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Mahendragarh-Narnaul News: शीतलहर का कहर मासूमों पर पड़ रहा भारी
Fri, 05 Jan 2024 11:55 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 05 Jan 2024 11:55 PM IST
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कनीना। कड़ाके की ठंड व शीतलहर का कहर मासूमों व बुजुर्गाें पर भारी पड़ रहा है। उप नागरिक अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक ओपीडी हो रही हैं। इनमें अधिकतर बच्चे खांसी, जुखाम, बुखार व वायरल की चपेट में आ रहे है। कनीना क्षेत्र में आए दिन 2 से 3 बच्चों को इमरजेंसी में भर्ती करवाना पड़ रहा है।
डॉ. दीपांशु ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक ओपीडी हो रही हैं। इनमें से 70 से अधिक छोटे बच्चे शामिल होते हैं। जो बच्चा गंभीर स्थिति में दिखता है उन्हें रेफर कर दिया जाता है। लगातार बढ़ती ठंड के कारण बच्चों को त्वचा की एलर्जी, वायरल इंफेक्शन, खांसी, जुखाम, बुखार, उल्टी- दस्त सहित विभिन्न प्रकार के रोग हो रहे हैं। यह शुष्क सर्दी पड़ने की वजह से हो रही है। वर्तमान में परिवार के लोगों को विशेष तौर पर बच्चों का बुजुर्गों पर ध्यान देना चाहिए।
न बरतें लापरवाही पड़ सकती है भारी
कड़ाके की ठंड में स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें अन्यथा यह स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। सीधे ऊनी गर्म कपड़े बच्चों को न पहनाएं। विशेषकर छोटे बच्चों को पहले सूती वस्त्र व ऊपर से अन्य गर्म वस्त्र पहनाएं। बच्चे को खांसी या वायरल इंफेक्शन हो जाए तो दूसरे बच्चों से दूर रखना चाहिए। रुमाल व तोलिया सहित विभिन्न प्रकार के वस्त्र अलग रखें। सुबह-शाम के समय होने वाली ठंड से बच्चों का खास बचाव करें। बच्चों को बाहर का खाना ना खाने दे। जुकाम व छाती जाम होने की स्थिति में बच्चों को भाप दें। अधिक तेज बुखार आता है तो चिकित्सक से परामर्श ले। अधिक से अधिक हल्के गर्म या गुनगुने पानी का प्रयोग करें।
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-डॉ. दीपांशु, उप नागरिक अस्पताल, कनीना।
इन दिनों ठंड व शीत लहर चल रही है। इसके बचाव को लेकर आम नागरिकों को सावधानी बरतनी की जरूरत है। सर्दियों के लिए पर्याप्त कपड़ों का स्टॉक रखें। नाक बहना, नाक बंद, फ्लू, वायरल नाक जाम जैसी विभिन्न बीमारियों की संभावना आमतौर पर ठंड में लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण होती हैं। इस तरह के लक्षणों से बचाव हेतु आवश्यक सामग्री व सावधानी बरते व चिकित्सकों से परामर्श ले। ठंडी हवा, बारिश, बर्फ के संपर्क में आने से बचे कम से कम यात्रा करें।
- सुरेंद्र सिंह, एसडीएम, कनीना।
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डॉ. दीपांशु ने बताया कि अस्पताल में प्रतिदिन 200 से अधिक ओपीडी हो रही हैं। इनमें से 70 से अधिक छोटे बच्चे शामिल होते हैं। जो बच्चा गंभीर स्थिति में दिखता है उन्हें रेफर कर दिया जाता है। लगातार बढ़ती ठंड के कारण बच्चों को त्वचा की एलर्जी, वायरल इंफेक्शन, खांसी, जुखाम, बुखार, उल्टी- दस्त सहित विभिन्न प्रकार के रोग हो रहे हैं। यह शुष्क सर्दी पड़ने की वजह से हो रही है। वर्तमान में परिवार के लोगों को विशेष तौर पर बच्चों का बुजुर्गों पर ध्यान देना चाहिए।
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न बरतें लापरवाही पड़ सकती है भारी
कड़ाके की ठंड में स्वास्थ्य को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें अन्यथा यह स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। सीधे ऊनी गर्म कपड़े बच्चों को न पहनाएं। विशेषकर छोटे बच्चों को पहले सूती वस्त्र व ऊपर से अन्य गर्म वस्त्र पहनाएं। बच्चे को खांसी या वायरल इंफेक्शन हो जाए तो दूसरे बच्चों से दूर रखना चाहिए। रुमाल व तोलिया सहित विभिन्न प्रकार के वस्त्र अलग रखें। सुबह-शाम के समय होने वाली ठंड से बच्चों का खास बचाव करें। बच्चों को बाहर का खाना ना खाने दे। जुकाम व छाती जाम होने की स्थिति में बच्चों को भाप दें। अधिक तेज बुखार आता है तो चिकित्सक से परामर्श ले। अधिक से अधिक हल्के गर्म या गुनगुने पानी का प्रयोग करें।
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-डॉ. दीपांशु, उप नागरिक अस्पताल, कनीना।
इन दिनों ठंड व शीत लहर चल रही है। इसके बचाव को लेकर आम नागरिकों को सावधानी बरतनी की जरूरत है। सर्दियों के लिए पर्याप्त कपड़ों का स्टॉक रखें। नाक बहना, नाक बंद, फ्लू, वायरल नाक जाम जैसी विभिन्न बीमारियों की संभावना आमतौर पर ठंड में लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण होती हैं। इस तरह के लक्षणों से बचाव हेतु आवश्यक सामग्री व सावधानी बरते व चिकित्सकों से परामर्श ले। ठंडी हवा, बारिश, बर्फ के संपर्क में आने से बचे कम से कम यात्रा करें।
- सुरेंद्र सिंह, एसडीएम, कनीना।