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Mahendragarh-Narnaul News: हकेंवि के ऑनलाइन फीस गेटवे में गबन के मामले की जांच को लेकर विद्यार्थी भी कूदे मैदान में

Wed, 22 Nov 2023 12:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Wed, 22 Nov 2023 12:04 AM IST
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Students also jumped into the fray to investigate the case of embezzlement in Hakanvi's online fee gateway.
महेंद्रगढ़। हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के ऑनलाइन फीस गेटवे के साथ गड़बड़ी करने लाखों रुपये के गबन के मामले में जांच की मांग को लेकर अब विवि के विद्यार्थी भी मैदान में कूद पड़े हैं। मंगलवार को विद्यार्थियों ने सम कुलपति को कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपकर जल्द जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों व इस मामले में संलिप्तों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही विद्यार्थियों ने जल्द जांच नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी भी विवि प्रशासन को दी है।
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विद्यार्थियों की ओर से सम कुलपति प्रो. सुषमा यादव को सौंपे ज्ञापन में पांच मुख्य बिदुओं पर जांच की मांग उठाई है। विद्यार्थी राकेश, अजीत, सुमित, नवीन, संदीप, रिंकू, कुनाल, महेश, अंकित, विपिन, राहुल, चिराग, मंजीत, संजीव व अंकित ने बताया कि विवि में दो वर्ष पूर्व सिस्टम एनॉलिस्ट के पद पर संविदा पर कार्यरत अजय निवासी जाट को गेटवे से गड़बड़ी कर विद्यार्थियों द्वारा जमा कराई गई फीस का गबन किया गया है। आरोपी अजय के खिलाफ गत 17 नवंबर को सदर थाना महेंद्रगढ़ में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस द्वारा आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों का कहना है कि इस मामले में कुल सचिव प्रो. सुनील कुमार द्वारा मामले का खुलासा किया गया तो विवि प्रशासन की ओर से उसे भी निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
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विद्यार्थी बोले- इन पांच बिंदुओं की हो जांच
विद्यार्थियों की मांग है कि हकेविवि में सिस्टम एनॉलिस्ट जैसे संवेदनशील पद पर संंविदात्मक नियुक्ति विवि के किस नियम के आधार पर की गई है। इसमें अगर किसी नियम की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं दूसरे बिंदु के अनुसार हकेंवि प्रबंधन पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि विवि की ऑनलाइन फीस पेमेंट गेटवे को बिना जांच किए वेबसाइट पर फीस जमा कराने के लिए क्यों खोला गया। इस मामले में जिम्मेदारों द्वारा बरती गई लापरवाही की जांच कर कार्रवाई की जाए। साथ ही आरोपी के साथ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत की भी जांच कर कार्रवाई की जाए। चौथे बिंदु में विद्यार्थियों ने इस पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले वित्त अधिकारी को पद से हटाने की मांग उठाई। वहीं इस मामले का खुलासा करने वाले तत्कालीन कुल सचिव प्रो. सुनील कुमार को बहाल करने की भी मांग उठाई गई।
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प्राथमिक जांच में खुलासा 25 से 30 लाख रुपये गबन का अंदेशा
हालांकि पुलिस की ओर से इस मामले में जांच की जा रही है। आरोपी अजय को पांच दिन के रिमांड पर लिया गया है तथा पूछताछ जारी है। वहीं विवि प्रशासन की मांनें तो प्राथमिक जांच में 25 से 30 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। हालांकि इस मामले में जांच जारी है। गबन की राशि और अधिक हो सकती है।
यह था पूरा मामला: विवि प्रशासन ने किया खुलासा
विश्वविद्यालय में सामने आए ऑनलाइन फीस पेमेंट गेटवे के साथ गड़बड़ी और विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार गुप्ता के निलंबन का मामला पूर्णतया दो अलग-अलग प्रकरण हैं। इन दोनों ही विषयों को लेकर विभिन्न सहभागियों के बीच लगातार कुछ अवांछित, पूर्वाग्रह से ग्रसित लोगों द्वारा मिथ्या एवं भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। यहां यह स्पष्ट किया जाता है कि विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार गुप्ता के निलंबन पर नियमानुसार कार्रवाई और उससे संबंधित कानूनी सलाह जो कि 8 अक्तूबर को प्राप्त हुई, के बाद 3 नवंबर को निलंबन का आदेश जारी किया गया। प्रो. सुनील कुमार गुप्ता पर कार्रवाई और ऑनलाइन फीस पेमेंट गेटवे के साथ गड़बड़ी के मामले को एक-दूसरे से जोड़कर प्रस्तुत करना पूर्णतया गलत है और ऐसा कर विश्वविद्यालय की छवि को कुछ अवांछित लोगों द्वारा नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। यहां बता दें कि इस संबंध में विश्वविद्यालय के निलंबित कुलसचिव द्वारा भी ऐसा ही एक प्रयास किया गया जिसे गंभीरता से लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनके विरुद्ध भी स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।


यहां स्पष्ट किया जाता है कि संविदा पर नियुक्त किए गए पूर्व सिस्टम एनॉलिस्ट अजय कुमार द्वारा की गई ऑनलाइन गड़बड़ी के मामले में भी विश्वविद्यालय की ओर से 8 नवंबर को प्रस्तुत शिकायत के बाद स्थानीय पुलिस द्वारा जांच की जा रही है। जांच में दोषियों पर विश्वविद्यालय प्रशासन नियमानुसार व कानून के तहत कार्रवाई के लिए कटिबद्ध है। सभी विद्यार्थियों व सहभागियों को आशवस्त करता हूं कि विश्वविद्यालय के स्तर पर विद्यार्थियों का किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन पूरी तरह से स्वच्छ व पारदर्शी प्रशासन का पक्षधर है और किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति पर कार्यरत है। विश्वविद्यालय सभी सहभागियों के समक्ष स्पष्ट कर देना चाहता है कि वह अपनी जिम्मेदारियों के प्रति पूर्णतया समर्पित है।
-प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, महेंद्रगढ़।
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