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Tokyo Olympic 2021: मेले में 50 रुपये की कुश्ती करने वाला पहुंचा ओलंपिक, पिता को उम्मीद-म्हारो संदीप सोना जीतेगो
Fri, 23 Jul 2021 03:19 PM IST
निवेदिता वर्मा
प्रदीप शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल (हरियाणा)
प्रदीप शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल (हरियाणा)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 23 Jul 2021 03:19 PM IST
सार
संदीप पुनिया लगभग आठ महीने से वे बंगलुरू भारतीय खेल प्राधिकरण में अभ्यास कर रहे हैं। नवंबर माह में वह आखिरी बार अपने गांव सुरेहती जाखल आए थे।
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टोक्यो ओलंपिक 2021: संदीप पुनिया
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
म्हारो संदीप खेला में सोना जीतेगो... यह उम्मीद महेंद्रगढ़ के गांव सुरेहती जाखल के संदीप पुनिया के पिता प्रीतम ने जताई है। देश के नंबर वन रेसवॉकर संदीप पुनिया वॉकिंग में दूसरी बार देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस बार क्षेत्रवासियों को स्वर्ण पदक की उम्मीद है। 30 जुलाई की रात को दिल्ली एयरपोर्ट से जापान की राजधानी टोक्यो के लिए रवाना होंगे। वहां पर खेल गांव में 5 अगस्त को उनका मैच होगा। भारतीय समय अनुसार यह मैच एक बजे और जापान के समय अनुसार यह मैच शाम साढ़े पांच बजे शुरू होगा।
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ओलंपिक में स्वर्ण जीतकर लाने के लिए घर वाले संदीप पुनिया को पूरा प्रोत्साहित कर रहे हैं। तपती दोपहरी में खेती का काम एवं बकरी चराने के बाद भी संदीप के 65 वर्षीय बुजुर्ग पिता अपने बेटे को सप्ताह में दो तीन बार फोन कर लेते हैं। संदीप ने बताया कि उसके पिता ने कहा है कि स्वास्थ्य का ध्यान रखना, आत्मविश्वास रखना और अपना बेस्ट करके दिखाना। ये तीनों चीजें होने पर उसको जरूर स्वर्ण मिलेगा। यह चर्चा उसके पिता गांव में भी करते रहते हैं और ग्रामीणों को भी संदीप से यही उम्मीद है। इसके अलावा ग्रामीण भी व्हाटसएप कर संदीप को अग्रिम बधाई दे रहे हैं। संदीप पुनिया ने बताया कि उसकी जाट रेजीमेंट के अधिकारी भी उसको बहुत प्रोत्साहित करते हैं।
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संदीप पुनिया लगभग आठ महीने से वे बंगलुरू भारतीय खेल प्राधिकरण में अभ्यास कर रहे हैं। नवंबर माह में वह आखिरी बार अपने गांव सुरेहती जाखल आए थे। उसके बाद से वे घर नहीं आए हैं। अब फोन भी इतनी बात नहीं करते, केवल सप्ताह में एक बार रविवार को वह अपने परिजनों और पत्नी से बात करते हैं। उस समय भी केवल दस से 15 मिनट की बात हो पाती है।
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गांव के मेलों में 50 से 100 रुपये की कुश्ती लड़ने वाले संदीप पुनिया टोक्यो ओलंपिक खेलों में 20 किलोमीटर रेसवॉकर में अपना दम दिखाएंगे। संदीप भारतीय खेल प्राधिकरण बंगलुरू में प्रतिदिन 35 से 40 किलोमीटर चलकर निरंतर अभ्यास कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने की वजह से बचपन से उनको संघर्ष करना पड़ा है। मात्र सात वर्ष की उम्र में मां का साया सिर से उठ गया। घर में कोई रोजगार नहीं था पशुपालन एवं खेती कर घर का गुजारा चला रहे थे।
संदीप पुनिया ने बताया कि वे दिन में दो एकड़ जमीन ऊंट से जोत देते थे। फसल कटाई के समय भी वे परिवार की पूरी सहायता करते थे। स्कूल से आने के बाद अधिकतर समय उनका खेत में ही बीतता था।थोड़ा बहुत कुश्ती करना जानते थे तो गांवों के मेलों में 50 से 100 रुपये की कुश्ती करते। जो पैसे आते उससे घर खर्च चलता। 2006 में राव तुलाराम खेल स्टेडियम में ओपन भर्ती में उनका चयन हो गया। उसके बाद वहां उनकी मुलाकात रेसवॉकर कोच से हुई। उन्होंने ही संदीप के रेसवॉक के लिए तैयार किया।