{"_id":"68b7325ca4ace2157903c75e","slug":"studying-is-not-just-a-means-to-pass-exams-dr-jitendra-narnol-news-c-196-1-nnl1004-129144-2025-09-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं : डॉ. जितेंद्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं : डॉ. जितेंद्र
Tue, 02 Sep 2025 11:37 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Tue, 02 Sep 2025 11:37 PM IST
विज्ञापन
फोटो 3डॉ. जितेंद्र भारद्वाज।
नारनौल। हरियाणा राज्य शिक्षक पुरस्कार से 2022 में सम्मानित डॉ. जितेंद्र भारद्वाज केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कार और जीवन की सही दिशा भी प्रदान कर रहे हैं।
हरियाणा राज्य शिक्षक पुरस्कार के साथ उन्हें एक लाख रुपये की नकद राशि, प्रशस्ति पत्र, शॉल, रजत पदक और दो वेतन वृद्धि प्रदान की गई। पुरस्कार उत्कृष्ट शैक्षणिक परिणामों, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, विद्यालय सुंदकरीकरण और समाज उत्थान में सक्रिय योगदान की स्वीकृति है। इससे पूर्व उन्हें शिक्षक के रूप में श्रेष्ठ कार्य करने पर जिला शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन सहित कई संगठनों द्वारा कई बार सम्मानित किया गया।
नारनौल क्षेत्र से जुड़े डॉ. भारद्वाज वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कांवी में अंग्रेजी प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने शिक्षा, नवाचार, साहित्य और सामाजिक अभियानों में अपनी उल्लेखनीय छाप छोड़ी है। डॉ. भारद्वाज का मानना है कि पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, रचनात्मकता और जीवन मूल्यों को विकसित करने का माध्यम है।
विज्ञापन
वे विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, सोचने और अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनका दृष्टिकोण यह है कि हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है, बस उसे सही दिशा और अवसर की आवश्यकता है। डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने शिक्षा के साथ समाज को जागरूक करने का बीड़ा भी उठाया।
वह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रबल समर्थक रहे हैं और उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर एवं जागरूक बनाने के लिए लगातार काम किया। वें प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट, भारत विकास परिषद आदि संस्थाओं के माध्यम से शिक्षा एवं समाज की सेवा में भी कार्यरत हैं। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी पौधरोपण और स्वच्छता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को प्रेरित करते रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने अपनी कविता, गीत और रागनियों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाई है।
डॉ. भारद्वाज केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि साहित्यकार भी हैं। उनकी कविताएं और लेख समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। उनकी एक पुस्तक अंग्रेजी कविताओं का संग्रह ए पीस ऑफ स्काई जो मानवीय रिश्ते एवं मूल्यों के संदर्भ में बेहतर संदेश देती है। इसके अलावा उन्होंने तीन शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं।
इंसेट
यह रहा उनका तक सफर :
डॉ. भारद्वाज लगभग 25 वर्ष पूर्व एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए तत्पश्चात टीजीटी एवं प्राध्यापक के रूप में विभाग में पदोन्नत हुए। उन्होंने लगभग आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों में सेवाएं दीं। अभी वे कांवी विद्यालय में कार्यरत हैं। शैक्षणिक योग्यता की दृष्टि से भी वे विशिष्ट हैं।
विज्ञापन
हरियाणा राज्य शिक्षक पुरस्कार के साथ उन्हें एक लाख रुपये की नकद राशि, प्रशस्ति पत्र, शॉल, रजत पदक और दो वेतन वृद्धि प्रदान की गई। पुरस्कार उत्कृष्ट शैक्षणिक परिणामों, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, विद्यालय सुंदकरीकरण और समाज उत्थान में सक्रिय योगदान की स्वीकृति है। इससे पूर्व उन्हें शिक्षक के रूप में श्रेष्ठ कार्य करने पर जिला शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन सहित कई संगठनों द्वारा कई बार सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
नारनौल क्षेत्र से जुड़े डॉ. भारद्वाज वर्तमान में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कांवी में अंग्रेजी प्राध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने शिक्षा, नवाचार, साहित्य और सामाजिक अभियानों में अपनी उल्लेखनीय छाप छोड़ी है। डॉ. भारद्वाज का मानना है कि पढ़ाई केवल परीक्षा पास करने का साधन नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, रचनात्मकता और जीवन मूल्यों को विकसित करने का माध्यम है।
विज्ञापन
वे विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, सोचने और अपनी क्षमताओं को पहचानने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उनका दृष्टिकोण यह है कि हर बच्चे में कोई न कोई प्रतिभा अवश्य होती है, बस उसे सही दिशा और अवसर की आवश्यकता है। डॉ. जितेंद्र भारद्वाज ने शिक्षा के साथ समाज को जागरूक करने का बीड़ा भी उठाया।
वह बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के प्रबल समर्थक रहे हैं और उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर एवं जागरूक बनाने के लिए लगातार काम किया। वें प्रगतिशील शिक्षक ट्रस्ट, भारत विकास परिषद आदि संस्थाओं के माध्यम से शिक्षा एवं समाज की सेवा में भी कार्यरत हैं। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी पौधरोपण और स्वच्छता कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को प्रेरित करते रहे हैं। इस संदर्भ में उन्होंने अपनी कविता, गीत और रागनियों के माध्यम से समाज में जागरूकता फैलाई है।
डॉ. भारद्वाज केवल शिक्षक ही नहीं बल्कि साहित्यकार भी हैं। उनकी कविताएं और लेख समय-समय पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। उनकी एक पुस्तक अंग्रेजी कविताओं का संग्रह ए पीस ऑफ स्काई जो मानवीय रिश्ते एवं मूल्यों के संदर्भ में बेहतर संदेश देती है। इसके अलावा उन्होंने तीन शोध पत्र भी प्रकाशित किए हैं।
इंसेट
यह रहा उनका तक सफर :
डॉ. भारद्वाज लगभग 25 वर्ष पूर्व एक प्राथमिक शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए तत्पश्चात टीजीटी एवं प्राध्यापक के रूप में विभाग में पदोन्नत हुए। उन्होंने लगभग आधा दर्जन से अधिक विद्यालयों में सेवाएं दीं। अभी वे कांवी विद्यालय में कार्यरत हैं। शैक्षणिक योग्यता की दृष्टि से भी वे विशिष्ट हैं।