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प्रॉपर्टी को आईडी मिलने के बाद घरों के बाहर लगेंगे क्यूआर कोड
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नगर परिषद शहर में नए सिरे से प्रॉपर्टी का सर्वे करा रहा है। जिससे नप क्षेत्र में वास्तविक प्रॉपर्टी के बारे में जानकारी मिल सके। इसके साथ ही इस बार सर्वे में जीआईएस और ड्रोन की मदद ली जा रही है। शहर में करीब 50 फीसदी सर्वे कार्य हो चुका है। योजना के अनुसार सभी प्रॉपर्टी को एक आईडी नंबर दिया जाएगा। इसके बाद घरों के बाहर क्यूआर कोड की प्लेट लगाई जाएगी। इससे आम लोगों के साथ नप को टैक्स कलेक्शन में सहूलियतें मिलेगी।
बता दें कि नगर परिषद ने साल 2012-13 में प्रॉपर्टी का सर्वे कराया था। इसके बाद अब काफी संख्या में मकान और दुकानें बन गई। लेकिन, इसका रिकार्ड नप के पास नहीं है। ऐसे में टैक्स कलेक्शन में नप को परेशानी होती व राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसके देखते हुए एक एजेंसी की मदद से जीआईएस और ड्रोन के जरिए सर्वे कराया जा रहा है, ताकि हर प्रकार की प्रॉपर्टी की जानकारी लेकर डिजिटल किया जा सके। इस कार्य को शुरू हुए करीब चार माह हो गया है और करीब 50 फीसदी कार्य हो चुका है। हालांकि पहले लोग सर्वे टीम को प्रॉपर्टी से संबंधित जानकारी नहीं देने में आनाकानी कर रहे थे। इसके बाद नप ने सर्वे वाली मोहल्ले में लोगों को मुनादी कर जानकारी दी। इसके बाद अब कार्य जोर पकड़ा है। नप के अधिकारियों के अनुसार शहर की सभी प्रॉपर्टी को एक आईडी दी जाएगी। इसके बाद उस प्रॉपर्टी का सारा रिकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा।
योजना है कि इसके बाद सभी घरों पर एक प्लेट लगाई जाएगी। इसमें प्रॉपर्टी का पूरा ब्योरा होगा। जिसे क्यूआर कोड़ की मदद से ऑनलाइन देखा जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे नप के साथ आम लोगों को भी अपने प्रॉपर्टी की जानकारी मिल सकेगी। बता दें कि अभी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 38 हजार प्रॉपर्टीज है।
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तीन चरण में होगा सर्वे
नप के टैक्स इंस्पेक्टर वैभव शर्मा ने बताया कि पहले डोर-डोर सर्वे हो रहा है। इसके बाद प्रॉपर्टी आईडी के रुप में क्यूआर लगाएं जाएगे। उन्होंने कहा कि लोग मोबाइल से क्यूआर कोड़ स्कैन कर जानकारी ले सकेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सर्वे टीम प्लॉट की साइज, पानी का बिल, सीवर का बिल, रजिस्ट्री की कापी, किराएदार के बारे में, दुकान के लाइसेंस और पहले जमा हुए हाउस टैक्स समेत अन्य जानकारी दें।
क्या है क्यूआर कोड
यूआर कोड में का मतलब क्विक रिस्पांस होता है। दरअसल इन्हें क्विकली रीड करने के लिए बनाया गया है। इसलिए इन्हें क्यूआर कोड कहा जाता है। क्यूआर कोड रीडर या फिर स्मार्टफोन के जरिए पढ़ा जाता है। सीधे साइट पर जा सकते हैं, जहां पर अधिक उपलब्ध होती है।
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बता दें कि नगर परिषद ने साल 2012-13 में प्रॉपर्टी का सर्वे कराया था। इसके बाद अब काफी संख्या में मकान और दुकानें बन गई। लेकिन, इसका रिकार्ड नप के पास नहीं है। ऐसे में टैक्स कलेक्शन में नप को परेशानी होती व राजस्व का नुकसान हो रहा है। इसके देखते हुए एक एजेंसी की मदद से जीआईएस और ड्रोन के जरिए सर्वे कराया जा रहा है, ताकि हर प्रकार की प्रॉपर्टी की जानकारी लेकर डिजिटल किया जा सके। इस कार्य को शुरू हुए करीब चार माह हो गया है और करीब 50 फीसदी कार्य हो चुका है। हालांकि पहले लोग सर्वे टीम को प्रॉपर्टी से संबंधित जानकारी नहीं देने में आनाकानी कर रहे थे। इसके बाद नप ने सर्वे वाली मोहल्ले में लोगों को मुनादी कर जानकारी दी। इसके बाद अब कार्य जोर पकड़ा है। नप के अधिकारियों के अनुसार शहर की सभी प्रॉपर्टी को एक आईडी दी जाएगी। इसके बाद उस प्रॉपर्टी का सारा रिकार्ड ऑनलाइन उपलब्ध होगा।
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योजना है कि इसके बाद सभी घरों पर एक प्लेट लगाई जाएगी। इसमें प्रॉपर्टी का पूरा ब्योरा होगा। जिसे क्यूआर कोड़ की मदद से ऑनलाइन देखा जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे नप के साथ आम लोगों को भी अपने प्रॉपर्टी की जानकारी मिल सकेगी। बता दें कि अभी नगर परिषद क्षेत्र में कुल 38 हजार प्रॉपर्टीज है।
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तीन चरण में होगा सर्वे
नप के टैक्स इंस्पेक्टर वैभव शर्मा ने बताया कि पहले डोर-डोर सर्वे हो रहा है। इसके बाद प्रॉपर्टी आईडी के रुप में क्यूआर लगाएं जाएगे। उन्होंने कहा कि लोग मोबाइल से क्यूआर कोड़ स्कैन कर जानकारी ले सकेंगे। उन्होंने लोगों से अपील की है कि सर्वे टीम प्लॉट की साइज, पानी का बिल, सीवर का बिल, रजिस्ट्री की कापी, किराएदार के बारे में, दुकान के लाइसेंस और पहले जमा हुए हाउस टैक्स समेत अन्य जानकारी दें।
क्या है क्यूआर कोड
यूआर कोड में का मतलब क्विक रिस्पांस होता है। दरअसल इन्हें क्विकली रीड करने के लिए बनाया गया है। इसलिए इन्हें क्यूआर कोड कहा जाता है। क्यूआर कोड रीडर या फिर स्मार्टफोन के जरिए पढ़ा जाता है। सीधे साइट पर जा सकते हैं, जहां पर अधिक उपलब्ध होती है।