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Mahendragarh-Narnaul News: अदालत ने 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से रुपये लौटाने का दिया आदेश
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नारनौल। सिविल जज निशा ने उधार के रुपये वापस न लौटाने के एक मामले में प्रतिवादी को मूल रकम के साथ ब्याज चुकाने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि उधार लिया गया पैसा तय समय में लौटाना जरूरी है और अब प्रतिवादी को चार महीने के भीतर पूरी राशि जमा करनी होगी।
गांव बलाहा कलां निवासी गणेश ने अदालत में दायर याचिका में बताया कि उसने 1 सितंबर 2018 को मुकेगांव गोठड़ी निवासी मुकेश कुमार को 3 लाख रुपये उधार दिए थे। दोनों के बीच 24 प्रतिशत सालाना ब्याज तय हुआ था। रुपये लेते समय मुकेश ने प्रोनोट और रसीद लिखकर गणेश को दी थी। यही दस्तावेज बाद में कोर्ट में सबसे अहम सबूत साबित हुए।
वादी गणेश के मुताबिक, रुपये लेने के बाद मुकेश ने न तो मूल रकम लौटाई और न ही ब्याज का भुगतान किया। जुलाई 2021 तक ब्याज जोड़ने पर कुल बकाया रकम 5 लाख 10 हजार रुपये पहुंच गई थी। कई बार मांग करने और समझाने के बाद भी जब पैसा वापस नहीं मिला तो गणेश ने अपने वकील के जरिए 16 अगस्त 2021 को कानूनी नोटिस भेजा।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नोटिस मिलने के बावजूद मुकेश कोर्ट में पेश नहीं हुआ और उसने मामले का विरोध भी नहीं किया। इसके बाद नवंबर 2024 में उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई शुरू की गई। वादी पक्ष ने दस्तावेज और गवाह पेश किए जिन्हें अदालत ने सही माना।
कोर्ट ने माना कि ब्याज देने की सहमति थी लेकिन 24 प्रतिशत की बजाय 9 प्रतिशत सालाना ब्याज को उचित माना। अब प्रतिवादी को चार महीने के भीतर 3 लाख रुपये और ब्याज सहित पूरी रकम लौटानी होगी।
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गांव बलाहा कलां निवासी गणेश ने अदालत में दायर याचिका में बताया कि उसने 1 सितंबर 2018 को मुकेगांव गोठड़ी निवासी मुकेश कुमार को 3 लाख रुपये उधार दिए थे। दोनों के बीच 24 प्रतिशत सालाना ब्याज तय हुआ था। रुपये लेते समय मुकेश ने प्रोनोट और रसीद लिखकर गणेश को दी थी। यही दस्तावेज बाद में कोर्ट में सबसे अहम सबूत साबित हुए।
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वादी गणेश के मुताबिक, रुपये लेने के बाद मुकेश ने न तो मूल रकम लौटाई और न ही ब्याज का भुगतान किया। जुलाई 2021 तक ब्याज जोड़ने पर कुल बकाया रकम 5 लाख 10 हजार रुपये पहुंच गई थी। कई बार मांग करने और समझाने के बाद भी जब पैसा वापस नहीं मिला तो गणेश ने अपने वकील के जरिए 16 अगस्त 2021 को कानूनी नोटिस भेजा।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि नोटिस मिलने के बावजूद मुकेश कोर्ट में पेश नहीं हुआ और उसने मामले का विरोध भी नहीं किया। इसके बाद नवंबर 2024 में उसके खिलाफ एकपक्षीय कार्रवाई शुरू की गई। वादी पक्ष ने दस्तावेज और गवाह पेश किए जिन्हें अदालत ने सही माना।
कोर्ट ने माना कि ब्याज देने की सहमति थी लेकिन 24 प्रतिशत की बजाय 9 प्रतिशत सालाना ब्याज को उचित माना। अब प्रतिवादी को चार महीने के भीतर 3 लाख रुपये और ब्याज सहित पूरी रकम लौटानी होगी।