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Mahendragarh-Narnaul News: राजकीय स्कूलों में किताबें नहीं पहुंचने से बाधित हो रही छात्रों की पढ़ाई

Thu, 03 Apr 2025 11:38 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Thu, 03 Apr 2025 11:38 PM IST
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Students' studies are getting disrupted due to non-availability of books in government schools
फोटो नंबर-11शहर के एक राजकीय स्कूल में बैठे विद्यार्थी। संवाद
नारनौल। राजकीय स्कूलों में परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद अब शैक्षणिक शिक्षा सत्र 2025-26 की एक अप्रैल से कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं। विभाग द्वारा एक ओर जहां प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है। वहीं अभी तक छात्रों के लिए किताबें नहीं पहुंची हैं।
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शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा पहली से आंठवीं तक के बच्चों को निशुल्क किताबें उपलब्ध करवाई जाती हैं। यह किताबें विभाग द्वारा मार्च के दूसरे सप्ताह तक आ जानी चाहिए थी, लेकिन अप्रैल शुरू हो जाने के बाद अभी तक स्कूलों में नहीं पहुंची हैं। किताबों के समय पर नहीं पहुंचने से बच्चों की पढ़ाई में दिक्कत आ रही हैं। वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना हैं कि इस बार कुछ कक्षाओं का सिलेबस बदला गया है। इस कारण यह दिक्कत हो रही है।
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वहीं शिक्षा विभाग द्वारा पास आउट विद्यार्थियों की किताबें नए विद्यार्थियों को देकर पढ़ाई करवाए जाने की बात कही जा रही है। इसके लिए विभाग द्वारा विद्यार्थियों से किताबें एकत्रित की गई है, लेकिन सभी विद्यार्थियों को किताबें उपलब्ध करवाना मुश्किल लग रहा है। इस प्रकार अधिकांश विद्यार्थियों को नई किताबों के आने का इंतजार करना पड़ेगा।
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इंसेट

33 हजार विद्यार्थी राजकीय स्कूलों में कर रहे हैं पढ़ाई
प्रदेश सरकार भले ही सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को निजी स्कूलों की भांति आधुनिक सुविधाएं देने का दावा कर रही है, जिसके लिए सरकार द्वारा शिक्षा के नाम करोड़ों रुपये का बजट निर्धारित करती है, लेकिन समय पर सुविधाओं के नहीं मिलने से यह धरातल पर खोखली नजर आती है। जिले में बात की जाए तो करीब 457 राजकीय प्राथमिक स्कूल व 111 मिडिल स्कूल हैं। इन राजकीय स्कूलों में 33 हजार के करीब विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

वर्जन-
नया शैक्षणिक सत्र की एक अप्रैल से शुरू हो गया है। अभी किताबों के आने में कुछ समय इसलिए लग रहा क्योंकि कुछ कक्षाओं के सिलेबस में बदलवा किया जा रहा। छात्राें की पढ़ाई बाधित न हो इसके लिए पास-आउट विद्यार्थियों की किताबें नए बच्चों को देकर पढ़ाई करवाई जा रही है। नई किताबें करने के प्रयास किए जा रहे हैं। -सुभाष सामरिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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