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भागवत जीवन का सार, भवसागर से पार लगाती है : अतरलाल
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फोटो नंबर-02भागवत कथा के दौरान निकाली गई झांकी। स्रोत: आयोजक
- फोटो : मेडिकल कॉलेज
नारनौल। समीपवर्ती गांव दुलोठ जाट में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला और कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। कथा का शुभारंभ मनीष शास्त्री व यश शर्मा ने मुख्य यजमान राकेश कुमार व सुरेश कुमार के परिवार सहित विधिवत पूजन से कराया।
भागवताचार्य पं. बजरंग शास्त्री ने गोवर्धन लीला, रासलीला, कंस वध, द्वारका गमन तथा कृष्ण-रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र का अभिमान दूर किया और भक्तों-संतों की रक्षा की।
उन्होंने रासलीला को प्रभु की पावन लीला बताते हुए कहा कि श्रद्धापूर्वक श्रवण से मन के विकार दूर होते हैं। कथा में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई, जिस पर श्रद्धालु बधाई गीतों पर झूम उठे।
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ठाकुर अतरलाल अटेली ने कहा कि भागवत जीवन का सार है और इसका आश्रय लेने वाला भवसागर से पार हो जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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भागवताचार्य पं. बजरंग शास्त्री ने गोवर्धन लीला, रासलीला, कंस वध, द्वारका गमन तथा कृष्ण-रुक्मिणी विवाह का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर इंद्र का अभिमान दूर किया और भक्तों-संतों की रक्षा की।
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उन्होंने रासलीला को प्रभु की पावन लीला बताते हुए कहा कि श्रद्धापूर्वक श्रवण से मन के विकार दूर होते हैं। कथा में कृष्ण-रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी प्रस्तुत की गई, जिस पर श्रद्धालु बधाई गीतों पर झूम उठे।
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ठाकुर अतरलाल अटेली ने कहा कि भागवत जीवन का सार है और इसका आश्रय लेने वाला भवसागर से पार हो जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।