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Mahendragarh-Narnaul News: स्टेट हाईवे के गड्ढों से जल्द मिलेगी राहत, 300 करोड़ से अधिक होंगे खर्च, एक वर्ष में पूरा होगा काम

Thu, 01 Dec 2022 11:51 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 01 Dec 2022 11:51 PM IST
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State Highway potholes will get rid soon, will cost more than 300 crores, work will be completed in one year
बदहाल स्टेट हाईवे के गड्ढों से पिछले 19 सालों से परेशान महेंद्रगढ़ जिले व अन्य प्रदेशों के लोगों को अब जल्द राहत मिलने वाली है। वीरवार से स्टेट हाईवे निर्माण के लिए प्रथम चरण में गांव पालड़ी नहर के पास जिले की सीमा से लेवलिंग का काम शुरू हो गया है। अब आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं से भी निजात मिलेगी।
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एचएसआरडीसी द्वारा करीब एक माह पूर्व इसका टैंडर एजेंसी को अलॉट कर दिया था। एजेंसी द्वारा प्रथम चरण में पेचवर्क शुरू किया गया था। वहीं दो सप्ताह पूर्व माइलेज मार्किंग का भी काम पूरा किया जा चुका है। एचएसआरडीसी द्वारा इस प्रोजेक्ट के लिए 300 करोड़ से अधिक का बजट तैयार किया है। जिम्मेदारों का दावा है कि नांगल सिरोही बाईपास व रिवासा आरओबी को छोड़कर शेष काम एक वर्ष के समय में पूरा कर लिया जाएगा।
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साढ़े सात मीटर चौड़ाई के दो मार्गों के बीच होगा पांच मीटर का डिवाइडर
योजना के तहत पांच मीटर बीच के डिवाइडर के अलावा दोनों ओर से साढे़ सात मीटर के डबल लाइनों के मार्ग होंगे। वहीं पांच मीटर के डिवाइडर के अंदर फूलदार एवं आकर्षक पौधे लगाए जाएंगे। दोनों ओर करीब 25-25 फुट चौड़ाई में दो लाइनें होंगी।
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40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की 19 सालों बाद सुध ली
बता दें कि आकोदा से नारानौल तक 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की 19 सालों बाद सुध ली है। वर्ष 2003 में तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी ओमप्रकाश चौटाला की सरकार में इसका निर्माण किया था। इसके बाद साल-दर साल बदहाल होता गया। निर्माण की मांग को लेकर क्षेत्र के लोगों ने भी खूब धरने-प्रदर्शन किए और सीएम तक पत्र भेजकर गुहार लगाई। इस मार्ग को कभी राष्ट्रीय राजमार्ग तो कभी स्टेट हाईवे में कनवर्ट किया गया। वहीं पिछले 19 सालों में स्थानीय नेताओं से लेकर मुख्यमंत्री एवं उप मुख्यमंत्री द्वारा भी खूब घोषणाएं की गई। अब निर्माण शुरू होने से जिले के लोगों ने राहत की सांस ली है।

हिमाचल से राजस्थान व प्रदेश के 16 जिलों को जोड़ने में सक्षम
बता दें कि इस मार्ग से प्रदेश के 16 जिलों के साथ-साथ राजस्थान, पंजाब व हिमाचल तक आवागमन में इस मार्ग का प्रयोग होता है। वहीं प्रदेश के चरखी दादरी, भिवानी, रोहतक झज्जर, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद, करनाल, कुरुक्षेत्र, अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, पानीपत, सोनीपत व कैथल को आपस में जोड़ने के लिए मुख्य मार्ग है।
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