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Mahendragarh-Narnaul News: नौकरी का झांसा दे युवाओं को म्यांमार भेजने का मुख्य आरोपी गिरफ्तार
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फोटो 17 पुलिस की गिरफ्त में मुख्य आरोपी। पुलिस
नारनौल। साइबर थाना पुलिस ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं को म्यांमार भेजकर उनसे जबरन ठगी कराने वाले मुख्य आरोपी गांव हरीता हिसार के संदीप कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया गया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है।
सतनाली के ढाणा निवासी पीड़ित दीपक कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने उसे और उसके साथी को थाईलैंड में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी, 50 हजार रुपये वेतन और अन्य सुविधाओं का लालच देकर फंसाया था। आरोपी टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क करता था और उसने फर्जी इंटरव्यू के आधार पर उन्हें बैंकॉक बुलाया, जहां से उन्हें धोखे से जंगल और नदी के रास्ते म्यांमार ले जाया गया।
वहां पहुंचने पर पीड़ितों को केके पार्क स्थित एक कंपनी में बंधक बना लिया गया और उनके पासपोर्ट छीन लिए गए। पीड़ितों से जबरन 15 से 18 घंटे काम कराया जाता था और उन्हें अन्य भारतीयों व विदेशियों के साथ साइबर ठगी (स्कैम) करने के लिए मजबूर किया जाता था। काम करने से मना करने पर उन्हें पीटा जाता, करंट लगाया जाता और जान से मारने की धमकी दी जाती थी।
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जांच में सामने आया कि आरोपी संदीप को प्रत्येक युवक को फंसाने के बदले 5 से 7 हजार (क्रिप्टोकरेंसी) कमीशन मिलता था। इतना ही नहीं, वापस भारत भेजने के नाम पर उसने पीड़ितों के परिजनों से 5 लाख रुपये या दो अन्य लोगों को फंसाकर लाने की शर्त रखी थी। पीड़ित युवा भारतीय दूतावास और सेना के सहयोग से रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित वापस लौटे हैं।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि विदेश भेजने के नाम पर सोशल मीडिया पर किए जा रहे लुभावने वादों से सावधान रहें और पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही कदम उठाएं।
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सतनाली के ढाणा निवासी पीड़ित दीपक कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि आरोपी ने उसे और उसके साथी को थाईलैंड में कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी, 50 हजार रुपये वेतन और अन्य सुविधाओं का लालच देकर फंसाया था। आरोपी टेलीग्राम के माध्यम से संपर्क करता था और उसने फर्जी इंटरव्यू के आधार पर उन्हें बैंकॉक बुलाया, जहां से उन्हें धोखे से जंगल और नदी के रास्ते म्यांमार ले जाया गया।
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वहां पहुंचने पर पीड़ितों को केके पार्क स्थित एक कंपनी में बंधक बना लिया गया और उनके पासपोर्ट छीन लिए गए। पीड़ितों से जबरन 15 से 18 घंटे काम कराया जाता था और उन्हें अन्य भारतीयों व विदेशियों के साथ साइबर ठगी (स्कैम) करने के लिए मजबूर किया जाता था। काम करने से मना करने पर उन्हें पीटा जाता, करंट लगाया जाता और जान से मारने की धमकी दी जाती थी।
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जांच में सामने आया कि आरोपी संदीप को प्रत्येक युवक को फंसाने के बदले 5 से 7 हजार (क्रिप्टोकरेंसी) कमीशन मिलता था। इतना ही नहीं, वापस भारत भेजने के नाम पर उसने पीड़ितों के परिजनों से 5 लाख रुपये या दो अन्य लोगों को फंसाकर लाने की शर्त रखी थी। पीड़ित युवा भारतीय दूतावास और सेना के सहयोग से रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित वापस लौटे हैं।
पुलिस ने आमजन से अपील की है कि विदेश भेजने के नाम पर सोशल मीडिया पर किए जा रहे लुभावने वादों से सावधान रहें और पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही कदम उठाएं।