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हड़ताल पर गए लैब टेक्निशियन, मरीज बेहाल

Tue, 20 Sep 2016 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला
ब्यूरो/अमर उजाला Updated Tue, 20 Sep 2016 12:24 AM IST
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अस्पताल में लगी मरीजों की भीड़
 स्टेट लेबोट्रेरी टेक्निकल एसोसिएशन के आह्वान पर सोमवार से शुरू हुई दो  दिवसीय लैब टेक्निशियन की हड़ताल का पहले दिन मिलाजुला असर जिला में दिखाई दिया। नारनौल स्थित नागरिक अस्पताल में अन्य स्कीमों के तहत लगे कर्मचारियों ने काम तो संभाल लिया, मगर मरीजों को फिर भी परेशानी हुई। सोमवार को सिविल सर्जन कार्यालय के सामने जिलाभर के लैब तकनिशियनों ने धरना  प्रदर्शन भी किया। धरने में जिला भर के करीब 28 लैब तकनीशियनों ने भाग लिया। जहां पर उन्होंने एकत्रित होकर प्रदेश सरकार व विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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लैब तकनीशियनों की दो दिवसीय हड़ताल सोमवार से शुरू हुई। हड़ताल के पहले दिन उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया। लैब तकनीशियनों के हड़ताल पर रहने के कारण बुखार के चल रहे इस सीजन में जिलाभर के अस्पतालों में मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं विभाग की ओर से मरीजों की परेशानियों का देखते हुए  अतिरिक्त स्टाफ के सदस्यों को जांच के लिए बैठाया गया था।
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मगर फिर भी मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक परेशानियों का  सामना तो गांव से आए मरीजों को हुई। क्योंकि गांव से आए मरीजों को लैब में भीड़ होने के कारण बाहर से ही खून की जांच करवानी पड़ी। इसके चलते उनको अतिरिक्त रुपये खर्च जांच के रुपये वहन करने पड़े। वहीं निजी लैब संचालकों ने चांदी कूटी
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इस मौके पर प्रदर्शन करने वाले लैब तकनीशियनों को संबोधित  करते हुए जिला प्रधान अनिल कुमार यादव ने कहा कि सरकार की तरफ से उनको  उचित वेतनमान नहीं मिल रहा हैं। उन्होंने मलेरिया तकनीशियन को सामान्य  तकनीशियन मर्ज करने के बारे में रोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि उनको भी केंद्र सरकार के कर्मचारियों की भांति वेतनमान मिलना चाहिए।

उन्होंने बताया कि जुलाई माह में केंद्र सरकार ने लैब तकनीशियनों के कोटे में कटौती की गई हैं। जहां पर उनका वेतनमान 9300 से 34500 साथ 4200 जीपी हैं। जबकि  तकनीशियन अधिकारियों का वेतनमान 4600 जीपी है। चीफ तकनीशियन अधिकारी का  5400 जीपी हैं। साथ तकनीशियन अधिकारी व चीफ अधिकारी को केंद्र में  राजपत्रित अधिकारी का दर्जा प्राप्त हैं। जबकि हरियाणा में उनका वेतनमान  5200 से 20200 साथ में 2800 रुपये जीपी है। जोकि वेतनमान कर्मचारियों के साथ  शोषण कर रही हैं।

कंप्यूटर में दर्ज नहीं हो सका रिकार्ड
लैब तकनीशियन की हड़ताल के चलते मरीजों का डाटा सोमवार को कंप्यूटरों में दर्ज नहीं हो पाया। विदित रहे कि मरीजों का सारा का सारा डाटा विभाग के हेड कार्यालय पंचकूला में ऑनलाइन किया जाता है लेकिन हड़ताल के चलते किसी भी मरीज का डाटा आनलाइन नहीं हो पाया।

ये कर्मचारी रहे हड़ताल पर
लैब तकनीशियनों की हड़ताल में रेगुलर लैब तकनीशियनों के अलावा मुख्यमंत्री मुफ्त इलाज योजना के तहत लगे कर्मचारी शामिल हुए। इनकी संख्या करीब 28 रही।

ये नहीं रहे हड़ताल में शामिल
हड़ताल में आरएनटीसीपी, आईसीटीसी, एनआरएचएम के कर्मचारी शामिल नहीं हुए। इनकी संख्या करीब दस रही। सोमवार को इनके भरोसे ही लैब चली।

डाक्टरों ने कम लिखी जांच
लैब  तकनीशियनों की हड़ताल के कारण चिकित्सकों ने भी कम ही मरीजों को जांच के  लिए भेजा। सोमवार को नागरिक अस्पताल में ओपीडी की संख्या एक हजार रही, मगर  जांच के लिए केवल 150 लोगों को ही लैब भेजा

खराब रही सीबीसी मशीन
सीबीसी मशीन की काम देख रही नीतू ने बताया कि किसी शरारती कर्मचारी ने सुबह मशीन  की एक पाइप को निकाल दिया। जिससे मशीन साढ़े 11 बजे तक खराब रही, बाद में  उसने चैक कर वह पाइप जोड़ा। जिसके बाद ही जांच हो पाई।

वह बसीरपुर से अपने बच्चे का सीबीसी टेस्ट कराने के लिए आया है। मगर उसका टेस्ट नहीं हो  पाया। मजबूरन उसे बाहर पैसे देकर टेस्ट करना पड़ेगा। -विनोद कुमार


वह लीवर की समस्या से परेशान है। यहां टेस्ट के लिए आया था, मगर आज हड़ताल के  कारण उसका एलएफटी टेस्ट नहीं हो पाया, क्योंकि टेस्ट करने वाला कर्मी हड़ताल पर था। -महेंद्र कुमार

ईएसआर करवाना था, मगर लैब तकनीशियन न होने के कारण उसे भारी परेशानी हुई। सोमवार को टेस्ट नहीं हो पाया। अब बुधवार को ही टेस्ट हो पाएगा। -हंसराज
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