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संक्रमण काल में पशुओं की करें विशेष देखभाल
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पशु पालन व्यवसाय को अधिक लाभदायक बनाने के लिए पशु पालकों को अपने पशुओं की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता है। यह सीजन भैंसों के ब्यांत का सीजन है ऐसे में किसानों को अपने पशुओं की विशेष देखभाल की आवश्यकता है। पशुओं की उचित देखरेख के अभाव में पशुपालन व्यवसाय घाटे का सौदा साबित होता है लेकिन सही देखभाल कर पशुपालक इस व्यवसाय से अधिक लाभ ले सकते हैं। इस समय जिला में 251055 पशु हैं जिसमें महेंद्रगढ़ क्षेत्र में गाय 26726 व 54250 भैंस, कनीना में 12462 गाय व 33147 भैंस तथा नारनौल में 24748 गाय व 99722 भैंस हैं। पशुपालक दूध उत्पादन के मामले में जिला विशेष स्थान रखता है।
ब्यांत के 21 दिन पहले व 21 दिन बाद होता है संक्रमण काल
पूर्व उप निदेशक पशु पालन विभाग हरियाणा, डॉ. दयाराम यादव ने बताया कि ब्यांत से 21 दिन पहले एवं 21 दिन बाद संक्रमण काल होता है। इस दौरान पशु की खुराक से लेकर अन्य प्रकार की देखभाल से पशु पालक अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने बताया कि महेंद्रगढ़ जिले में अनेक पशुओं में समय पर ग्याभिन न होना, बार-बार फिराव पड़ना, अधूरा बच्चा देना, दिखावा करना, लेवटी का टेढ़ापन, सुनपात में आना, कम समय दूध देना आदि समस्या प्रमुख हैं जो पशु पालन को घाटे का सौदा बनाती हैं। लेकिन इनसे बचाव के लिए पशु को उचित खुराक देकर पशुपालन से अच्छा लाभ ले सकेंगे।
संक्रमण काल के दौरान उचित खुराक
क्षेत्र के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक महेंद्रगढ़ निवासी 80 वर्षीय डॉ. दयाराम यादव ने बताया कि संक्रमण काल के दौरान पशु को विटामिन व मिनरल (खनिज मिश्रण) देना चाहिए। ब्यांत के दो माह पूर्व कटड़े एवं बछड़े का 60 प्रतिशत वजन बढ़ता है तथा वह पूरी खुराक अपनी मां से लेता है। ऐसे में पशु को पूरी खुराक देनी चाहिए। इस दौरान ढाई से तीन किलोग्राम चाट जिसमें गेहूं का दलिया, मक्का, बिनोला, सरसों या मूंगफली की खल, बाइपास फेट, 50 से 100 ग्राम खनिज मिश्रण, हरा चारा दें। यह खुराक संतुलित खुराक है इससे पशुओं में किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होगी तथा दूध उत्पादन भी अच्छा होगा।
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ब्यांत के 21 दिन पहले व 21 दिन बाद होता है संक्रमण काल
पूर्व उप निदेशक पशु पालन विभाग हरियाणा, डॉ. दयाराम यादव ने बताया कि ब्यांत से 21 दिन पहले एवं 21 दिन बाद संक्रमण काल होता है। इस दौरान पशु की खुराक से लेकर अन्य प्रकार की देखभाल से पशु पालक अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने बताया कि महेंद्रगढ़ जिले में अनेक पशुओं में समय पर ग्याभिन न होना, बार-बार फिराव पड़ना, अधूरा बच्चा देना, दिखावा करना, लेवटी का टेढ़ापन, सुनपात में आना, कम समय दूध देना आदि समस्या प्रमुख हैं जो पशु पालन को घाटे का सौदा बनाती हैं। लेकिन इनसे बचाव के लिए पशु को उचित खुराक देकर पशुपालन से अच्छा लाभ ले सकेंगे।
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संक्रमण काल के दौरान उचित खुराक
क्षेत्र के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक महेंद्रगढ़ निवासी 80 वर्षीय डॉ. दयाराम यादव ने बताया कि संक्रमण काल के दौरान पशु को विटामिन व मिनरल (खनिज मिश्रण) देना चाहिए। ब्यांत के दो माह पूर्व कटड़े एवं बछड़े का 60 प्रतिशत वजन बढ़ता है तथा वह पूरी खुराक अपनी मां से लेता है। ऐसे में पशु को पूरी खुराक देनी चाहिए। इस दौरान ढाई से तीन किलोग्राम चाट जिसमें गेहूं का दलिया, मक्का, बिनोला, सरसों या मूंगफली की खल, बाइपास फेट, 50 से 100 ग्राम खनिज मिश्रण, हरा चारा दें। यह खुराक संतुलित खुराक है इससे पशुओं में किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होगी तथा दूध उत्पादन भी अच्छा होगा।
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