उपस्थिति को नाचने पर मजबूर कर दिया।

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राष्ट्रवाद की बही बहार
भीलवाड़ा राजस्थान से आए वीर स्स के सबसे बड़े कवि योगेंद्र शर्मा ने शहीदों की शहादत को नमन करते हुए देश के दुश्मनों को अपनो रचनाओं से चेतावनी दी। उनकी रचना रक्त की रंगौलियों से देश की छाती सजाते मैं उन्ही के शीश पर रौली सजाना चाहता हूं, करतली पर प्राण धर कर जो खड़े ह शरहदों पर मैं उन्ही के मान में मस्तक झुकाना चाहता हूं। रचना की एक-एक लाइन पर वंदे मातरम व भारत मां की जय के उद्घोष से पांडाल गूंज उठा।
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