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श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता संसार के लिए आदर्श : कंवर सैन
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फोटो संख्या:54- कनीना के ठाकुर मंदिर में श्रद्धालुओं को कथा सुनाते कथाव्यास महंत पूर्ण देव--स्
कनीना। ठाकुरजी के बड़े मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का सातवां दिन श्रद्धा और भक्ति से भरा रहा। कथा का शुभारंभ सुबह महंत पूर्ण देव ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हवन करके किया। भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के बीच कथा आरंभ हुई जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मंदिर के पुजारी कंवर सैन वशिष्ठ ने बताया कि महंत पूर्ण देव ने भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों का वर्णन किया। उन्होंने उषा-अनिरुद्ध विवाह और नवयोगेश्वरों द्वारा वासुदेव को ज्ञान का उपदेश भी दिया।
भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का आध्यात्मिक महत्व सरल शैली में समझाया गया। कथा में सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन हुआ। महंत पूर्ण देव ने भजन बता मेरे यार सुदामा रे प्रस्तुत किया जिस पर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे।
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महंत पूर्ण देव ने श्रीकृष्ण और सुदामा की निष्काम मित्रता का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान ने स्वयं मित्र के चरण धोकर विनम्रता का आदर्श प्रस्तुत किया। राजा परीक्षित और शुकदेव के संवाद से आत्मा और मोक्ष का गूढ़ ज्ञान समझाया गया।
पुजारी कंवर सैन वशिष्ठ ने बताया कि रविवार सुबह हवन के बाद दोपहर 12 बजे से प्रसाद वितरण होगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया। इस अवसर पर मोहन सिंह यादव, ठाकुर अतर सिंह कैमला, राजेंद्र सिंह और विनय यादव सहित कई लोग उपस्थित रहे।
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मंदिर के पुजारी कंवर सैन वशिष्ठ ने बताया कि महंत पूर्ण देव ने भगवान श्रीकृष्ण के 16108 विवाहों का वर्णन किया। उन्होंने उषा-अनिरुद्ध विवाह और नवयोगेश्वरों द्वारा वासुदेव को ज्ञान का उपदेश भी दिया।
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भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरुओं का आध्यात्मिक महत्व सरल शैली में समझाया गया। कथा में सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन हुआ। महंत पूर्ण देव ने भजन बता मेरे यार सुदामा रे प्रस्तुत किया जिस पर श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे।
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महंत पूर्ण देव ने श्रीकृष्ण और सुदामा की निष्काम मित्रता का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान ने स्वयं मित्र के चरण धोकर विनम्रता का आदर्श प्रस्तुत किया। राजा परीक्षित और शुकदेव के संवाद से आत्मा और मोक्ष का गूढ़ ज्ञान समझाया गया।
पुजारी कंवर सैन वशिष्ठ ने बताया कि रविवार सुबह हवन के बाद दोपहर 12 बजे से प्रसाद वितरण होगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से प्रसाद ग्रहण करने का आग्रह किया। इस अवसर पर मोहन सिंह यादव, ठाकुर अतर सिंह कैमला, राजेंद्र सिंह और विनय यादव सहित कई लोग उपस्थित रहे।