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Mahendragarh-Narnaul News: बहुत खराब श्रेणी में पहुंचा जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक
Tue, 07 Nov 2023 12:10 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 07 Nov 2023 12:10 AM IST
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सुबह के सामय नारनौल शहर के आसमान में छाया स्माॅग।
नारनौल। राजधानी दिल्ली की तरह धीरे-धीरे जिले की हवा जहरीली होती जा रही है। सोमवार को जिला महेंद्रगढ़ में सुबह के समय नारनौल का वायु गुणवत्ता सूचकांक 349, अटेली 350, कनीना 353, नांगल चौधरी 360 व सतनाली 330 पर रहा, जोकि बहुत खराब श्रेणी में माना जाता है। दिनोंदिन बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते सांस के मरीजों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा आंखों में जलन जैसी समस्याएं लोगों में बढ़ने लगी है। वहीं दीपावली पर्व पर पटाखों के कारण यह समस्या और अधिक गंभीर हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञ और पर्यावरणविद डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि जिला का वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया है। इससे जिले की आबोहवा जहरीली होती जा ही है। वर्तमान परिदृश्य में जिला में वातावरण में नमी, धुआं और धूल-कण से मिलकर बना स्मॉग आमजन के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। वहीं हरियाणा एनसीआर दिल्ली में मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है, क्योंकि एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर सक्रिय था जो रविवार रात को आगे निकल गया है। इससे हवाओं दिशा में बदलाव से इलाके के वायु गुणवत्ता सूचकांक में आंशिक सुधार हुआ है।
आने वाले दिनों में दो और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ पहला 7 नवंबर और दूसरा 10 नवंबर को उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर सक्रिय होने से एक बार फिर से आंशिक बादलवाही देखने को मिलेगी। वर्तमान प्रदूषण को देखते हुए अगले 15-20 दिनों का समय काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि दीपावली त्योहारी सीजन और पटाखों के कारण प्रदूषण के स्तर के और भी बढ़ने की आशंका है। इसलिए बचाव के उपायों को लेकर आमजन को अभी से सावधान और सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि रविवार शाम के समय संपूर्ण भारत में सबसे ज्यादा दस प्रदूषित स्थानों में नारनौल की स्थिति आठवें स्थान पर रही। जिसकी वजह से सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 381 हो गया। जोकि पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा खराब स्थिति में रहा। प्रदूषण और धुआं, धुंध और धूल ने सूर्य देव की चमक को भी मंद कर दिया है।
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मौसम विशेषज्ञ और पर्यावरणविद डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि जिला का वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गया है। इससे जिले की आबोहवा जहरीली होती जा ही है। वर्तमान परिदृश्य में जिला में वातावरण में नमी, धुआं और धूल-कण से मिलकर बना स्मॉग आमजन के लिए परेशानी का सबब बन रहा है। वहीं हरियाणा एनसीआर दिल्ली में मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है, क्योंकि एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर सक्रिय था जो रविवार रात को आगे निकल गया है। इससे हवाओं दिशा में बदलाव से इलाके के वायु गुणवत्ता सूचकांक में आंशिक सुधार हुआ है।
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आने वाले दिनों में दो और कमजोर पश्चिमी विक्षोभ पहला 7 नवंबर और दूसरा 10 नवंबर को उत्तरी पर्वतीय क्षेत्रों पर सक्रिय होने से एक बार फिर से आंशिक बादलवाही देखने को मिलेगी। वर्तमान प्रदूषण को देखते हुए अगले 15-20 दिनों का समय काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि दीपावली त्योहारी सीजन और पटाखों के कारण प्रदूषण के स्तर के और भी बढ़ने की आशंका है। इसलिए बचाव के उपायों को लेकर आमजन को अभी से सावधान और सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि रविवार शाम के समय संपूर्ण भारत में सबसे ज्यादा दस प्रदूषित स्थानों में नारनौल की स्थिति आठवें स्थान पर रही। जिसकी वजह से सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार रविवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक 381 हो गया। जोकि पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा खराब स्थिति में रहा। प्रदूषण और धुआं, धुंध और धूल ने सूर्य देव की चमक को भी मंद कर दिया है।
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