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Mahendragarh-Narnaul News: हरियाणवी माटी की बिखेरी महक और संस्कृति की घोली मिठास

Sat, 02 Nov 2024 11:21 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल Updated Sat, 02 Nov 2024 11:21 PM IST
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Spread the fragrance of Haryanvi soil and added the sweetness of culture
नारनौल।
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मनुमुक्त मानव मेमोरियल ट्रस्ट ने हरियाणा-दिवस के उपलक्ष्य में प्रथम वर्चुअल अंतरराष्ट्रीय हरियाणवी कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया।
राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक-कवि डॉ. जितेंद्र भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत प्रार्थना-गीत के उपरांत चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव के प्रेरक सान्निध्य तथा डॉ. पंकज गौड़ के कुशल संचालन में कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कवि-सम्मेलन में भारत, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, माॅरिशस, डेनमार्क और अमेरिका सहित छह देशों के 18 कवियों ने हरियाणवी भाषा में काव्य-पाठ किया। कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि तथा हरियाणा ग्रामीण विकास विभाग के निदेशक डॉ. जयकृष्ण आभीर ने हरियाणवी को जन-मानस की भाषा बताते हुए कहा कि इसमें माटी की महक और संस्कृति की मिठास को सहज ही अनुभव किया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि तथा हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला के निदेशक डॉ. धर्मदेव विद्यार्थी ने ट्रस्ट द्वारा हरियाणवी के विकास हेतु किये जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की। विश्व बैंक वाशिंगटन डीसी (अमेरिका) की वरिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ. एस अनुकृति ने हरियाणवी को अपनी मातृभाषा बताते हुए कहा कि प्रत्येक हरियाणा वासी को इस पर गर्व होना चाहिए। कोल इंडिया लिमिटेड के पूर्व महाप्रबंधक और वर्जीनिया (अमेरिका) से जुड़े वरिष्ठ कवि राजपाल यादव राज ने अध्यक्षीय संबोधन में हरियाणवी भाषा और संस्कृति के महत्त्व को रेखांकित किया। ऑकलैंड (न्यूजीलैंड) के वरिष्ठ कवि रोहित कुमार हैप्पी ने कहा कि दूध दही अर राबड़ी सै म्हारी पैचाण। यो हरियाणा आपणा सै भारत की शान।
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सिडनी (आस्ट्रेलिया) की कवयित्री डॉ. भावना कुंअर ने दुनियादारी की बात करते हुए अपनी गजल के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए। चर्चित स्तंभकार डॉ. सत्यवान सौरभ ने कहा कि धरम-करम का पालणा, अड़ै गीता का उपदेस। सच म्हैं हरी का बास सै यो हरियाणा परदेस। इससे पूर्व चीफ ट्रस्टी डॉ. रामनिवास मानव ने हरियाणवी भाषा के स्वरूप और स्थिति पर प्रकाश डाला तथा अपने हरियाणवी दोहे प्रस्तुत किये।
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इस अवसर पर काव्य-पाठ करने वाले अन्य कवियों में वाक्वा (माॅरिशस) की कल्पना लालजी, सैन डिएगो (अमेरिका) की डॉ. कमला सिंह और ओमपति ग्रेवाल तथा कोपनहेगन (डेनमार्क) की सविता जाखड़ के अतिरिक्त भारत से अजमेर के गोविंद भारद्वाज, सिरसा की डॉ. शील कौशिक, हिसार के डॉ. सत्यवान सौरभ, रेवाड़ी के प्रो. मुकुट अग्रवाल, नारनौल की डाॅ. कृष्णा आर्य, डॉ. पंकज गौड़ और डॉ. जितेंद्र भारद्वाज, जींद की सोनिया पांचाल तथा रोहतक के डॉ. सत्यवीर निराला और बलबीर ढाका के नाम उल्लेखनीय हैं।
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