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Mahendragarh-Narnaul News: रिश्तों की डोर हो रही कमजोर, दूसरों पर जता रहे ज्यादा विश्वास

Fri, 18 Apr 2025 11:29 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Fri, 18 Apr 2025 11:29 PM IST
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The bond of relationships is getting weaker, people are showing more trust in others
संवाद न्यूज एजेंसी
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नारनौल। अब धीरे-धीरे रिश्तों की डोर कमजोर होती जा रही है या फिर अपनों पर विश्वास कम होता जा रहा है। यही वजह है कि जनवरी 2025 से 15 अप्रैल तक जिले के सभी थानों में गुमशुदगी की 152 शिकायतें मिली है। इसमें सबसे ज्यादा युवतियों व महिलाओं की गुमशुदगी की शिकायत दी गई है। कुछ ऐसी भी शिकायतें होती हैं जिसमें युवती प्रेमी से शादी करने के लिए बिना बताए घर से गई होती हैं।
152 शिकायतों में 111 महिलाओं और 41 पुरुषों की गुमशुदगी की परिजनों ने पुलिस में शिकायत दी है। हालांकि इनमें अधिकतर मामलों में पुलिस गुमशुदा की तलाश कर चुकी है। आकड़ों पर नजर डालें तो जिले में प्रतिदिन एक युवती व विवाहिता घर से लापता हो रही है। इनमें कुछ मामलों में युवती किसी के साथ शादी करने के लिए परिजनों को बिना बताए घर से गई हैं। इसके बाद परिजन पुलिस में शिकायत देने पहुंचे। ऐसे ही कुछ मामले बीते वर्षों में सामने आए हैं, जहां पर युवती ने पहले तो परिवार के सदस्याें के खिलाफ जाकर शादी कर ली और बाद में उन्हें पहचाने से मना कर दिया।
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जिले में वर्ष 2024 में करीब 500 गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए थे। इस वर्ष भी गुमशुदगी के ज्यादा मामले महिलाओं के थे। वहीं वर्ष 2023 में भी पांच सौ अधिक गुमशुदगी के मामले सामने आए थे। पहले जिन परिवारों में चाचा-ताऊ, नाना-नानी, दादी-दादा, बुआ-फूफा जैसे रिश्ते आत्मीयता और सहयोग की मिसाल होते थे, आज वे रिश्ते सिर्फ नाममात्र के रह गए हैं। घरों में अब न संयुक्तता है, न सामंजस्य। भावनात्मक जुड़ाव की जगह स्वार्थ और स्वतंत्रता ने ले ली है। संवाद
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जनवरी से 15 अप्रैल तक दर्ज हुए गुमशुदगी के मामले दर्ज

थाना महिला पुरुष

सदर कनीना 9 01

सिटी कनीना 6 04
सिटी नारनौल 23 09
सदर नारनौल 15 04
सिटी महेंद्रगढ़ 11 05
सदर महेंद्रगढ़ 10 07
अटेली 12 03
सतनाली 11 03
नांगल चौधरी 08 02
निजामपुर 06 04



वर्जन:


पहले संयुक्त परिवार होता था, अब एकाकी परिवार हो गया है। इसके चलते बच्चों को बेहतर संस्कार मिल पा रहे हैं। वहीं अब मोबाइल भी बच्चों पर हावी हो गया है। इसके अलावा माता-पिता भी बच्चों को उचित समय नहीं दे पाते हैं। इसकी वजह कई बार बच्चे रास्ता भटक जाते हैं।-डॉ. अनिल यादव, मनोचिकित्सक नागरिक अस्पताल नारनौल।
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